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Balrampur: 2022 के चुनाव में बीजेपी के गढ़ में लगेगी सेंध या जलवा रहेगा बरकरार?

Balrampur district profile: बलरामपुर को अटल बिहारी वाजपेई की कर्मस्थली के रूप में जाना जाता है. अटल जी के अलावा बैरिस्टर हैदर हुसैन, सुभद्रा जोशी और नानाजी देशमुख जैसे प्रखर राजनीतिज्ञों ने यहां का प्रतिनिधित्व किया है. कालान्तर में बाहुबलियों का भी इस क्षेत्र की राजनीति में दबदबा रहा.

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भारत-नेपाल की सीमा पर बसा हैे बलरामपुर.
भारत-नेपाल की सीमा पर बसा हैे बलरामपुर.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अटल जी की कर्म भूमि रही है बलरामपुर
  • बलरामपुर जिले में हैं 4 विधानसभाएं

भारत-नेपाल की सीमा पर बसा उत्तर प्रदेश का बलरामपुर जिला अपनी खूबसूरत प्राकृतिक संपदा के लिए जाना जाता है. तराई का यह इलाका सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक दृष्टि से विशिष्ट पहचान रखता है. देश की 51 शक्तिपीठों में से एक देवीपाटन की यह पवित्रभूमि है जहां प्रतिवर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं. थारु जनजाति एक धरोहर के रूप में यहां विद्यमान है. गन्ना इस जिले के अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. 4 विधानसभाओं वाले इस जिले की राजनैतिक पृष्टभूमि काफी समृद्ध रही है. भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई को पहली बार संसद में भेजने का काम यहां की जनता ने किया था.

बलरामपुर को अटल बिहारी वाजपेई की कर्मस्थली के रूप में जाना जाता है. अटल जी के अलावा बैरिस्टर हैदर हुसैन, सुभद्रा जोशी और नानाजी देशमुख जैसे प्रखर राजनीतिज्ञों ने यहां का प्रतिनिधित्व किया है. कालान्तर में बाहुबलियों का भी इस क्षेत्र की राजनीति में दबदबा रहा. कल कारखानों के नाम पर 3 चीनी मिलें यहां हैं. 2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी दद्दन मिश्र ने बाहुबली अतीक अहमद को हराकर सांसद बनने का गौरव प्राप्त किया, लेकिन 2019 के चुनाव एक बार फिर बीजेपी प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरे दद्दन मिश्र  बीएसपी प्रत्याशी राम शिरोमणि वर्मा से मामूली वोटों के अंतर से हार गए.

चारों सीटों पर कमल

जनसंघ का गढ़ कहे जाने वाले बलरामपुर की चारों विधानसभाओं पर भाजपा का कब्जा है. 2007 के विधानसभा चुनावों में यहां की 2 विधानसभा सीटों पर बसपा और 2 पर भाजपा का कब्जा था. लेकिन 2012 के चुनाव में सपा ने सभी चारों विधानसभा पर जीत दर्ज कर भाजपा और बसपा की रीढ़ तोड़ दी. 2017 की विधानसभा चुनाव में मोदी लहर में सपा, बसपा ,कांग्रेस व अन्य दलों को हार का सामना करना पड़ा और चारों सीटों पर कमल खिल गया.

