सुल्तानपुर जिले की एक विधानसभा सीट है इसौली विधानसभा सीट. ये विधानसभा क्षेत्र जिला मुख्यालय से तीस किलोमीटर की दूरी पर है. यहां से अयोध्या 50 किलोमीटर दूर है. इस इलाके में हिंदी के साथ ही खड़ी बोली और अवधी बोली जाती है. इसौली विधानसभा सीट चंद्रभद्र सिंह सोनू और यशभद्र सिंह मोनू का भी गढ़ है. सोनू इस सीट से तीन दफे विधायक रहे और वे मेनका गांधी के खिलाफ बहुजन समाज पार्टी (बसपा) उम्मीदवार के रूप में लोकसभा चुनाव भी लड़े.
इसौली विधानसभा सीट से चुनावी बाजी जीतकर श्रीपति मिश्रा भी विधायक निर्वाचित हुए थे. श्रीपति मिश्र कांग्रेस की सरकार के मुख्यमंत्री भी रहे. इस सीट से समाजवादी पार्टी (सपा) और बसपा के उम्मीदवारों को ही अधिकतर जीत मिली है. पिछले तीन दशक के चुनाव परिणाम को देखें तो दो बार बसपा और चार बार सपा ने इस सीट से चुनावी बाजी जीती है.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
इसौली विधानसभा सीट के लिए हुए पहले चुनाव में कांग्रेस के नाजिम अली विधायक निर्वाचित हुए. इसके बाद 1957 में जनसंघ के गयाबख्श सिंह, 1962 में कांग्रेस के रामबली मिश्र, 1969 में भारतीय क्रांति दल के रामजियावन दुबे, 1974 में कांग्रेस के अम्बिका सिंह, 1975 में जनता पार्टी के रामबरन वर्मा चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे. 1980 में कांग्रेस के श्रीपति मिश्र इस सीट से विधायक निर्वाचित हुए और 1982 में प्रदेश के मुख्यमंत्री भी बने.
इसौली विधानसभा सीट से 1985 में कांग्रेस के जय नारायन तिवारी, 1989 में जनता दल के टिकट पर और 1993 में निर्दल लड़कर इन्द्रभद्र सिंह विधानसभा में पहुंचे. 1996 में कांग्रेस छोड़कर बसपा के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे जय नारायन तिवारी ने इन्द्रभद्र सिंह को हरा दिया. 2002 के विधानसभा चुनाव में इन्द्रभद्र सिंह के पुत्र चन्द्रभद्र सिंह सोनू सपा के टिकट पर विधायक निर्वाचित हुए. 2007 में सोनू बसपा के टिकट पर भी विधायक निर्वाचित हुए. 2012 में सपा के अबरार अहमद इस सीट से जीते.
2017 का जनादेश
इसौली विधानसभा सीट से 2017 के विधानसभा चुनाव में कुल 13 उम्मीदवार मैदान में थे लेकिन मुकाबला सपा, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के बीच रहा. सपा के अबरार अहमद ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी बीजेपी के ओमप्रकाश पांडेय को चार हजार से अधिक वोट के अंतर से हरा दिया था. आरएलडी के यशभद्र सिंह मोनू तीसरे स्थान पर रहे थे. खास बात ये कि पहले और तीसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार के बीच करीब नौ हजार वोट का ही अंतर था.
सामाजिक ताना-बाना
इसौली विधानसभा सीट के सामाजिक समीकरणों की बात करें तो इस विधानसभा क्षेत्र में कुल करीब चार लाख मतदाता हैं. जातीय समीकरणों की बात करें तो यहां सामान्य जाति के मतदाताओं के साथ ही अन्य पिछड़ा वर्ग और दलित मतदाताओं की तादाद भी अच्छी खासी है. मुस्लिम मतदाता भी इसौली सीट से चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाते हैं.
विधायक का रिपोर्ट कार्ड
इसौली विधानसभा से सपा के विधायक अबरार अहमद 71 साल के हैं. इनकी शिक्षा दीनी तालीम है. कहा जाता है कि ये पहले बीपीएल कार्ड धारक थे. इनका मुख्य व्यवसाय कृषि रहा है. इनके दो बच्चे एक पुत्र और एक पुत्री हैं. अबरार अहमद की गिनती बड़बोले नेताओं में होती है. विवादित बयानों से ये सुर्खियों में रहते हैं. विधायक का दावा है कि उनके कार्यकाल में इलाके का विकास हुआ है.