आयुष्मान खुराना आज बॉलीवुड के सबसे सफल और टैलेंटेड एक्टर्स की लिस्ट में गिने जाते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि उनके करियर की शुरुआत कैसे हुई थी? और तो और किसकी वजह से हुई थी? विक्की डोनर, बधाई हो, दम लगा के हईशा, अंधाधुन जैसी बढ़िया फिल्में दर्शकों को देने वाले आयुष्मान खुराना कई एक्टर्स की तरह एक आउटसाइडर हैं, जिन्होंने अपने फिल्म करियर की शुरुआत 2012 में की थी. उन्होंने शूजित सिरकार की फिल्म विक्की डोनर से अपने करियर की शुरुआत की थी, जो काफी पसंद की गई.
आयुष्मान की पहली फिल्म के हिट होने के बाद लोगों को उनके बारे में जानने और उनकी फिल्मों में खूब दिलचस्पी होने लगी थी. अब भी बहुत से ऐसे फैन्स हैं जिन्हें लगता था कि आयुष्मान खुराना चंडीगढ़ से आए फिल्मों में आते ही फेमस हुए. लेकिन आयुष्मान इस बारे में कई बार बता चुके हैं कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत से पहले लंबा स्ट्रगल किया था.
फिल्मों में काम से पहले किया था स्ट्रगल
आयुष्मान ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने चंडीगढ़ से जर्नलिज्म की पढ़ाई की थी. इसके बाद वे मुंबई आए थे. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत थिएटर से की. उन्होंने अपने कॉलेज में 5 साल थिएटर किया था. ये साल 2001 से 2006 तक चला. इसके बाद साल 2006 से 2008 तक आयुष्मान ने रेडियो में काम किया, इसके बाद 2008 से 2012 तक टीवी और फिर आखिरकार 2012 में उनकी पहली फिल्म रिलीज हुई.
आयुष्मान ने बताया कि उनके पिता पी खुराना की वजह से वे मुंबई आए थे. असल में वे एक्टर बनने का सपना रखते थे लेकिन उन्होंने सोचा था कि वे एक साल लगातार बॉडी बनाएंगे, घुड़सवारी सीखेंगे और फाइट वगेरह सीखेंगे. वे पूरी तैयारी के साथ इंडस्ट्री में आना चाहते थे. हालांकि उनके माता-पिता ने ऐसा नहीं होने दिया. कम ही लोग जानते हैं कि आयुष्मान के पिता पी खुराना नार्थ इंडिया के एक फेमस ज्योतिषी हैं. उन्होंने ज्योतिष विद्या के बारे में काफी किताबें भी लिखी हैं.
पिता ने बताया भविष्य
आयुष्मान बताते हैं कि जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरे होने के समय उनके पिता ने उन्हें कहा था कि बेटा अगर तुम अभी नहीं जाओगे तो फिर अगले दो साल तक आपको काम ही नहीं मिलेगा. तो जैसे ही आयुष्मान के एग्जाम खत्म हुए, उसके अगले ही दिन उनके बैग पैक करके उन्हें टिकेट थमा दी गई और घर से मुंबई के लिए रवाना कर दिया गया.
उन्होंने बताया आने के बाद ज्यादा स्ट्रगल होती है. कैसे बरकरार रखना है. तीसरी फिल्म नहीं चली. कायम रखना पड़ता है. जद्दोजहत करनी पड़ती है . फिल्मों का चयन, डायरेक्टर प्रोड्यूसर सभी सीख रहा हु यहां रह कर सीख रहा हूं हिट फार्मूला क्रैक करना है.
इसके आगे आयुष्मान ने बताया कि मुंबई आने के बाद उनके पास यहां रहने की जगह नहीं थी. इसलिए वे अपने दोस्त के हॉस्टल में इल-लीगली रह रहे थे. उनका दोस्त KM हॉस्पिटल से MBBS की पढ़ाई कर रहा था और हॉस्टल में रहता था. आयुष्मान ने उसी से मदद लेकर उसके कमरे में छुपकर रहना शुरू कर दिया था. बाद में जब उन्हें काम मिलना शुरू किया तब वे दोस्त का हॉस्टल छोड़कर आगे बढ़े.