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रामविलास पासवान ने लालू-नीतीश को बताया चोर और डाकू, मायावती को गिरगिट

बिहार में आखिरी चरणों के चुनाव में एनडीए का दारोमदार दलितों के वोटों पर टिका है. सीमांचल और मिथलांचल में मुसलमानों के बाद तीसरी सबसे बड़ी आबादी दलितों की है. ऐसे में बीजेपी ने अपने गठबंधन के दोनों दलित चेहरों को झोंक दिया है. रामविलास पासवान और जीतनराम मांझी एक दिन में 6 से 8 सभाएं कर रहे हैं.

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रामविलास पासवान
रामविलास पासवान

बिहार में आखिरी चरणों के चुनाव में एनडीए का दारोमदार दलितों के वोटों पर टिका है. सीमांचल और मिथलांचल में मुसलमानों के बाद तीसरी सबसे बड़ी आबादी दलितों की है. ऐसे में बीजेपी ने अपने गठबंधन के दोनों दलित चेहरों को झोंक दिया है. रामविलास पासवान और जीतनराम मांझी एक दिन में 6 से 8 सभाएं कर रहे हैं.

के लिए ये चुनाव उनके कद से जुड़ गया है. क्योंकि उनके सामने न सिर्फ सीटें जीतने की चुनौती है बल्कि जीतनराम मांझी से ज्यादा सीटें लाने की भी चुनौती है. आखिरी चरणों के से जब पासवान का हेलीकॉप्टर उड़ा तो पासवान की पहली सभा मधुबनी के बाबूबरही में थी जहां 5 नवंबर को मतदान होना है. लेकिन इस सभा में उम्मीद के मुताबिक भीड़ नहीं जुटी. हालांकि पासवान के तेवर में कोई कमी नहीं थी.

ने मधुबन में लालू-नीतीश को चोर और डाकू कहा और मायावती पर तीखा हमला बोलते हुए मायावती को गिरगिट तक कह डाला. दरअसल मायावती बिहार में खुद चुनाव नहीं लड़ रही बल्कि वो एनडीए को हराने की अपील कर रही हैं. रामविलास पासवान जितना हमला लालू और नीतीश पर बोल रहे हैं उतना ही हमला वो राहुल और सोनिया गांधी पर कर रहे हैं.

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चुनावी सभाओं के बीच खाने का वक्त भी पासवान को इसी हेलीकॉप्टर में मिला. पासवान के साथ बीजेपी नेता सीपी ठाकुर भी थे. बाबूबरही से अगली सभा के बीच पासवान ने अपना टिफिन निकाला और मांसाहारी भोजन के शौकीन पासवान ने बताया कि पत्नी के करवाचौथ की वजह से वो शाकाहारी खा रहे हैं.

हेलीकॉप्टर में जब खाने की बातें छिड़ी तो दोनों नेताओं में के आरक्षण पर बयान और उससे पहले दो चरणों में हुए नुकसान पर चर्चा छिड़ गई. पासवान ने कहा कि मोहन भागवत के बयान ने कन्फ्यूजन पैदा किया और वो चुनाव के बीच में आरएसएस के ऐजेंडे पर कुछ नहीं बोलना चाहते. भागवत के बयान को लेकर पासवान के दिल में गुबार हैं.

में दूसरे संप्रदायों को बांटने की पीएम मोदी की बात को सही ठहराया और कहा कि मुसलमानों में भी इसका विरोध है. हम लोग दलित मुसलमान और दलित ईसाईयों के रहे हैं. लेकिन मुसलमानों में ही इसे लेकर एक राय नहीं है. मुसलमान उलेमा इसका विरोध ये कहकर करते रहे हैं कि ये इस्लाम के खिलाफ है. सीपी ठाकुर ने भी माना कि मोहन भागवत के बयानों से नुकसान हुआ लेकिन बाद के चरणों में उसकी क्षतिपूर्ति हो गई.

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