अभिमन्यु सिंह की आज इंडस्ट्री में खास पहचान है. उन्हें 'रक्त चरित्र' के बुक्का रेड्डी के रूप में जाना जाता है. लेकिन करियर में इतना आगे आना उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं था. उनकी जर्नी मुश्किलों से भरी रही, क्योंकि अभिमन्यु ने जब बॉलीवुड में कदम रखा था, तब उनका न कोई गॉडफादर था न कोई कनेक्शन. वो अपनी मेहनत के दम पर आगे बढ़े और अपनी पहचान बनाई.
एक्टर का छलका दर्द
अभिमन्यु सिंह ने करीब 8 साल तक थिएटर किया. इसके बाद मनोज बाजपेयी ने उनका नाम फिल्ममेकर राकेश ओमप्रकाश मेहरा को सजेस्ट कर दिया था. इस तरह उन्हें पहली फिल्म मिली. एक्टर की पहली ही फिल्म में उनके साथ महानायक अमिताभ बच्चन लीड रोल में थे. ये अभिमन्यु के लिए किसी सपने के सच होने जैसा था. मगर फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हुई और इसका उनके करियर पर बुरा असर पड़ा.
हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने इस फिल्म के फ्लॉप होने के बाद के हालातों पर खुलकर बात की. अभिमन्यु ने बताया कि फिल्म इंडस्ट्री के इतने बड़े सुपरस्टार के साथ काम करने के बावजूद भी उन्हें आगे काम नहीं मिला, क्योंकि फिल्म फ्लॉप हो गई थी. एक समय पर वो पूरी तरह खाली थे. उनके पास कोई काम नहीं था.
हिंदी रश संग बातचीत में अभिमन्यु ने कहा- मनोज बाजपेयी मेरा प्ले देखने आए थे और उसके बाद उन्होंने राकेश मेहरा को मेरे नाम सजेस्ट किया था. फिर, राकेश ने मेरा स्क्रीन टेस्ट लिया और मुझे 'अक्स' फिल्म के लिए फाइनल कर लिया. यह मेरी पहली फिल्म थी, जो बहुत बुरी तरह फ्लॉप हो गई थी.
टीवी में भी नहीं मिला काम
एक्टर ने आगे कहा- लोगों को लगता है कि अभिमन्यु सिंह को अपनी पहली ही फिल्म अमिताभ बच्चन के साथ मिल गई, तो बहुत शानदार करियर ग्राफ होगा. लेकिन ये सच नहीं है. उस फिल्म के रिलीज के बाद मुझे टीवी सीरियल्स तक में काम नहीं मिल रहा था. अगर फिल्म फ्लॉप हो जाती है, तो फिर चाहे आपने उसमें कितनी भी अच्छी एक्टिंग की हो, उससे कोई फर्क नहीं पड़ता. आपको काम नहीं मिलता.
अभिमन्यु सिंह आगे बोले- अगर कोई फिल्म फ्लॉप हो जाती है, तो उसकी कोई गिनती नहीं होती. कई बार ऐसा होता है कि कुछ चीजें फ्लॉप तो होती हैं, लेकिन उनके कुछ हिस्से इतने अच्छे होते हैं कि उन्हें क्रिटिक्स से तारीफ मिल जाती है या फिर दर्शकों को कोई चीज ज्यादा पसंद आ जाती है. कभी-कभी ऐसा भी होता है कि कोई चीज पहले फ्लॉप हो जाती है और बाद में फिर से हिट हो जाती है.
कई बार ऐसा हुआ है कि कुछ फिल्मों ने रिलीज के एक हफ्ते बाद रफ्तार पकड़ती है. इस बारे में बात करते हुए वो आगे बोले- मुझे याद है कि पटना में 'तेजाब' की रिलीज के पहले दिन जब हम थिएटर गए थे तो वो खाली पड़ा थ. लेकिन हमें फिल्म बहुत पसंद आई थी. इसलिए 10 दिन के बाद हम दोबारा फिल्म देखने चले गए. उस वक्त थिएटर हाउसफुल था और टिकटें ब्लैक में बिक रही थीं. तब हमें पता चला कि फिल्म ने एक हफ्ते बाद रफ्तार पकड़ी थी.