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नहीं है तैमूर और जेह को फिल्में देखने की इजाजत, Sharmila Tagore ने बताई वजह

शर्मिला टैगोर की जो फिल्म इनाया ने देखी है, वह अभी तक रिलीज नहीं हुई है. ऑडियन्स किस तरह उसपर रिएक्ट करेगी, यह वह नहीं जानती हैं. दरअसल, इनाया ने फिल्म देखकर जो रिएक्ट किया, वह मां सोहा अली खान के कहने पर किया था.

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शर्मिला टैगोर शर्मिला टैगोर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • तैमूर और जेह ने नहीं देखी शर्मिला की फिल्में
  • नहीं है दोनों को फिल्में देखना अलाऊ
  • करीना संग शूट पर हैं जेह

एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर (Sharmila Tagore) फिल्मों में वापसी के लिए तैयार हैं. पूरे 11 साल बाद शर्मिला टैगोर फैमिली ड्रामा फिल्म 'गुलमोहर' से कमबैक कर रही हैं. हाल ही में एक इंटरव्यू में शर्मिला टैगोर से पूछा गया कि उनके ग्रैंडकिड्स ऑनस्क्रीन उन्हें देखकर कैसे रिएक्ट करते हैं. इसपर शर्मिला टैगोर ने बताया कि इनाया ने उन्हें एक बार स्पेशल मैसेज के साथ बधाई दी थी. 

शर्मिला ने कही यह बात
हालांकि, शर्मिला टैगोर की जो फिल्म इनाया ने देखी है, वह अभी तक रिलीज नहीं हुई है. ऑडियन्स किस तरह उसपर रिएक्ट करेगी, यह वह नहीं जानती हैं. दरअसल, इनाया ने फिल्म देखकर जो रिएक्ट किया, वह मां सोहा अली खान के कहने पर किया था. वहीं, सैफ अली खान और करीना कपूर खान के बच्चों पर शर्मिला टैगोर ने कहा कि तैमूर और जेह दोनों को ही मेरी फिल्में देखने की इजाजत नहीं है. शर्मिला टैगोर का कहना है कि अगर तैमूर और जेह ने उन्हें ऑनस्क्रीन देखा तो दोनों के लिए यह काफी मुश्किल होगा. 

जब राजकुमार की विग के लिए शर्मिला टेगौर को देनी पड़ी थी इतनी बड़ी कुर्बानी

सारा अली खान और इब्राहिम अली खान, शर्मिला टैगोर की जब भी कोई फिल्म देखते हैं तो उन्हें 'वेल डन' कहते हैं. शर्मिला टैगोर का कहना है कि दोनों के पास और कुछ भी कहने के लिए नहीं होता है. फिल्म 'गुलमोहर' की बात करें तो इस फिल्म में शर्मिला टैगोर के अलावा मनोज बाजपेयी, अमोल पालेकर, सूरज शर्मा और सिमरन ऋषि बग्गा लीड रोल में नजर आने वाले हैं. 

11 साल बाद Sharmila Tagore का कमबैक, फिल्म Gulmohar साइन करने की बताई वजह

'गुलमोहर', पूरी तरह से एक पारिवारिक फिल्म है, जिसकी कहानी मल्टी जेनरेशन, बत्रा फैमिली के इर्द गिर्द घूमती है जो अपने 34 साल पुराने पारिवारिक घर को छोड़कर कहीं और जाने के लिए तैयार हैं. यही हालात उन्हें अपने रिश्तों की मजबूती को फिर से परखने का मौका देते हैं. जो एक वक्त, एक सूत्र में बंधा था. जब आपसी रिश्तों के राज और असुरक्षित भावनाएं पनपती हैं तब असल धागों का रंग पता चलता है और यही है इस फिल्म की दास्तान.

 

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