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कैसे मिली 'Jersey', क्रिकेटर बने शाहिद-रणवीर में कौन ज्यादा पसंद? Anjum Batra से खास बातचीत

83, जर्सी के बाद फैंस अंजुम बत्रा को कई और मजेदार प्रोजेक्ट्स में देख पाएंगे. अंजुम बत्रा ने आज तक डॉट इन के साथ खास बातचीत में जर्सी में अपने रोल, फिल्म के पोस्टपोन होने, शाहिद कपूर-रणवीर सिंह संग काम करने के एक्सपीरियंस और 83 की सक्सेस पर बात की.

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अंजुम बत्रा अंजुम बत्रा
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मूवी जर्सी में नजर आएंगे अंजुम बत्रा
  • फिल्म 83 में निभाया अहम किरदार
  • शाहिद कपूर के बेस्ट फ्रेंड बने हैं अंजुम

फिल्म 83 में भांगड़ा कर विदेशी जमीं पर भारत का रंग जमाने वाले कुलवंत सिंह तूर यानी अंजुम बत्रा इन दिनों सुर्खियों में छाए हुए हैं. 83 में चाहे उनका रोल छोटा रहा, लेकिन असरदार था. 83 में अपनी छाप छोड़ने के बाद अब अंजुम बत्रा को आप शाहिद कपूर की फिल्म जर्सी में देखेंगे.अंजुम बत्रा ने अभय देओल स्टारर मूवी देव डी से अपने करियर की शुरुआत की थी. इसके बाद उन्होंने टीवी पर काम किया. अंजुम को उनकी उम्दा एक्टिंग की वजह से लोग नोटिस करने लगे हैं.

83, जर्सी के बाद फैंस उन्हें कई और मजेदार प्रोजेक्ट्स में देख पाएंगे. अंजुम बत्रा ने Aajta.in के साथ खास बातचीत में जर्सी में अपने रोल, फिल्म के पोस्टपोन होने, शाहिद कपूर-रणवीर सिंह संग काम करने के एक्सपीरियंस और 83 की सक्सेस पर बात की.

सवाल- 83 को मिल रही सक्सेस पर क्या बोलना चाहेंगे? 

अंजुम बत्रा- कहावत है पूत के पैर पालने में पता चल जाते हैं. पता तो था लोगों का इमोशन जुड़ा हुआ है इस फिल्म के साथ. मैंने 83 की जीत को नहीं देखा, मेरे जैसे कई यंगस्टर्स हैं जिन्हें नहीं पता था कि 83 में हम कैसे वर्ल्ड कप जीते. हम सभी को उम्मीद थी कि ये फिल्म सक्सेफुल होगी. कबीर खान का डायरेक्शन, रणवीर सिंह, साकिब, एमी, हार्डी, मैं.. चाहे मेरा पार्ट छोटा था. हम सबके योगदान का ये नतीजा है. अब जब चीज बन जाती है, हमें रिवॉर्ड मिल गया है तो इसकी सक्सेस देख काफी बढ़िया फीलिंग हो रही है.

सवाल- ओमिक्रॉन के बढ़ते केसेज की वजह से जर्सी पोस्टपोन हो गई है. कोरोना की वजह से एक बार फिर फिल्म इंडस्ट्री पर संकट नजर आ रहा है. इस पर आप क्या कहना चाहेंगे?

अंजुम बत्रा- बहुत मेहनत लगी है जर्सी में. मैंने 1 महीना शूट किया था इसके लिए. बीच में लॉकडाउन हो गया था, मार्च में मैं शूटिंग कर रहा था, फिर पोस्टपोन हुआ फिर हमने 2020 में दिसंबर में मूवी को शूट किया. इस मूवी को बनने में काफी दिक्कतें आईं. अभी फिर कोरोना की वजह से मूवी पोस्टपोन करनी पड़ रही है. 50% ऑक्यूपेंसी मुंबई में हो गई है. बाकी जगहों पर नाइट कर्फ्यू लगाने की भी बात हो रही. ऐसे में फिल्म का रेवेन्यू जनरेट नहीं हो पाएगा. 

