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ऐतिहासिक जीत के बाद बोले देश के अगले PM मोदी- आज से शुरू हुआ जोड़ने की राजनीति का युग

नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद में जनसभा में कहा कि वे देश में भरोसे की राजनी‍ति को आगे बढ़ाएंगे और विकास की प्रक्रिया में सबको भागीदार बनाएंगे. मोदी के भाषण के अंश यहां ज्‍यों के त्‍यों दिए जा रहे हैं...

अहमदाबाद में समर्थकों के सामने बोले मोदी- हारे लोगों को नीचा नहीं दिखाऊंगा अहमदाबाद में समर्थकों के सामने बोले मोदी- हारे लोगों को नीचा नहीं दिखाऊंगा

नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद में जनसभा में कहा कि वे देश में भरोसे की राजनी‍ति को आगे बढ़ाएंगे और विकास की प्रक्रिया में सबको भागीदार बनाएंगे. मोदी के भाषण के अंश यहां ज्‍यों के त्‍यों दिए जा रहे हैं...

यहां जो मीडिया के लोग हैं, भाइयों-बहनों, आप लोगों का मुझ पर पूरा अधिकार है. लेकिन अब आप ही लोगों ने आपका अधिकार पूरे देश की जनता को दिया है...और जब आप ही लोगों ने देश की जनता को जो अधिकार दिया है, तो आज चुनाव नतीजों के बाद जनता को जो अधिकार दिया है, तो नतीजों के बाद देश भी जानता होगा कि अहमदाबाद से क्या आवाज उठ रही है.

मैं जब से सार्वजनिक जीवन में आया, विशेषकर राजनीतिक जीवन में शायद मेरे चुनावी जीवन में ऐसा पहला चुनाव है, जब अहमदाबाद में मैं एक बार भी नहीं आया. और मैं ये अपनी सबसे बड़ी सफलता मानता हूं कि मोदी रहे या नहीं रहे, लेकिन अहमदाबाद चलता रहे. मैं यहां नहीं आने के लिए क्षमा मांगता हूं और मेरे न आने के बावजूद भी आपने जो प्यार दिया है, उसके लिए आपको सलाम.

(मोदी-मोदी वातावारण में गूंजता है...)
इसे कहते हैं विजय गूंज. मैं पूरे देश के नागरिक भाइयों-बहनों का धन्यवाद करता हूं. हिंदुस्तान के हर कोने से भारतीय जनता पार्टी को वोट मिले. शायद ही किसी ने यह सोचा होगा कि कांग्रेस के बिना भी कोई दल अपने बल पर पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आ सकता है. आजादी के बाद पहला दल बिना कांग्रेस के गोत्र वाला आया है. पहली बार देश में, देश की जनता ने भारतीय जनता पार्टी एक दल को सरकार बनाने के लिए आदेश दिया है. पूर्ण बहुमत के साथ दिया है. आजादी के बाद कभी जनता पार्टी की सरकार बनी, तो वो कई दलों का प्लेटफॉर्म था. अटल जी के नेतृत्व में सरकार बनी तो और जब स्पष्ट जनादेश मिलता है, जिम्मेवारी भी बढ़ती है.

देश की जनता ने भारतीय जनता पार्टी को जो आदेश दिया है वो आदेश जो पराजित हुए हैं उन्हें नीचा दिखाने के लिए नहीं दिया गया है. लोकतंत्र में जिनका एक भी कैंडिडेट नहीं आया होगा ