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'कितने आदमी थे' 70 टेक में शूट हुआ था शोले का ये सीन, तम्बाकू ने डाला पंगा

फिल्म शोले में गब्बर के पहले ही सीन के वक्त एक्टर अमजद खान के हाथ-पांव कांपने लगे थे. इसका नतीजा ये हो रहा था कि वो अपना इंट्रो-सीन ठीक तरह से डिलीवर नहीं कर पा रहे थे और करीब 70 से ज्यादा टेक दे चुके थे.

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गब्बर के लिए अमजद खान ने बहाया पसीना (Photo: ITGD)
गब्बर के लिए अमजद खान ने बहाया पसीना (Photo: ITGD)

बॉलीवुड की सबसे आइकॉनिक फिल्म शोले आज भी कई लोगों की फेवरेट है. भले ही लोग अब धुरंधर को आइकॉनिक फिल्म मानते हों, मगर जो सिनेमा 1975 में फिल्म शोले ने दिखाया वो भुलाए नहीं भूलता है. इसका हर सीन, डायलॉग, एक्टर सबकुछ यादगार रहे. फिल्म के हीरो के साथ-साथ विलेन को भी लोगों ने पसंद किया. 

शोले का गब्बर बॉलीवुड का सबसे आइकॉनिक विलेन माना जाता है. जिस तरह एक्टर अमजद खान ने अपनी एक्टिंग से लोगों के दिलों पर छाप छोड़ी थी, उसके लिए उन्हें कई सारे अवॉर्ड्स से नवाजा भी गया. जो खौफ उन्होंने गब्बर के रोल से पैदा किया था, उसके सामने धुरंधर का रहमान डकैत या मेजर इकबाल भी फीका माना जाए. लेकिन इस रोल को करने में अमजद खान ने कितनी मेहनत की, ये शायद बेहद कम लोग ही जानते होंगे.

गब्बर निभाने से पहले नर्वस थे अमजद खान

हाल ही में अमजद खान के बेटे शादाब खान विक्की लालवानी के यूट्यूब चैनल पर आए. वहां उनसे उनके पिता के आइकॉनिक किरदार पर सवाल किया गया. उनसे पूछा गया कि अमजद खान शोले की शूटिंग से पहले काफी घबराहट में थे. शादाब ने बताया कि उनके पिता के लिए ये रोल काफी बड़ी बात थी.

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शादाब ने कहा-  शोले में उनका पहला सीन जहां वो सांभा से पूछते हैं कि कितने आदमी थे, उसी के एक हिस्से को शूट करने में उन्हें 70 से ज्यादा टेक लेने पड़े थे. जब वो पत्थर पर बैठकर तम्बाकू अपने हाथ में रगड़ रहे होते हैं. उनका डायलॉग था कि पचास-पचास कोस दूर जब बच्चा रोता है, मां कहती है सो जा वरना गब्बर सिंह आएगा. तो उस दौरान वो डायलॉग के साथ-साथ तम्बाकू रगड़ने में तालमेल नहीं बिठा पा रहे थे. वो कंफ्यूज थे. दोनों चीजें एक साथ सही से डिलीवर नहीं कर सके क्योंकि वो बहुत नर्वस थे. 

शादाब ने अमजद खान की इस नर्वसनेस का कारण भी बताया. उन्होंने कहा कि एक्टर थिएटर में माहिर थे, लेकिन उनके लिए फिल्मों में काम करना एक बहुत बड़ा शिफ्ट था. उनके ऊपर गब्बर का रोल अच्छे से निभाने का दबाव था. शादाब ने कहा कि इस सीन को करते वक्त करीब 70-74 टेक हो गए थे, तभी फिल्म के डायरेक्टर रमेश सिप्पी ने उन्हें समझाया और उनकी नर्वसनेस दूर करने की कोशिश की. 

कैसे अमजद खान को रमेश सिप्पी ने किया तैयार?

अमजद खान के बेटे ने कहा- रमेश जी ने कहा कि अमजद इस शेड्यूल में हम तुम्हारे कोई सीन शूट नहीं करेंगे. आप थोड़ा समय लेकर खुद को तैयार कर लो. उन्होंने मेरे पिता को प्रोडक्शन की सेकेंड यूनिट का इनचार्ज बना दिया, जो दूसरी जगह फिल्म की शूटिंग को संभाल रहे थे. वहां वो गब्बर की ड्रेस में रहते थे और शूट संभालने के साथ-साथ अपने रोल की तैयारी करते थे. रमेश जी चाहते थे कि मेरे पिता फिल्म में अच्छा काम करें. फिर उन्होंने सेकेंड शेड्यूल में बेहतरीन काम किया. 

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एक्टर अमजद खान का निधन 1992 में 51 साल की उम्र में हुआ था. उनकी मौत का कारण हार्ट-अटैक बताया जाता है. अमजद खान ने अपने करियर में 130 से भी ज्यादा फिल्मों में काम किया और अनगिनत अवॉर्ड्स भी अपने नाम किए. 

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