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83 की कमाई की धीमी रफ्तार पर बोलते हुए अंजुम बत्रा ने कहा- नंबर्स किसी भी फिल्म के लिए बहुत मायने रखते हैं. वर्ड ऑफ माउथ की वजह से लोग जा रहे हैं थियेटर्स. लेकिन रेवेन्यू उतना जनरेट नहीं हो पा रहा जितना होना था. लोगों के दिमाग में नए वैरिएंट का डर है. 

सवाल- 83 के बाद जर्सी, बैक टू बैक दो क्रिकेट बेस्ड फिल्में करने का एक्सपीरियंस कैसा रहा? अपने जर्सी के रोल के बारे में बताइए.

अंजुम बत्रा- 83 में मैंने क्रिकेट फैन का रोल किया है. जबकि रियल लाइफ में मुझे क्रिकेट का C भी नहीं पता है. 83 में मैं क्रिकेट फ्रीक बना हूं, ऐसा आदमी जिसे क्रिकेट के बारे में सब कुछ पता है और वो रोल ऐसा इंसान प्ले कर रहा है जिसे क्रिकेट का कुछ भी नहीं पता. जर्सी में मेरा क्रिकेट से डायरेक्टली कोई वास्ता नहीं है. उसमें शाहिद का बेस्ट फ्रेंड बना हूं तो मैं उसके हर सुख दुख में साथ हूं. फिल्म क्रिकेट की है. कहीं ना कहीं जो बेटा जर्सी मांग रहा है और बाप के पास देने के लिए 500 रुपये नहीं है, उस 500 रुपये की जद्दोजहद में मैं हर पल उसके साथ हूं. मैं जर्सी में शाहिद की जर्नी में उसका साथ दे रहा हूं.

सवाल- जर्सी फिल्म साउथ की रीमेक है. जिसे काफी पसंद किया गया था. क्या आपको लगता है फिल्म का हिंदी वर्जन उतना ही कमाल कर पाएगा?

अंजुम बत्रा- मैंने साउथ वाली और हिंदी वाली दोनों फिल्में देखी हैं. बहुत कमाल का काम किया है. मेरे रोल को वहां के स्टार प्रवीण ने प्ले किया है. मेरे लिए बड़ा बर्डन था. जब डायरेक्टर ने मुझे स्क्रिप्ट सुनाई. कहा- यार अंजुम साउथ वाला एक्टर था प्रवीण जब जब वो स्क्रीन पर आता था ऑडियंस ताली मारती थी. क्या ये आपके साथ संभव होगा? 

मैंने कहा- सर, देखो, मैं अपना बेस्ट करूंगा. मैं इस कैरेक्टर में अपनी जान फूंक दूंगा. वैसे मैंने किया था. वो काफी खुश थे. साउथ की जर्सी जब हिंदी में डब होकर आई तो और लोगों ने देखी. शाहिद की फैन फॉलोइंग अलग है. साउथ की फिल्मों का अलग दायरा होता है. मेरे जैसे कई लोग हैं जो डब देखना पसंद नहीं करते. मुझे लगता है हिंदी, पंजाबी ऑडियंस हमारी फिल्म पसंद करेगी. साउथ वाले लोग भी ये सोचकर फिल्म देखने आएंगे कि शाहिद क्या अलग बना रहा है. दोनों फिल्मों में क्या अंतर है. लेकिन तकरीबन दोनों मूवीज सेम है, एक्टर्स नए हैं.

सवाल- आप शाहिद कपूर और रणवीर सिंह के साथ स्पोर्ट्स ड्रामा में काम कर चुके हैं. इंडस्ट्री के इन टॉप एक्टर्स के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? 

