उत्तराखंड की संगम नगरी हरिद्वार के पास है तीर्थ नगरी ऋषिकेश. ऋषिकेश एक विधानसभा क्षेत्र भी है. ऋषिकेश भारत के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है. ऋषिकेश को केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री का प्रवेशद्वार कहा जाता है. हर साल यहां के आश्रमों में बड़ी संख्या में तीर्थयात्री आते हैं. ऋषिकेश का धार्मिक महत्व है ही, राजनीतिक महत्व भी है. ये विधानसभा सीट देहरादून जिले में पड़ती है.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
ऋषिकेश विधानसभा सीट की राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो ये विधानसभा क्षेत्र भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का गढ़ रहा है. ऋषिकेश विधानसभा सीट पर बीजेपी का दबदबा रहा है. इस सीट पर 2007 से ही बीजेपी का कब्जा है. ऋषिकेश विधानसभा सीट से 2007 के चुनाव में बीजेपी के प्रेमचंद अग्रवाल विधायक निर्वाचित हुए थे और तब से इस सीट पर प्रेमचंद का कब्जा बरकरार है.
2017 का जनादेश
ऋषिकेश विधानसभा सीट से साल 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने दो बार के विधायक प्रेमचंद अग्रवाल पर ही दांव लगाया. बीजेपी के प्रेमचंद के सामने कांग्रेस ने राजपाल सिंह को चुनावी रणभूमि में उतारा. बीजेपी के प्रेमचंद ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस के राजपाल को करीब 15 हजार वोट के अंतर से हरा दिया था. निर्दलीय उम्मीदवार संदीप गुप्ता तीसरे नंबर पर रहे थे.
सामाजिक ताना-बाना
ऋषिकेश विधानसभा क्षेत्र के सामाजिक समीकरणों की बात करें तो यहां तीर्थ पुरोहितों की तादाद अधिक है. इस विधानसभा क्षेत्र में ब्राह्मण और क्षत्रिय के साथ ही वैश्य मतदाता भी सीट का चुनाव परिणाम तय करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं. ऋषिकेश विधानसभा क्षेत्र में अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाता भी अच्छी तादाद में हैं.
विधायक का रिपोर्ट कार्ड
ऋषिकेश विधानसभा सीट से विधायक प्रेमचंद अग्रवाल का दावा है कि उनके कार्यकाल में इलाके का विकास हुआ है. वे कहते हैं कि जनता ने भी हमारे विकास पर मुहर लगाते हुए तीन दफे विधानसभा में अपना प्रतिनिधित्व करने का मौका दिया. विपक्षी दलों के नेता प्रेमचंद के दावे को हवा-हवाई बता रहे हैं. विपक्षी नेताओं का दावा है कि इलाके की समस्याएं जस की तस हैं.