
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक फैसला सुनाया है कि हर देशवासी का दिमाग हिल गया है. कोर्ट ने 2004 के एक यौन उत्पीड़न मामले में रेप की सजा को बदलकर 'रेप की कोशिश' यानी अटेम्प्ट टू रेप कर दिया. साथ ही रेपिस्ट की सजा भी कम करते हुए 7 साल से 3.6 साल कर दी. हाई कोर्ट के मुताबिक बाहर इजैकुलेशन होना रेप केस की कैटेगरी में नहीं आता.
विशाल ने की निंदा
कोर्ट के इस फैसले पर म्यूजिक कम्पोजर विशाल ददलानी का भी गुस्सा फूट पड़ा है. विशाल अपनी बेबाक राय देने के लिए जाने जाते हैं. वो अक्सर कई मुद्दों पर सामने आकर बेझिझक अपनी असहमति, नाराजगी या गुस्सा जाहिर करते हैं.
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के इस फैसले पर विशाल ने अपने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि- सीरियसली! ये क्या है! आपको ऐसे जजों के नाम और उनकी तस्वीरें भी ऐसे फैसलों के साथ पोस्ट करनी चाहिए. उनकी पत्नियां, बेटियां, बहनें और मां देखें कि उनके घर का ‘आदमी’ क्या सोचता है. लगता है कोई रेपिस्ट बचाओ अभियान चला रहा है.

क्या था मामला?
प्रॉसिक्यूशन के मुताबिक, ये घटना 21 मई 2004 की है. आरोप था कि आरोपी ने पीड़िता को घर में घसीटकर एक कमरे में बंद किया, उसके हाथ-पैर बांधे, मुंह दबाया और उसके साथ गंदी हरकत की. इस मामले में एफआईआर दर्ज हुई थी. पहले धमतरी की अतिरिक्त सत्र अदालत ने आरोपी को IPC की धारा 376(1) (रेप) और 342 (गलत तरीके से बंधक बनाना) के तहत दोषी ठहराया था.
लेकिन जब मामला हाई कोर्ट में अपील पर पहुंचा, तो कोर्ट ने पीड़िता के बयान और मेडिकल रिपोर्ट में कुछ विरोधाभास देखे. मेडिकल रिपोर्ट में रेपिस्ट के सुराग मिले, लेकिन विक्टिम का हाइमन सुरक्षित पाया गया. डॉक्टर रेप की पुष्टि साफ तौर पर नहीं कर पाए.
सबूतों की जांच के बाद हाई कोर्ट ने माना कि हमला हिंसक था और इरादा साफ था, लेकिन उस समय के कानून के मुताबिक ये रेप नहीं था. इसलिए रेप की सजा को बदलकर IPC की धारा 376/511 के तहत 'रेप की कोशिश' कर दिया गया. आरोपी को 3 साल 6 महीने की सख्त कैद और 200 रुपये जुर्माने की सजा दी गई. गलत तरीके से बंधक बनाने की सजा बरकरार रखी गई. कोर्ट ने आरोपी को ट्रायल कोर्ट में सरेंडर कर बाकी सजा काटने का निर्देश दिया है.