अंजुम बत्रा- मैं बस यही कहूंगा कि दोनों हद दर्जे के डेडिकेटेड आर्टिस्ट हैं. एक दिन ग्राउंड में शूट चल रहा था, इस बीच जब कैमरा रीसेट होता है तब आप आराम से बैठ सकते हो, खा पी सकते हो. उस दिन मैं 8 घंटे ग्राउंड में था. मैंने देखा रणवीर कभी फील्डिंग, बैटिंग, कीपिंग की प्रैक्टिस कर रहे थे. मैं हैरान था कि ये इतनी एनर्जी लाते कहां से हैं.

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वहीं शाहिद-रणवीर उनको सारी स्क्रिप्ट याद रहती है. उन्हें को-एक्टर्स के डायलॉग भी याद रहते थे. वे एक लाइन नहीं भूलते थे. ये लोग काफी मेहनत करते हैं. मैंने शाहरुख सर के साथ फिल्म हैरी मेट सेजल के डायलॉग पर काम किया था. रातभर हम मन्नत में बैठे रहे. उन्हें अपने डायलॉग रटे होते थे. जितने भी बड़े स्टार्स हैं ये ऐसे ही नहीं बनते वो अपने काम के प्रति काफी ईमानदार होते हैं. रणवीर-शाहिद में ये भी हुनर है कि को-स्टार्स को कैसे स्पेस देना है, उन्हें कंफर्टेबल बनाना है. 

सवाल- आपको शाहिद कपूर और रणवीर सिंह में से क्रिकेटर के रोल में कौन ज्यादा पसंद आया?

अंजुम बत्रा- रणवीर के अच्छा लगने में क्या है कि वो कपिल देव का रोल प्ले कर रहे हैं. कपिल देव को हम बचपन से काफी प्यार करते हैं. 83 में रणवीर को कपिल देव जैसा ही लुक दिया गया है. शाहिद का इमेजनरी कैरेक्टर है. जो प्ले कर रहे वो इंस्पिरेशन से कर रहे हैं. मुझे दोनों अच्छे लगे. लेकिन क्योंकि रणवीर में कपिल देव की छवि नजर आ रही है इस वजह मैं थोड़ा सा रणवीर सिंह की तरफ झुक जाऊंगा. लेकिन मूवी में दोनों प्रोफेशनल क्रिकेटर लग रहे हैं. उन्होंने कमाल का काम किया है. 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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सवाल- हमने सुना आपने भांगड़ा करते हुए 83 का वीडियो ऑडिशन में दिया था. क्या है पूरा किस्सा, ऐसा क्यों किया?

अंजुम बत्रा- मुझे मुकेश छाबड़ा के ऑफिस से फोन आया था. वो मुझे जानते हैं. बड़े भाई की तरह हैं. उन्हें पता था कि बतौर एक्टर तो ये काम कर लेगा. बस ये देख लेते हैं कि ये भांगड़ा कर पाएगा कि नहीं. वे शायद भूल गए थे कि मैंने 8 साल स्कूल, कॉलेज में भांगड़ा किया था. मेरे लिए भांगड़ा करना मेरी टैरिटेरी थी. उन्होंने मुझे कहा कि अंजुम पाजी ऑडिशन है आपको डायलॉग रिकॉर्ड नहीं करना बस भांगड़े की एक अच्छी सी वीडियो बना दो. जिसे देख आदमी का नाचने का मन करे. फिर बस दो दिन में मुझे कॉल आ गया था. ये बड़ी अतरंगी सी चीज थी.

सवाल- आपने देव-डी मूवी से करियर शुरू किया था, सुनील का रोल आपको कैसे मिला था?

अंजुम बत्रा- मैं पंजाब यूनिवर्सिटी से इंडियन थियेटर्स डिपार्टमेंट में मास्टर्स कर रहा था. अनुराग कश्यप के कास्टिंग डायरेक्टर गौतम किशन चंदानी और वासंत बाला, ये दोनों मेरे अपार्टमेंट में आए थे. उन्हें एक पर्टिकुलर रोल के लिए एक्टर चाहिए था. उन्होंने मुझे देखा तो कहा कि वो सफेद जूते वाले को बाहर भेजो. उन्होंने मुझे ऑडिशन के लिए अगले दिन बुलाया. बाद में गौतम किशन चंदानी ने मुझे कहा कि आज तक मैंने ऐसा ऑडिशन नहीं लिया. देव डी में लोगों ने मेरे कैरेक्टर को बहुत प्यार दिया.

