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पर्दे के पीछे परिवार और विस्तार का गणित साध रहे हैं मुलायम सिंह यादव!

स्वामी प्रसाद मौर्य ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का दामन छोड़ दिया और साइकिल की सवारी करने के लिए तैयार हैं. स्वामी प्रसाद मौर्य की समाजवादी पार्टी (सपा) में एंट्री के पीछे मुलायम सिंह यादव का अहम रोल बताया जा रहा है.

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मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो-PTI)
मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो-PTI)

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद राजनीति तेजी से बदल रही है. सूबे के बड़े सियासी चेहरों में से शुमार स्वामी प्रसाद मौर्य ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का दामन छोड़ दिया और साइकिल की सवारी करने के लिए तैयार हैं. स्वामी प्रसाद मौर्य की समाजवादी पार्टी (सपा) में एंट्री के पीछे मुलायम सिंह यादव का अहम रोल बताया जा रहा है.

स्वामी प्रसाद मौर्य ने 1980 में राजनीति में सक्रिय रूप से कदम रखा. वह इलाहाबाद युवा लोकदल की प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य बने और जून 1981 से सन 1989 तक महामंत्री पद पर रहे. यह वही दौर था जब मुलायम सिंह यादव की लोकदल में तूती बोलती थी. इसके बाद 1991 में जनता दल में भी साथ रहे. 

मुलायम सिंह ने सपा का गठन किया तो स्वामी प्रसाद मौर्य जनता दल में रहे. 1995 में उन्होंने बसपा का दामन थाम लिया, लेकिन मुलायम सिंह के साथ उनके रिश्ते हमेशा बने रहे. मुलायम सिंह यादव और स्वामी प्रसाद मौर्य दोनों ही ओबीसी की राजनीति करते थे. 2016 में स्वामी प्रसाद मौर्य ने बसपा छोड़ा तो उन्हें सपा में आने का न्योता दिया था. 

हालांकि, 2016 में स्वामी प्रसाद मौर्य बीजेपी में शामिल हो गए है. इससे पहले 2012 से 17 तक सपा की सरकार रही तो स्वामी बसपा के विधायक दल के नेता थे. प्रतिपक्ष के नेता होने के साथ ही अखिलेश के साथ उनके रिश्ते बने रहे. बताया जा रहा है कि स्वामी के सपा में लाने की बात भले अखिलेश कर रहे थे, लेकिन पर्दे के पीछे मुलायम सिंह गणित साध रहे थे.

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परिवार को एकजुट करने में नेताजी का अहम रोल

समाजवादी पार्टी के विस्तार की रणनीति में 'नेताजी' यानी मुलायम सिंह यादव अहम भूमिका निभा रहे हैं. इससे पहले उन्होंने परिवार को एकजुट करने की कोशिश की. 2016 में ही समाजवादी कुनबे में बिखराव हुआ था और 2017 के चुनाव में सपा महज 47 सीट पर सिमट गई थी. इसके बाद शिवपाल सिंह ने अपनी खुद की पार्टी बना ली थी.

शिवपाल सिंह यादव ने जब अपनी पार्टी बनाई, तब भी उनके मंच पर मुलायम सिंह यादव नजर आए थे. इसके बाद नेताजी हर बार परिवार को एकजुट करने की कवायद करते रहे. 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान नेताजी को भले सफलता नहीं मिली थी, लेकिन 2022 के चुनाव से पहले एक बार फिर परिवार एकजुट नजर आ रहा है.

बताया जा रहा है कि शिवपाल सिंह यादव और अखिलेश यादव की मुलाकात की पटकथा भी मुलायम सिंह यादव ने ही लिखी थी. इसके बाद शिवपाल सिंह यादव की पार्टी का सपा से गठबंधन हो गया. चुनाव आचार संहिता लगने के बाद से ही मुलायम सिंह यादव अब सपा दफ्तर में नेताओं और कार्यकर्ताओं की क्लास भी ले रहे हैं.

दफ्तर पहुंचते ही पीएम मोदी पर मुलायम ने साधा था निशाना

कई महीनों बाद जब मुलायम सिंह यादव सोमवार को सपा दफ्तर पहुंचे तो उनके निशाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रहे. उन्होंने कहा, 'बीजेपी के सबसे बड़े नेता कहते हैं कि समाजवादी पार्टी की ये लाल टोपी खतरनाक है. ये लोग लाल टोपी से परेशान हो गए हैं. इसका मतलब है कि आप लोग सही काम कर रहे हैं.'

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सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने कहा, 'हम आप लोगों से उम्मीद कर रहे हैं कि सपा की पूरी तरह से सरकार बनाएंगे. अब हमें पूरी ताकत के साथ जुट जाना है. प्रदेश में सपा की सरकार बनानी है. सरकार बनने पर हम उन सबको सुविधा देंगे जो सपा के लिए संघर्ष कर रहे हैं. पहले भी जब सपा की सरकार आई तो मैंने जो वादे किए थे पूरे किए.

समाजवादी पार्टी के सूत्रों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से मुलायम सिंह यादव एक्टिव हैं और वह हर बारीकी डेवलपमेंट पर नजर रख रहे हैं. पार्टी के प्रत्याशियों का चयन हो या फिर पार्टी का विस्तार, या फिर परिवार की एकजुटता... नेताजी पर्दे के पीछे रहकर हर गणित को साध रहे हैं.

 

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