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जानिये किसके कहने पर Lata Mangeshkar ने गाया था भोजपुरी गाना, बीते दौर का यादगार किस्सा

पहली भोजपुरी फिल्म बन रही थी. इसलिये उसे सफल बनाने की हर संभव कोशिश की जा रही थी. फिल्म मेकर्स के कहने पर राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने लता मंगेशकर के सामने गाना गाने का प्रस्ताव रखा. लता दीदी राष्ट्रपति की बात को ना नहीं कह पाईं.

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लता मंगेशकर
लता मंगेशकर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दूसरों के लिये जीने वाली लता दीदी
  • भोजपुरी फिल्म में गाया गाना
  • सबकी मदद के लिये हाजिर रहती थीं

देशवासियों की आंखें नम हैं. हर ओर सन्नाटा पसरा है. संगीत की दुनिया की वो सुरीली आवाज जो हमेशा के लिये शांत हो गई. म्यूजिक इंडस्ट्री की शान लता मंगेशकर जैसा ना कोई था और ना कभी होगा. वो जितनी अच्छी गायिका थीं. उतनी ही अच्छी इंसान भी थीं. लता मंगेशकर को करीब से जानने वाले बताते हैं कि उन्होंने हमेशा खुद से पहले दूसरों की खुशियां देखीं. शायद यही वजह थी कि उन्होंने देश के पहले पीएम राजेंद्र प्रसाद के कहने पर एक भोजपुरी गाना गाया था. 

क्या है वो यादगार किस्सा?

ये बात 1950 की है. इसी साल डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को देश के पहले राष्ट्रपति की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने अपने जीवन का अधिकतर वक्त पटना के सदाकत आश्रम में गुजारना शुरू कर दिया. इस दौरान राष्ट्रपति से लोगों ने भोजपुरी फिल्में बनाने की गुहार लगाई. राजेंद्र प्रसाद भी इस पर सोच-विचार करने लगे. इस दौरान वो किसी कार्यक्रम के लिये मुंबई पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात नाजिर हुसैन से हुई. राष्ट्रपति से मिलने के बाद नाजिर हुसैन ने भी उनके सामने भोजपुरी फिल्मों की सिफारिश की. काफी सोचने के बाद आखिरकार राजेंद्र प्रसाद ने नाजिर साहब को भोजपुरी फिल्म बनाने की परमिशन दे दी. 

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इसके साथ ये भी कहा कि फिल्म बनाने में किसी भी तरह की मदद मांगने में संकोच न करें. नाजिर हुसैन बिहार के रहने वाले थे. फिल्म बनाने की परमिशन मिल गई, लेकिन उनके पास उसके निर्माण के लिये पर्याप्त पैसे नहीं थे. पर वो कहते हैं न कि जहां चाह वहां राह. फिल्म के सिलसिले में नाजिर हुसैन फिल्म स्टूडियो और थेएटर का व्यापार संभालने वाले कारोबारी विश्वनाथ प्रसाद शाहाबादी से मिले. दोनों ने बातचीत करके भोजपुरी फिल्म बनाने का जिम्मा विमल रॉय को सौंपा. पर इत्तेफाक से ये मौका विमल रॉय की जगह कुंदन कुमार को मिल गया. 

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जब लता दीदी ने गाया भोजपुरी गाना
कहते हैं कि वो एक दौर था. जब फिल्म में कहानी से ज्यादा लता दीदी के गाने मायने रखते थे. जिस फिल्म में लता मंगेशकर का गाना ना हो वो फिल्म अच्छा प्रदर्शन करने से चूक जाती थी. पहली भोजपुरी फिल्म बन रही थी. इसलिये उसे सफल बनाने की हर संभव कोशिश की जा रही थी. फिल्म मेकर्स के कहने पर राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने लता मंगेशकर के सामने गाना गाने का प्रस्ताव रखा. लता दीदी राष्ट्रपति की बात को ना नहीं कह पाईं. इसके बाद उन्होंने भोजपुरी फिल्म का टाइटल ट्रैक 'गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो'  गाया. इस गाने को लता मंगेशकर के साथ उषा मंगेशकर ने भी अपनी आवाज दी थी. 

1963 में रिलीज हुई फिल्म हिट साबित हुई और लता मंगेशकर का गाया हुआ गाना भी. इस गाने के बाद छोटे से गांव और कस्बे के लोग भी लता दीदी को जानने लगे. तो ऐसी थी हमारी लता मंगेशकर, जो दूसरों की खुशियों के लिये कुछ भी कर गुजरती थीं.
 

 

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