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बीजेपी में एक बार फिर नजर आया योगी का दबदबा, दिलाया 'अपनों' को टिकट

गुरु गोरक्षनाथ पीठ के पीठाधीश्वर व सांसद योगी आदित्यनाथ पूर्वांचल में हिंदुत्व का सबसे प्रमुख चेहरा हैं. अपनी प्रखर हिन्दुवादी छवि के लिए विख्यात योगी बीजेपी से अजेय सांसद हैं. इसके अलवा वे अपना एक समानांतर संगठन 'हिन्दू युवा वाहिनी' भी चलाते हैं.

योगी आदित्यनाथ योगी आदित्यनाथ

बीजेपी की तीसरी लिस्ट आ चुकी है. तीन लिस्टों में बीजेपी अब तक कुल 371 उम्मीदवार घोषित कर चुकी है. 403 विधानसभा सीटों पर होने वाले चुनावों में अब सिर्फ 32 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा होनी बाकी है. तीसरी लिस्ट सामने आने के बाद यह कहा जा रहा है कि पूर्वांचल में वही हुआ जो बीजेपी सांसद योगी आदित्यनाथ चाहते थे. योगी आदित्यनाथ ने जिसे-जिसे चाहा टिकट मिला है.

तीसरी लिस्ट में योगी हावी
आपको बता दें कि लिस्ट में गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा सीट से विपिन सिंह, चिल्लूपार से राजेश त्रिपाठी और बांसगांव से बीजेपी सांसद कमलेश पासवान के भाई विमलेश पासवान को टिकट दिया गया है. इसके अलावा कैंपियरगंज से फतेह बहादुर सिंह को बीजेपी ने टिकट दिया है, ये सभी योगी की गुड लिस्ट में आते हैं.

इसके अलावा सहजनवा सीट से योगी के खास माने जाने वाले शीतल पांडेय को टिकट मिला है. जबकि पिपराइच से महेंद्र पाल सिंह सैथवार ने टिकट पाने में सफलता पाई है.

सीएम चेहरे के तौर पर चर्चा में रहे हैं योगी
पिछले कई महीनों से योगी आदित्यनाथ को बीजेपी का यूपी सीएम चेहरा बनाने का अभियान उनके समर्थक चला रहे हैं. हिन्दूवादी नेता योगी आदित्यनाथ की खातिर जनसमर्थन जुटाने के लिए सोशल मीडिया का भी जमकर इस्तेमाल किया जा रहा था. अभी हाल ही में गोरखपुर में बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चे के कार्यकर्ताओं ने सांसद योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाए जाने को लेकर गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी भी चढ़ाई थी. लेकिन, प्रयास सफल नहीं रहा.

हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर बीजेपी योगी को बतौर सीएम प्रोजेक्ट करती तो वोटों के ध्रुवीकरण की स्थिति में पार्टी को कुछ फायदा हो सकता है. बीजेपी ने योगी को सीएम कैंडिडेट तो नहीं बनाया लेकिन यह जरूर है कि टिकट बंटवारे में उनकी पसंद को प्राथमिकता दे उनकी नाराजगी टालने की कोशिश की जा रही है.

आपको बता दें कि योगी आदित्यनाथ इस बार कम से कम इतना चाहते कि गोरखपुर-बस्ती मंडल की सभी सीटों पर उनकी राय अगर न भी ली जाए तो कम से कम एक दर्जन सीटों पर उनके लोगों को टिकट दिया जाए. लेकिन, बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व चाहता है कि वे दोनों मंडलों ही नहीं गोरखपुर क्षेत्र के 11 जिलों की सभी 65 सीटों पर प्रचार कर पार्टी के प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करें. इसके लिए हिन्दू युवा वाहिनी को भी लगाएं और पहले की भांति 2-4 सीटों पर अपने लोगों को लड़ाएं. गौरतलब है कि योगी आदित्यनाथ को बीजेपी ने बतौर स्टार प्रचारक भी नियुक्त किया है.

सर्वे में चौथे नंबर थे योगी
इंडिया टुडे और एक्सिस ने मिलकर यूपी में एक चुनावी सर्वे किया था. सर्वे में 12 से 24 दिसंबर के बीच 8,480 लोगों की राय इस सर्वे में जानी गई थी. सर्वे के मुताबिक मुख्यमंत्री के तौर पर मतदाताओं की पहली पसंद अखिलेश यादव थे. लेकिन सीएम के तौर पर टॉप 5 चेहरों में बीजेपी के दो नाम सामने आए थे. बीजेपी नेताओं में लोगों को पहली पसंद देश के गृहमंत्री और पूर्व यूपी सीएम राजनाथ सिंह थे जबकि तेजतर्रार हिन्दूवादी नेता योगी आदित्यनाथ दूसरे नंबर पर.

ये था पसंद का प्रतिशत
अखिलेश यादव- 33%
मायावती- 25%
राजनाथ सिंह- 20%
योगी आदित्यनाथ- 18%

योगी का पूर्वांचल में है दबदबा
गुरु गोरक्षनाथ पीठ के पीठाधीश्वर व सांसद योगी आदित्यनाथ पूर्वांचल में हिंदुत्व का सबसे प्रमुख चेहरा हैं. अपनी प्रखर हिन्दुवादी छवि के लिए विख्यात योगी बीजेपी से अजेय सांसद हैं. इसके अलवा वे अपना एक समानांतर संगठन 'हिन्दू युवा वाहिनी' भी चलाते हैं. इस संगठन के लोग बीजेपी के प्रति नहीं बल्कि योगी आदित्यनाथ के प्रति समर्पित होते हैं. यह संगठन पूर्वांचल में काफी सक्रिय है जिस वजह से इस क्षेत्र में योगी का राजनीतिक दबदबा भी बना हुआ है.

2007 में योगी की हिन्दू युवा वाहिनी के थे तीन विधायक
2007 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी से टिकट पाने वाले हिन्दू युवा वाहिनी के तीन लोग चुनाव जीतने में भी सफल हुए थे. इसमें कुशीनगर के नौरंगिया सीट से शम्भू चौधरी, रामकोला से अतुल सिंह व गोरखपुर ग्रामीण से विजय बहादुर यादव शामिल थे.

2012 के चुनाव में भी योगी आदित्यनाथ को बीजेपी ने चार सीट दी थी लेकिन चुनावों में गोरखपुर ग्रामीण के विजय बहादुर यादव के अलावा सबको हार का सामना करना पड़ा था.

पिछली विधानसभा में यह था आंकड़ा
यूपी विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं. 2012 के विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी ने 224 सीट जीतकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी. पिछले चुनावों में बसपा को 80, बीजेपी को 47, कांग्रेस को 28, रालोद को 9 और अन्य को 24 सीटें मिलीं थीं.

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