रत्ना पाठक शाह उस एक दिन के इंतजार में हैं, जब लोग नफरत से थक जाएंगे, और फाइनली उम्मीद की तरफ अपना रुख करेंगे. रत्ना का मानना है, आज जहां हर चीज को पॉलिटिकल एंगल दे दिया जा रहा है, हिंदी फिल्म इंडस्ट्री हर दिन नफरत का दौर झेल रही है, वहां कभी तो पॉजिटीविटी का दौर आएगा. कभी तो ये सब खत्म होगा. पठान फिल्म के बेशर्म रंग गाने पर मचे विवाद के बीच रत्ना पाठक शाह ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में कहा लोगों के पास खाने को नहीं है, लेकिन किसी और के कपड़ों पर जरूर विवाद करना नहीं भूलते.
देश में नासमझी का दौर
इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में रत्ना पाठक ने बताया कि एक आर्टिस्ट के तौर पर ये बिल्कुल मायने नहीं रखता कि आपने कब-कौन से रंग के कपड़े पहने हैं. उस पर भी ये नेशनल टॉपिक बन जाए. ये बात करने लायक टॉपिक ही नहीं है. रत्ना ने कहा- हम एक बहुत ही नासमझी के दौर में जी रहे हैं. अगर ये ही सब बातें आपके दिमाग में चलती रहेंगी, तो कुछ सही नहीं होगा. यह ऐसा कुछ नहीं है जिसके बारे में मैं बहुत ज्यादा बात करना चाहूंगी या इसे ज्यादा महत्व दूंगी.
कभी तो खत्म होगा नफरत का दौर
रत्ना ने बातचीत में आगे कहा- मुझे लगता है, इस वक्त जितने लोग एक्टिव दिख रहे हैं, उससे कहीं ज्यादा सेंसिबल लोग इस दुनिया में हैं. वे निकल आएंगे, क्योंकि जो हो रहा है, यह भय की भावना, बहिष्कार की भावना है, जो कि टिकाऊ नहीं है. ये ज्यादा लंबा नहीं चलेगा. मुझे लगता है इंसान एक वक्त तक ही ऐसे नफरत के दौर को झेल सकता है. हर किसी के मन में एक विद्रोह होता है, लेकिन तब आप नफरत से थक जाते हैं. मैं उस दिन के आने का इंतजार कर रही हूं.
पठान पर मचा हंगामा
पिछले कुछ सालों सें हिंदी फिल्म इंडस्ट्री लगातार मीडिया हेट का शिकार हो रही है. कई फिल्मों के विरोध तो सड़कों पर भी उतर आए. पठान फिल्म के गाने का भी यही हाल हुआ. बीते दिन ही राइट विंग के लोगों ने फिल्म के खिलाफ प्रदर्शन किया. ये प्रोटेस्ट शाहरुख की फिल्म डंकी के सेट पर हुआ. प्रदर्शनकारियों को जब पता चला कि एक्टर जबलपुर में शूटिंग कर रह हैं, तो लोगों ने वहां पहुंचकर जमकर हंगामा किया था.