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कभी बाढ़ तो कभी सूखा

राप्ती नदी को अपने आगोश में समेटे यह जिला कभी बाढ़ तो कभी सूखे का दंश झेलता है. अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाली गन्ने की फसल अब किसानों के लिए अभिशाप बनती जा रही है. इस जिले का एक तिहाई भू-भाग हार्ड एरिया के रूप में जाना जाता है जो असिंचित है. यहां की सिंचाई प्राकृतिक वर्षा पर ही निर्भर करती है. बाढ़ इस जिले की प्रमुख समस्या है, जो प्रतिवर्ष सैकड़ों एकड फसल नष्ट करती है. नेपाल के पानी को रोककर सिंचाई के लिये यहां 11 बड़े जलाशय बनाए गए हैं, लेकिन जल संग्रहण क्षमता के कम होने से वे अपनी उपयोगिता खोते जा रहे हैं. विश्व प्रसिद्ध सोहेलवा जंगल और जलाशय यहां प्राकृतिक छटा को चार चांद लगाते हैं. प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में प्रवासी पक्षी यहां आते हैं. इस क्षेत्र में इको टूरिज्म की अपार सम्भावनाएं मौजूद हैं,  जो यहां की सामाजिक आर्थिक स्थित को नई दिशा दे सकती हैं. 

 जिले की विधानसभाएं:-

1- बलरामपुर सदर 2- तुलसीपुर 3- गैंसडी 4- उतरौला

बलरामपुर सदर विधानसभा:-

कुल मतदाता- 4,14,967

पुरुष मतदाता- 2,28,444

महिला मतदाता- 1,86,523

सामान्य जाति-18%

ओबीसी-38%

एससी-एसटी-21%

मुस्लिम-23%

2017 में बलरामपुर सदर विधान सभा का परिणाम:-
 
- भाजपा प्रत्याशी पलटूराम 89401 मत पाकर जीते

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- कांग्रेस प्रत्याशी शिवलाल को 64541 मत मिले.

- बीजेपी प्रत्याशी पलटूराम ने कांग्रेस- सपा गठबंधन प्रत्याशी शिवलाल को 25,000 के भारी अंतर से पराजित किया था.

तुलसीपुर विधानसभा:- 

  • इस विधानसभा में कुल 369751 मतदाता हैं, जिनमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 202481 है जबकि महिला मतदाता की संख्या 167270 है. इस सीट पर सबसे ज्यादा 35% ओबीसी मतदाता हैं. 19% सामान्य, 23%अनुसूचित जाति, 22% मुस्लिम मतदाता शामिल हैं. मुस्लिम मतदाताओं में सामान्य ओबीसी और अनुसूचित जाति के सभी मुस्लिम शामिल हैं. तुलसीपुर विधानसभा सीट पर हार जीत का फैसला ओबीसी वर्ग के मतदाताओं के हाथ में रहता है, जबकि ब्राह्मण मतदाताओं की भी इस सीट पर अहम भूमिका देखी जाती रही है.
     
  • 2017 विधानसभा चुनाव में तुलसीपुर विधानसभा सीट पर कुल 16 प्रत्याशी मैदान में थे. लेकिन कड़ा मुकाबला भाजपा, कांग्रेस व सपा के बीच में रहा. सपा और कांग्रेस के गठबंधन के बाद भी दोनों पार्टियों ने अपने-अपने प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारे थे. जिसका फायदा बीजेपी प्रत्याशी को हुआ.
     
  • बीजेपी प्रत्याशी को 62296 वोट मिले जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी पूर्व बाहुबली सांसद रिजवान जहीर की बेटी जेबा रिजवान को 43637 वोट मिले. सिटिंग विधायक रहे अब्दुल मसूद खान को 36549 मत पाकर संतोष करना पड़ा. बीजेपी के कैलाशनाथ शुक्ला ने 18659 वोटों से कांग्रेस प्रत्याशी को हराकर विधायक बने.
     

गैसड़ी विधानसभा:-

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  • इस विधानसभा में कुल मतदाताओं की संख्या 3,54,635 है, जिनमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 1,92,115 है. जबकि महिला मतदाता की संख्या 1,62,498 है. वहीं, इस विधानसभा क्षेत्र में 22 ट्रांसजेंडर मतदाता हैं. इस विधानसभा सीट पर हिन्दू मतदाताओं की आबादी 62.5% है. वहीं, यहां पर मुस्लिम 37 फीसदी हैं. इस सीट पर 22% प्रतिशत सामान्य मतदाता हैं. 20% ओबीसी मतदाता और 22% अनुसूचित जाति के मतदाता शामिल हैं.
     
