उत्तर प्रदेश के महोबा जिले की एक विधानसभा सीट है महोबा सदर विधानसभा सीट. साल 1994 में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सरकार के समय हमीरपुर जिले का विभाजन कर महोबा जिले का गठन किया गया था. महोबा चंदेलकालीन बड़े-बड़े तालाब के लिए प्रसिद्ध है. यह वीर योद्धा आल्हा-उदल के लिए भी पूरी दुनिया में पहचान रखता है.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
महोबा जिले की सदर विधानसभा सीट की राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो इस विधानसभा सीट से 1974 में कांग्रेस के चंद्रनारायण सिंह, 1977 में जेएनपी के उदित नारायण, 1980 में निर्दलीय और 1985, 1989 में कांग्रेस के टिकट पर बाबूलाल जीते. 1991 में इस सीट से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के छोटे लाल मिश्रा, 1993 में जनता दल और 1996 में समाजवादी पार्टी (सपा) के टिकट पर अरिमर्दन सिंह, 2002 में सपा के सिद्ध गोपाल, 2007 में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के राकेश कुमार और 2012 में बसपा के राजनारायण बुधौलिया विधानसभा सदस्य निर्वाचित हुए थे.
2017 का जनादेश
महोबा सदर विधानसभा सीट से 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने राकेश कुमार गोस्वामी को उम्मीदवार बनाया. बीजेपी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे राकेश कुमार गोस्वामी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी सपा के गोपाल साहू को 31 हजार वोट से अधिक के अंतर से हरा दिया था. बसपा के अरिमर्दन सिंह तीसरे स्थान पर रहे थे.
सामाजिक ताना-बाना
महोबा सदर विधानसभा सीट के सामाजिक ताना-बाना की बात करें तो यहां हर जाति-वर्ग के लोग रहते हैं. महोबा सदर विधानसभा क्षेत्र में अन्य पिछड़ा वर्ग के साथ ही सामान्य वर्ग के मतदाता भी इस सीट का चुनाव परिणाम निर्धारित करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं. यहां अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के मतदाता भी अच्छी तादाद में हैं.
विधायक का रिपोर्ट कार्ड
महोबा सदर विधानसभा सीट से विधायक बीजेपी के राकेश कुमार गोस्वामी का दावा है कि उनके कार्यकाल में क्षेत्र का चहुंमुखी विकास हुआ है. राकेश कुमार गोस्वामी का दावा है कि विधानसभा क्षेत्र के हर इलाके में सड़क, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर कार्य हुए हैं. विपक्षी दलों के नेता विधायक के दावे को हवा-हवाई बता रहे हैं.