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पितृ पक्ष में कैबिनेट विस्तार, एक और मिथक तोड़ने जा रहे CM योगी आदित्यनाथ!

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक ऐसे व्यक्ति हैं जो सभी काम विधि-विधान और शकुन-अपशकुन के अनुसार ही करते हैं. लेकिन वो एक ऐसे मुख्यमंत्री भी हैं जिन्होंने बीते सालों में कई मिथकों को भी तोड़ा है.

सीएम योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो-PTI) सीएम योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सीएम योगी तोड़ते रहे हैं कई पुराने मिथक
  • नोएडा जाकर तोड़ा था 29 साल पुराना मिथक
  • वाराणसी में चंद्रग्रहण में अन्न ग्रहण किया था

2017 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में 300 से ज्यादा सीटें जीतीं. उसके बाद जब शपथ ग्रहण हुआ था तब योगी आदित्यनाथ ने अपना नाम उल्टा पढ़ा था. उन्होंने 'आदित्यनाथ योगी' के नाम से शपथ ली थी और उनके सरकारी आवास 5 कालिदास मार्ग के मेन गेट पर भी यही नाम लिखा गया था. उस समय ऐसा माना गया था कि खरमास की अवधि होने के चलते योगी आदित्यनाथ ने ये टोटका किया था. 

लेकिन, इसके ठीक 10 दिन बाद जब खरमास खत्म हुआ और नवरात्रि शुरू हुई तो सीएम योगी ने बकायदा विधि-विधान के साथ गृहप्रवेश किया और उसी दिन उनकी नेम प्लेट पर लिखा नाम भी सीधा होकर 'आदित्यनाथ योगी' से 'योगी आदित्यनाथ' हो गया.

इस वाकये को बताने का मकसद सिर्फ इतना था कि उस समय माना जा रहा था कि योगी आदित्यनाथ एक महंत हैं और अपने सारे काम शकुन-अपशकुन और विधि-विधान देखकर ही करते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ कई मिथकों को तोड़ते आ रहे हैं.

पितृ पक्ष में कैबिनेट विस्तार

हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार पितृ पक्ष में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता. आमतौर पर बीजेपी भी पितृ पक्ष में शुभ कार्य टालती रही है. 2017 में मोदी सरकार का कैबिनेट विस्तार होना था. 6 सितंबर से पितृ पक्ष लगने थे, इसलिए 3 सितंबर को ही विस्तार कर दिया गया. हाल ही में गुजरात के नए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने भी 16 सितंबर को ही कैबिनेट विस्तार कर दिया, जबकि 20 सितंबर से पितृ पक्ष लगने थे. लेकिन योगी आदित्यनाथ पितृ पक्ष में कैबिनेट का विस्तार किया. यूपी में कैबिनेट विस्तार होने की चर्चा कई महीनों से चल रही थी. कई बैठकें हुईं. लेकिन अब पितृ पक्ष में कैबिनेट विस्तार कर योगी ने एक बार फिर खुद को मिथकों को तोड़ने वाला मुख्यमंत्री साबित कर दिया है. 

जब नोएडा पहुंचकर तोड़ा था मिथक

मार्च 2017 में योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने और दिसंबर 2017 में उन्होंने नोएडा जाकर 29 साल पुराना मिथक तोड़ दिया. यूपी की सियासत में ऐसा माना जाता है कि जो भी मुख्यमंत्री नोएडा जाता है, उसकी सत्ता छिन जाती है. मायावती ने 2011 में इस मिथक को तोड़ने की कोशिश की थी और नोएडा का दौरा किया था. लेकिन 2012 में उनकी सत्ता चली गई थी. अखिलेश यादव मुख्यमंत्री रहते कभी नोएडा नहीं गए. लेकिन योगी आदित्यनाथ दिसंबर 2017 में नोएडा पहुंचे. उन्होंने दावा किया था कि ये एक मिथक है और वो इसे तोड़कर रहेंगे.

16 साल बाद कोई सीएम आगरा के सर्किट हाउस में रुका

इसी तरह की मान्यता आगरा के सर्किट हाउस को लेकर भी है. ये मिथक भी योगी आदित्यनाथ ने तोड़ा था. जनवरी 2018 में जब इजरायल के तत्कालीन प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू आगरा के दौरे पर आए थे. तब योगी आदित्यनाथ यहां के सर्किट हाउस में रुके थे. सर्किट हाउस को लेकर भी यही कहा जाता है कि जो यहां रुकता है, उसकी कुर्सी चली जाती है. लेकिन योगी लगभग 16 साल बाद आगरा के सर्किट हाउस में रुकने वाले पहले मुख्यमंत्री थे. उनसे पहले राजनाथ सिंह यहां रुके थे. 

जब चंद्रग्रहण पर किया अन्न ग्रहण

जनवरी 2018 में योगी आदित्यनाथ वाराणसी गए थे. इस दौरान योगी ने सदियों से चले आ रहे मिथक को तोड़ दिया था. उन्होंने चंद्रग्रहण में अन्न ग्रहण किया था. उस दिन शाम 5.17 बजे से रात 8.42 बजे तक चंद्रग्रहण का सूतक लगा था और मान्यता है कि सूतक के दौरान अन्न ग्रहण नहीं किया जाता. लेकिन योगी आदित्यनाथ ने अन्न ग्रहण कर इस मिथक को तोड़ दिया था. उन्होंने रविदास मंदिर में पंगत में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया था.

 

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