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Uttarakhand Election: उत्तराखंड में सैनिकों को साधने में जुटे दल, समझें सियासी ताकत

उत्तराखंड में तकरीबन हर परिवार से एक व्यक्ति सेना में है या फिर उसका सैन्य परिवार से संबंध है. राज्य में सैन्य परिवारों से संबंधित 12 फीसद मतदाता हैं, जो किसी भी राजनीतिक दल का खेल बनाने और बिगाड़ने की ताकत रखते हैं.

हरीश रावत और पुष्कर धामी हरीश रावत और पुष्कर धामी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • उत्तराखंड में 12 फीसदी सैनिक वोटर्स हैं
  • सैनिकों को साधने में जुटे राजनीति दल
  • उत्तराखंड में हर परिवार से एक सैनिक है

उत्तराखंड की सियासत में सैनिकों का अहम रोल है, जिसके देखते हुए सत्तारूढ़ बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां सैनिक और पूर्व सैनिकों को लुभाने में जुटी हैं. बीजेपी सैन्यधाम को लेकर की जा रही तैयारी के जवाब में कांग्रेस शहीद सैनिकों के स्वजन और पूर्व सैनिकों को सम्मानित करने की मुहिम शुरू कर चुकी है. वहीं, आम आदमी पार्टी ने कर्नल अजय कोठियाल को सीएम फेस बनाकर सैन्य बहुल उत्तराखंड में फौजी वोट बैंक पर सेंध लगाने के लिए कदम बढ़ा दिए हैं. ऐसे में देखना है कि इस बार उत्तराखंड की सत्ता पर कौन काबिज होता है.  

उत्तराखंड में तकरीबन हर परिवार से एक व्यक्ति सेना में है या फिर उसका सैन्य परिवार से संबंध है. राज्य में सैन्य परिवारों से संबंधित 12 फीसद मतदाता हैं, जो किसी भी राजनीतिक दल का खेल बनाने और बिगाड़ने की ताकत रखते हैं. ऐसे में कांग्रेस इस बार पिछले चुनाव की तुलना में ज्यादा सावधान है, जिसके लिए किसान से लेकर सरकारी कर्मचारी, युवा और अब सैनिक को भी अपने साथ जोड़ने की मुहिम में लगी है. 

शहीद सम्मान यात्रा

बता दें कि 2017 के विधानसभा चुनाव में सैनिकों और पूर्व सैनिक मतदाताओं को साधने में बीजेपी आगे रही थी. यही वजह है कि इस बार भी बीजेपी की नजर सैनिक परिवार को वोटों पर हैं. इसी के मद्देनजर बीजेपी देहरादून में बनाए जा रहे सैन्यधाम में प्रदेश में शहीद सैनिकों से संबंधित गांवों की मिट्टी लाने के लिए शहीद सम्मान यात्रा निकाल रही है. 

सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक जैसी घटनाओं से बीजेपी के पक्ष में बने माहौल को देखते हुए कांग्रेस का जोर सैनिकों और पूर्व सैनिकों को लुभाने पर है. हालांकि, बीजेपी ने उत्तराखंड में नैनीताल-ऊधमसिंह नगर के सांसद अजय भट्ट को केंद्र में रक्षा राज्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंप रखी है. इसके साथ ही मंत्री अजय भट्ट भी पूर्व सैनिकों से बातचीत आगे बढ़ाने में जुट गए हैं. मंत्री बनने के बाद से वह लगातार पूर्व सैनिकों के संपर्क में नजर आ रहे हैं.

कांग्रेस की भी तैयारी

उत्तराखंड में बड़ी संख्या में सैन्य परिवारों को देखते हुए कांग्रेस उन्हें साधने की हर मुमकिन कोशिश में जुट गई है. बीजेपी के शहीद सैनिकों के गांवों की मिट्टी को सैन्यधाम की कोशिशों को संजीदगी से ले रही कांग्रेस ने जवाबी रणनीति के तौर पर शहीद सैनिकों के परिजनों और पूर्व सैनिकों को गांवों में जाकर सम्मानित करने का अभियान शुरू किया है ताकि सैनिकों को साधने में पीछे न रहे. 

पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस चुनाव अभियान समिति अध्यक्ष हरीश रावत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह समेत पार्टी के बड़े नेता इस अभियान को जोर-शोर से चला रहे हैं, पूरे प्रदेश में कांग्रेस का यह अभियान चल रहा है. पूर्व सैनिकों को पार्टी से जोड़ने की कवायद में जुटी कांग्रेस कोई कोर कसर इस बार नहीं छोड़ना चाह रही है.

प्रदेश में पूर्व सैनिकों की संख्या ढाई लाख से ज्यादा है. माना जाता है कि हर पूर्व सैनिक के परिवार में औसतन पांच वोटर होंगे. इसलिए साढ़े बारह लाख से ज्यादा वोटरों पर सभी की निगाहें हैं. इसके अलावा वर्तमान फौजियों के परिवार भी बड़ी संख्या में उत्तराखंड में रहते हैं. पूर्व फौजी उनके भी मतों पर असर डालते हैं. कई परिवार ऐसे भी हैं जिनमें पूर्व के साथ ही वर्तमान फौजी भी हैं. इसीलिए इस बार सैनिक परिवारों पर सभी मेहरमान हैं?  

 

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