  • 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा से शैलेश कुमार सिंह शैलू ने यहां से जीत हासिल की. उन्हें 55,716 मत प्राप्त हुए थे, जबकि बसपा के अल्लाउद्दीन खान को 53,413 मत प्राप्त हुए थे. शैलेश कुमार सिंह शैलू सिंह महज 2303 मतों से जीत हासिल कर पाने में कामयाब हुए. वहीं, सपा के डॉ. शिव प्रताप यादव को 46,378 मत प्राप्त हुए थे. 
     
  • गैंसडी विघानसभा क्षेत्र की उत्तरी सीमा नेपाल राष्ट्र से सटी हुई है. सीमावर्ती क्षेत्र में सोहेलवा का घना जंगल स्थित है जिसमें थारु जनजातियां निवास करती है. ये जनजातियां आज भी राष्ट्र की मुख्यधारा से कटी हुई हैं. कृषि प्रधान इस क्षेत्र में सबसे बड़ी  समस्या सिंचाई की है, क्योंकि यह सम्पूर्ण क्षेत्र असिंचित श्रेणी में आता है. थारु जनजातियां यहां एक धरोहर के रुप में विद्यमान हैं जिनकी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए योगी सरकार म्यूज़ियम बनाने का कार्य कर रही है.

उतरौला विधानसभा:-

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  • उतरौला विधानसभा में कुल 4,14,887 मतदाता हैं, जिनमें 2,30,371 वोट पुरुष मतदाताओं के हैं जबकि 1,84,500 महिला मतदाता हैं. इस विधानसभा में 16 थर्ड जेंडर मतदाता हैं. सामान्य मतदाताओं की संख्या 20% है, वहीं 34% ओबीसी मतदाता और करीब 21% अनुसूचित जाति के मतदाता शामिल हैं जबकि 25% मुस्लिम मतदाताओं में सामान्य, ओबीसी और अनुसूचित जाति के सभी मुस्लिम शामिल हैं.
     
  • 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को बड़ी जीत हासिल हुई थी. तकरीबन 21000 वोटों के बड़े अंतर से भाजपा के रामप्रताप वर्मा ने सपा के आरिफ अनवर हाशमी को हराकर जीत हासिल की थी. भाजपा के राम प्रताप वर्मा को 85,240 मत प्राप्त हुए थे, जबकि आरिफ अनवर हाशमी को 56,066 मत ही प्राप्त हो सके थे. बहुजन समाज पार्टी से परवेज़ उमर कुल 44,799 मत पाकर तीसरे स्थान पर रहे.
     
  • इस विधानसभा में कुछ सड़कें आज भी जर्जर हैं. राप्ती नदी के तटवर्ती गांव बाढ़ के पानी से बुरी तरह प्रभावित होते हैं. बीजेपी सरकार में तुलसीपुर को जोड़ने वाले पिपरा घाट पुल का निर्माण कार्य पूरा किया और आम जनता को पिपरा घाट पुल समर्पित किया गया.
     
  • समग्र रूप से देखा जाय तो बलरामपुर प्रदेश के अति पिछड़े क्षेत्रों में शुमार है. बलरामपुर आकांक्षत्मक जिलों में से एक है. साक्षरता की दृष्टि से यह काफी पिछड़ा हुआ है. यहां की जनता नेताओं से उम्मीदें तो बहुत लगाती है, लेकिन उन उम्मीदों पर हमेशा पानी फिरता है. 2017 में प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनने के बाद जिले मेडिकल कॉलेज का निर्माण हो या सड़कों का जाल बुनना हो, बिजली के क्षेत्र में हो या तटवर्ती गांव को बाढ़ से बचाने में योगी सरकार ने अच्छे प्रयास किए हैं.           

 

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