उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सभी राजनीतिक दलों ने तैयारी तेज कर दी है. फिलहाल सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी इस रेस में सबसे आगे नजर आ रही है. पार्टी ने न सिर्फ संगठन के पेंच कसना शुरू कर दिया है, बल्कि शीर्ष नेता से लेकर पदाधिकारी तक प्रवास, दौरे और अभियानों से भी पूरे प्रदेश को मथने की तैयारी शुरू कर दी है. लेकिन रोचक बात ये है कि भाजपा मिशन 2022 से पहले 'मिशन 84' पर फोकस करने जा रही है. इस मिशन 84 को आगे ले जाने की जिम्मेदारी खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संभाली है.
सीएम योगी ने बुधवार को सीतापुर के सिधौली में जनसभा कर करोड़ों की परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया. ये वही विधानसभा सीट है जहां से बसपा के डॉ हरगोविंद भार्गव विधायक हैं. 2017 में भाजपा को ये सीट गंवानी पड़ी थी तो वहीं 2012 में समाजवादी पार्टी के मनीष रावत जीते थे. वहीं सीएम योगी बाराबंकी भी पहुंचे और GIC के ऑडिटॉरीयम में सभा की. ये नवाबगंज विधानसभा के तहत आता है. इस विधानसभा सीट से 2012 और 2017 में समाजवादी पार्टी के धर्मराज यादव जीते हैं.
सीएम योगी के आज के दौरे इसी मिशन के तहत
सीएम योगी ने जिन योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया, वे आस-पास की विधानसभाओं के लिए भी हैं. लेकिन सीएम की जनसभा के लिए सीटों का चयन बहुत सोच समझकर किया गया. दरअसल ये भाजपा की उस चुनावी रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत खुद मुख्यमंत्री और पार्टी के शीर्ष नेता उस सीटों पर पहुंचेंगे, जहां भाजपा के विधायक नहीं हैं.
'हम सभी सीटों पर जाते हैं'
सीतापुर और बाराबंकी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सभा को लेकर अवध क्षेत्र के प्रभारी महामंत्री अमरपाल मौर्य ने कहा, इन सीटों पर मुख्यमंत्री योगी का दौरा इसलिए हुआ, क्यों हम लोग विकास के लिए सभी सीटों पर जाते हैं, सिर्फ जीती हुई सीटों पर ही नहीं.
हारी हुई सीटों पर पहले होमवर्क
भाजपा के रणनीतिकारों के मुताबिक, यूपी विधानसभा चुनाव में 350 सीटों के लक्ष्य को पार करने के लिए उन सीटों पर होमवर्क करना जरूरी है, जो सीटें इस समय भाजपा के पास नहीं हैं. 2017 में भाजपा के उम्मीदवारों को किसी भी वजह से उन सीटों पर हार का सामना करना पड़ा. अगर आंकड़ों पर एक नजर डालें तो आज की जो स्थिति है, उसमें 84 सीटें भाजपा के पास नहीं हैं. इसमें वो सीटें भी हैं जो भाजपा ने उपचुनाव में गंवा दीं. वहीं अगर ओम् प्रकाश राजभर की सुभासपा से गठबंधन टूटने की बात करें तो भी भाजपा को उन सीटों का नुकसान हुआ है जो सीटें सुभासपा के पास थीं.
भाजपा ने 2017 में 384 सीटों पर चुनाव लड़ा था और इसमें 312 सीटों पर पार्टी को जीत हासिल हुई थी. पार्टी अब पहले उन सीटों पर फोकस करना चाहती है जहां भाजपा के अपने या सहयोगी अपना दल ने विधायक नहीं हैं. वरिष्ठ पत्रकार दिनेश पाठक कहते हैं, भाजपा बहुत सुनियोजित तरीके से काम करती है. पार्टी के रणनीतिकारों को पता है कि वो सभी सीटें जो पार्टी के 2017 में जीती थीं वो अब नहीं जीतने जा रही. इसके लिए नई या उन सीटों पर होमवर्क बहुत जरूरी है, जो अभी भाजपा के पास नहीं हैं. ऐसे में अगर अभी से वहां दौरे और कार्यक्रम किए जाएं तो जब तक दूसरे दलों का चुनाव प्रचार तेज होगा. भाजपा इन सीटों कर काफी काम पूरा कर चुकी होगी.
वहीं भाजपा के प्रदेश महामंत्री अमरपाल मौर्य कहते हैं कि भाजपा हमेशा सभी सीटों पर काम करती है. जो सीटें हम नहीं जीत पाए, उन सीटों पर तो विशेष रूप से काम करना होता है.'
क्या है एक्शन प्लान
जानकारी के मुताबिक, पार्टी ने इन सीटों के लिए पूर्व योजना के तहत फीडबैक लिया है. इसमें जिलों के प्रभारी मंत्रियों और पदाधिकारियों ने भी अहम भूमिका निभाई. फिर पार्टी ने ये तय किया कि इन क्षेत्रों में कौन सी ऐसी योजनाएं हैं, जिसका लोगों को लंबे समय से इंतजार है और जिसका शिलान्यास या लोकार्पण किया जा सकता है. इन सीटों के लिए सबसे खास रणनीति ये है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इन सीटों का दौरा करें और वहां योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण करें.
साथ ही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह भी वहां जाकर लोगों को सम्बोधित करें. सरकार के मुखिया और संगठन के मुखिया दोनों अब ऐसे विधानसभा सीटों वाले क्षेत्रों में दौरे करेंगे. वरिष्ठ पत्रकार दिनेश पाठक कहते हैं कि इस तैयारी और अभी इन सीटों पर कार्यक्रम और जनसभा का लाभ भाजपा को मिल सकता है क्योंकि विकास परियोजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण से सिर्फ उस क्षेत्र पर ही नहीं आस-पास के क्षेत्रों पर भी प्रभाव पड़ता है.