लोकसभा चुनाव में औंधे मुंह गिरने वाली कांग्रेस को इस बार सदन में विपक्ष का दर्जा पाकर ही संतोष करना पड़ेगा. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी या पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी लोकसभा में नेता विपक्ष की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं. वैसे नेता प्रतिपक्ष पर अहम फैसला लोकसभा अध्यक्ष करेंगे.
कमलनाथ और वीरप्पा मोइली का भी नाम
वैसे कांग्रेस ने नेता विपक्ष को लेकर अंतिम फैसला नहीं किया है. ऐसी भी चर्चा है कि यूपीए सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके कमलनाथ को नेता विपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है. कमलनाथ ने 9वीं बार संसदीय चुनाव जीता है. उन्होंने इस बार छिंदवाड़ा से चुनाव में जीत हासिल की है. वे कांग्रेस के उन गिने-चुने दिग्गजों में शामिल हैं, जो मोदी लहर के बावजूद चुनाव जीतने में कामयाब रहे. नेता विपक्ष की भूमिका के लिए वीरप्पा मोइली का नाम भी चर्चा में है.
लोकसभा में कांग्रेस के नेता को नेता प्रतिपक्ष की मान्यता दिए जाने के मुद्दे पर कोई निर्णय नए लोकसभा अध्यक्ष ही लेंगे. इसके लिए कानूनी व्याख्या की भी जरूरत पड़ सकती है.
कांग्रेस ने लोकसभा में 44 सीटें जीती है, जो 545 सदस्यीय सदन की कुल क्षमता के 10 प्रतिशत से कम है. कांग्रेस ने बीजेपी के बाद लोकसभा में सर्वाधिक सीटें जीती है. बीजेपी के पास 282 सीटें हैं.
इस बारे में क्या कहता है कानून...
इस मुद्दे पर दो कानून हैं और 'डायरेक्शंस बाई द स्पीकर ऑफ द लोकसभा' नामक एक किताब भी इस मुद्दे पर प्रकाश डालती है. एक अधिकारी ने नाम न जाहिर करने के अनुरोध के साथ कहा कि संसद में मान्यता प्राप्त दलों और समूहों के नेताओं और मुख्य सचेतकों से संबंधित अधिनियिम, 1998 में लोकसभा में किसी मान्यता प्राप्त दल के बारे में कहा गया है कि उक्त पार्टी के पास सदन में 55 सदस्यों से कम संख्या नहीं होनी चाहिए.
इस मुद्दे से जुड़ा अन्य कानून है, संसद में नेता प्रतिपक्ष का वेतन एवं भत्ता अधिनियम, 1977। इस अधिनियम के अनुसार लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को ऐसा सदस्य बताया गया है, जो उस सदन में सरकार के सामने मौजूद सर्वाधिक सदस्य संख्या वाली विपक्षी पार्टी का नेता हो और उसे लोकसभा अध्यक्ष द्वारा मान्यता प्राप्त हो.
अधिकारी ने कहा कि इस मुद्दे पर विभिन्न राय हैं कि नए सदन में नेता प्रतिपक्ष का मुद्दा कैसे सुलझाया जाना चाहिए, क्योंकि नेता प्रतिपक्ष को एक कैबिनेट मंत्री की सारी सुविधाएं प्राप्त होती हैं.
अधिकारी ने कहा, 'नेता प्रतिपक्ष के वेतन व भत्ते से संबंधित संसदीय अधिनियम का ही पालन किया जाना चाहिए और 1998 का यह अधिनियम इस स्थिति में अनुकूल नहीं है. लेकिन एक राय यह भी है कि कोई सर्वाधिक समग्र दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए.' अधिकारी ने कहा कि अंतिम निर्णय नए लोकसभा अध्यक्ष द्वारा लिया जाएगा.
अधिकारी ने कहा, 'प्रावधानों की एक कानूनी व्याख्या की भी जरूरत पड़ सकती है और लोकसभा अध्यक्ष कानून मंत्रालय या महान्यायवादी की राय लेने का निर्णय कर सकते हैं.'
अधिकारी ने कहा कि 'डायरेक्शंस बाई द स्पीकर ऑफ लोकसभा' नामक पुस्तक में यह प्रावधान दिया गया है कि लोकसभा अध्यक्ष सदस्यों के एक समूह को संसदीय दल के रूप में मान्यता दे सकते हैं, बशर्ते कि उस समूह में शामिल सदस्यों की संख्या सदन की कुल सदस्य संख्या के 10वें हिस्से के समान हो.
गौरतलब है कि लोकसभा की कुल सदस्य संख्या 545 है, जिसमें दो नामित सदस्य शामिल होते हैं.