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जदयू से निकाले गए साबिर अली की घमासान के बाद बीजेपी से सदस्‍यता रद्द

साबिर अली को बीजेपी में शामिल करने के बाद मचा बवाल आखिरकार उनकी सदस्‍यता खत्‍म करने तक पहुंच गया. बीजेपी ने शनिवार दोपहर करीब सवा 3 बजे प्रेस कॉन्‍फ्रेंस करके बताया कि बीजेपी ने साबिर अली की सदस्‍यता खत्‍म कर दी है. जेडीयू से निकाले गए साबिर अली शुक्रवार को ही बीजेपी में शामिल हुए थे. बीजेपी प्रवक्‍ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष राजनाथ सिंह चाहते हैं कि पार्टी नेता पार्टी फोरम में ही अपनी बात रखें.

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साबिर अली साबिर अली

साबिर अली को बीजेपी में शामिल करने के बाद मचा बवाल आखिरकार उनकी सदस्‍यता खत्‍म करने तक पहुंच गया. बीजेपी ने शनिवार दोपहर करीब सवा 3 बजे प्रेस कॉन्‍फ्रेंस करके बताया कि बीजेपी ने साबिर अली की सदस्‍यता खत्‍म कर दी है. जेडीयू से निकाले गए साबिर अली शुक्रवार को ही बीजेपी में शामिल हुए थे. बीजेपी प्रवक्‍ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष राजनाथ सिंह चाहते हैं कि पार्टी नेता पार्टी फोरम में ही अपनी बात रखें.

साबिर अली आखिर किसकी पसंद थे? क्या बिहार बीजेपी, नीतीश कुमार को आईना दिखाने के लिए साबिर अली का इस्तेमाल करना चाहती थी या फिर साबिर को सचमुच मोदी के गुणगान का इनाम मिला था. वजह चाहे जो हो साबिर की सदस्यता खटाई में पड़ने के बाद बीजेपी में घमासान मच गया. एक खेमा अब भी साबिर अली की वकालत कर रहा है तो सुशील मोदी खेमे को कोई जबाब नहीं सूझ रहा. मोदी अब ये सफाई दे रहे हैं कि साबिर अली पर कोई मुकदमा नहीं है.

साबिर अली ने जैसे ही अपनी सदस्यता लंबित रखने की चिठ्ठी जारी की, दिल्ली बीजेपी नेताओं ने जरूर राहत की सांस ली होगी. लेकिल बिहार बीजेपी के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी हैं. सुशील मोदी ने साबिर अली को नीतीश के खिलाफ बड़ा कैच समझा था पर दिल्ली के नेताओं ने सुशील मोदी के इस फैसले पर पानी फेर दिया. सुशील मोदी ने कहा कि साबिर अली ने खुद ही अपने फैसले को स्थगित रखने का आग्रह किया है, जांच के बाद फिर फैसला होगा.

बीजेपी राष्‍ट्रीय उपाध्‍यक्ष मुख्‍तार अब्‍बास नकवी ने विवाद बढ़ने के बाद साबिर अली के बारे में किया गया अपना ट्वीट तो हटा लिया है, लेकिन वे अब भी अपने बयान पर कायम हैं. उन्‍होंने कहा मैंने साबिर अली के बारे में जो कुछ कहा था, अब भी उस पर कायम हूं, मैं अब भी कह रहा हूं कि उन्‍हें पार्टी ने निकाल देना चाहिए. उन्‍होंने कहा मैंने अपना ट्वीट इसलिए हटाया क्‍योंकि इसमें दाऊद इब्राहिम का नाम था. मैंने बाद में विचार किया कि मुझे दाऊद के नाम का इस्‍तेमाल नहीं करना चाहिए था. उन्‍होंने कहा लेकिन साबिर अली को बीजेपी में शामिल किए जाने को लेकर मेरा विरोध अब भी जारी है.

मुख्तार अब्बास नकवी ने तो साबिर अली के शामिल होने का कड़ा विरोध जताते हुए कटाक्ष किया था कि अब दाऊद भी जल्द ही बीजेपी ज्वाइन कर सकता है. बीजेपी नेता बलबीर पुंज भी साबिर अली के पार्टी में शामिल होने से नाराज हैं, हालांकि पूर्व पार्टी अध्‍यक्ष नितिन गडकरी का कहना है कि कांग्रेस को हराने के लिए सभी का साथ आना जरूरी है. उन्‍होंने साबिर अली का बीजेपी में स्‍वागत किया है.

साबिर के मसले पर मुख्तार अब्बास नकवी की नाराजगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने खुले तौर पर ट्विटर पर ही अपनी भड़ास निकाल दी. हालांकि मामला गर्माता देख शनिवार सुबह उन्‍होंने अपना ट्वीट हटा दिया, लेकिन विरोध पर कायम हैं.

सीपी ठाकुर सरीखे नेताओं को भी साबिर अली में कोई कमी नहीं दिखती, उल्टे उनके मुताबिक ‘नमो’ के लहर में सबको सवारी करना चाहिए. सीपी ठाकुर ने कहा जब जेडीयू में रहते हुए हमें उनसे परहेज नहीं हुआ तो हमें बीजेपी में आने पर क्यों परहेज होगा.

बहरहाल ये तो तय हो गया कि साबिर अली को पार्टी में लेने में बिहार के बीजेपी नेताओं का बड़ा रोल था, लेकिन दिल्ली के नेताओं का विरोध इस फैसले पर भारी पड़ गया. ऐसे में अब बीजेपी को दूसरे नेताओं को पार्टी में शामिल करने के पहले कई बार सोचना पडे़गा.

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