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पश्चिमी यूपी में SP-RLD गठबंधन को बड़ा खतरा नहीं मान रही बीजेपी

पश्चिमी यूपी किसान आंदोलन का गढ़ रहा है और राष्ट्रीय लोकदल को किसानों की पार्टी कहा जाता है. ऐसे में लोकदल और सपा के गठबंधन से यहां के समीकरण बदले हुए माने जा रहे हैं. इस सबके बावजूद बीजेपी पिछले चुनाव जैसे नतीजों की उम्मीद कर रही है और वो इसे लेकर आश्वस्त भी है.

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स्टोरी हाइलाइट्स
  • बेहतर प्रदर्शन की ही उम्मीद में बीजेपी
  • पहले दो चरणों में विश्वास से भरी है पार्टी

UP Assembly Election 2022: किसान आंदोलन और सपा-आरएलडी गठबंधन के बावजूद बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व पश्चिमी यूपी में पहले से ज्यादा सीटें जीतने को लेकर आश्वस्त है. उसे कुछ जीती हुई सीटें बदलने की आशंका तो है लेकिन कुल चुनाव परिणामों में वो इस इलाके से पिछले रिजल्ट की तुलना में बेहतर प्रदर्शन की ही उम्मीद लगाए है. 

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पहले दो चरणों में पार्टी अपने सामाजिक समीकरणों को लेकर विश्वास से भरी हुई है. यही वजह है कि बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व समाजवादी पार्टी के नए बन रहे गठजोड़ को कोई बड़ा खतरा नहीं मान रहा. उसका कहना है कि इन दो चरणों के बाद पार्टी का अभियान और तेज होगा और दावा है कि उसकी सफलता भी उसी तेजी से बढ़ेगी.

यूपी को लेकर पार्टी की रणनीति है कि वह अपने अभी तक के कामों को लेकर और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ेगी. 2007 के बाद से यूपी की जनता ने जिसको भी बहुमत दिया है, स्पष्ट बहुमत दिया है. पार्टी को नहीं लगता कि यूपी की जनता में इस बार भी कोई कन्फ्यूजन है इसलिए वो 300 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा कर रही है.

हाल ही में बीजेपी छोड़कर जाने वाले नेताओं की वजह से राजनीतिक विश्लेषक पार्टी को बड़े नुकसान की अटकलें लगा रहे हैं लेकिन बीजेपी में इसे अलग नजरिए से देखा जा रहा है. बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व मानता है कि जो लोग छोड़कर जा रहे हैं, पार्टी के भीतर उनकी जाति समूह का नेतृत्व उनके समकक्ष खड़ा हो गया है. इससे उन्हें लगता था कि आने वाले समय में पार्टी में उनका महत्व कम हो जाएगा. इसी कारणवश कुछ नेता पार्टी छोड़कर गए हैं और उनके जाने को उनके वोटों का जाना नहीं समझा जाना चाहिए.

सामाजिक समीकरणों के साथ-साथ बीजेपी परिवारवाद के खिलाफ भी इस बार सख्त रुख अपनाए है. बीजेपी नेतृत्व का कहना है कि पिछले कई चुनाव से नेताओं के बेटे-बेटियों और रिश्तेदारों को लेकर पार्टी अपना रुख साफ कर चुकी है. जो पहले से चुनाव लड़ रहे हैं उन्हें टिकट दिया गया है. लेकिन इन पांच राज्यों के चुनाव में पार्टी किसी भी नेता के उन बेटे-बेटी या पत्नी अथवा रिश्तेदारों को टिकट नहीं देगी जो पहली बार चुनाव मैदान में उतरना चाहते हैं. साफ है कि गोवा में पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के बेटे समेत किसी नेता के परिवार को टिकट नहीं दिए जाएंगे.

 

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