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India Today Conclave: कार्ति बोले- बीजेपी-AIADMK का गठबंधन मजबूरी, अन्नाद्रमक ने दिया ये जवाब

तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साथ अपने गठबंधन को अन्नाद्रमुक (AIADMK) ने जीत हासिल करने वाला गठजोड़ करार दिया है. अन्नाद्रमुक आईटी सेल के सचिव अस्पायर के. स्वामीनाथन ने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ 2021 के मंच पर यह बात कही.

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अन्नाद्रमुक के नेता अस्पायर के. स्वामीनाथन (Credit: Yasir Iqbal) अन्नाद्रमुक के नेता अस्पायर के. स्वामीनाथन (Credit: Yasir Iqbal)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 'अन्नाद्रमुक-बीजेपी के बीच कमेस्ट्री बनती है'
  • बीजेपी हिंदी, हिंदुत्व की पार्टी है-कार्ति चिदंबरम

तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साथ अपने गठबंधन को अन्नाद्रमुक (AIADMK) ने जीत हासिल करने वाला गठजोड़ करार दिया है. अन्नाद्रमुक आईटी सेल के सचिव अस्पायर के. स्वामीनाथन ने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ 2021 के मंच पर यह बात कही.   

स्वामीनाथन ने कहा कि अन्नाद्रमुक और बीजेपी के बीच कमेस्ट्री बनती है और इसीलिए दोनों के बीच यह गठजोड़ बना है. उन्होंने कहा कि यह कमेस्ट्री वाला गठबंधन है जो जीत हासिल करेगा. 

असल में, स्वामीनाथन कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम के इस आरोप पर जवाब दे रहे थे कि बीजेपी-अन्नाद्रमुक एक मजबूरी का गठबंधन है. कार्ति चिदंबरम का आरोप था कि बीजेपी ने जबरन अन्नाद्रमुक से गठबंधन किया है. बीजेपी अन्नाद्रमुक के जरिये तमिलनाडु में पैठ बनाने की कोशिश कर रही है. कांग्रेस सांसद ने इस दौरान अन्नाद्रमुक को बीजेपी की बी टीम करार दिया.

इस दौरान कार्ति चिदंबरम ने बीजेपी को तमिलनाडु विरोधी पार्टी भी बताया. उनका कहना था कि बीजेपी हिंदी, हिंदुत्व की पार्टी है. बीजेपी हिंदी और अपर कास्ट हिंदू की पार्टी है. बीजेपी हर जगह हिंदी को थोपना चाहती है. इसकी वजह से तमिलनाडु के नौजवानों में काफी नाराजगी है. 

कार्ति चिदंबरम का आरोप था कि बीजेपी के हिंदुत्व का एजेंडा से तमिलनाडु में लोग परेशान हैं. तमिलाडु में बीजेपी का कभी भी किसी ने दिल से स्वागत नहीं किया. आंकड़े भी इस बात की गवाही देते हैं. बीजेपी का तमिलनाडु में न कोई विधायक है और न ही सांसद. 

वहीं बीजेपी प्रवक्ता कृष्ण सागर राव ने भगवा पार्टी तमिलनाडु विरोधी पार्टी बताने के कार्ति चिदंबरम के आरोपों को खारिज कर दिया. कृष्ण सागर राव की दलील थी कि यह गलत तरीके से प्रोजेक्ट किया जाता है. यह सही नहीं है. असली बात यह है कि देशभर में मतदाताओं के रुख में बदलाव आया है, और यह दक्षिण में भी विस्तार पा रहा है. हम कर्नाटक में यह देख सकते हैं. वह भी साउथ का ही हिस्सा है. 

 

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