सवाल- आप पंजाबी मूवी का भी हिस्सा हैं. पंजाबी सिनेमा और बॉलीवुड में काम करने में कितना फर्क है?

अंजुम बत्रा- सबसे बड़ी बात है भाषा और बजट की है. पंजाबी मूवी 3-4 करोड़ में बन जाती है. वहीं हिंदी मूवीज का 100 करोड़ का बजट होता है. पंजाबी फिल्मों का दायरा छोटा है. पंजाबी इंडस्ट्री अभी ग्रो कर रही है. एक बच्चा है तो दूसरा अधेड़ उम्र का है बाप बन चुका है. एक और अंतर है स्क्रिप्ट का. पंजाबी इंडस्ट्री में कई दफा आपको स्क्रिप्ट रेडी नहीं मिलती. वहीं हिंदी इंडस्ट्री में फिल्म बनने से 1 महीना पहले स्क्रिप्ट तैयार मिलती है. लेकिन अभी पंजाबी इंडस्ट्री में भी बदलाव आ रहे हैं. 

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सवाल- आपने टीवी पर भी काम किया है, क्राइम पेट्रोल में आप नजर आए हैं. टीवी पर क्या फैंस आपको फिर से देख पाएंगे?    

अंजुम बत्रा- मेरा टीवी करने का बहुत मन है. क्राइम पेट्रोल ने मुझे रोजी रोटी दी है. मैंने फिल्म देव डी कर ली थी, उसके बाद 1 साल तक मेरे पास काम नहीं था. फिर क्राइम पेट्रोल में काम मिला. इन्होंने मेरे घर का खर्चा उठाया है. मैंने 100 से ज्यादा एपिसोड किए हैं, लीड निगेटिव ज्यादा किए हैं. आपके मेन हीरो बनकर आने की जो इच्छा होती है वो टीवी ने ही मेरी पूरी की है. जहां आप ही गोलियां चला रहे हो, मर्डर कर रहे हो. मेरी टीवी पर स्कूलिंग भी हुई. आपको बेसिक सीखने को मिला. अगर कभी क्राइम पट्रोल दोबारा शुरू होता है तो मैं यकीनन ये शो करूंगा. कई दफा मेरा मन डेली शोप करने का भी मन होता है. पर मैं सोचता हूं ऐसे रोल्स से मैं बोर हो जाऊंगा. मुझे लगता है कि मैं एक ही कैरेक्टर में वैरिएशन दे भी पाऊंगा या नहीं

सवाल- आजकल ओटीटी पर एक्टर्स शिफ्ट हो रहे हैं. आपके ओटीटी को लेकर क्या प्लान्स हैं?

अंजुम बत्रा- मेरा ओटीटी करने का बिल्कुल मन है. कई बार मुझे प्रोजेक्ट्स के लिए कॉल्स आए, स्क्रिप्ट भी आईं, लेकिन पता नहीं क्या वजह रही बात नहीं बना पाई. शायद भगवान ने मेरे लिए कुछ और अच्छा सोचा है.

सवाल- अपने अपकमिंग प्रोजेक्ट्स के बारे में बताएं... 

अंजुम बत्रा- मैं अभी दो हिंदी फिल्मों पर काम कर रहा हूं. दोनों ही अच्छी फिल्में हैं. अच्छे बैनर की हैं. एक के लिए मैं चंडीगढ़ में शूट भी कर रहा हूं. ये शानदार कॉमेडी फिल्म है, इसकी स्क्रिप्ट करने के बाद मैं खुद को रोक नहीं पाया.

 

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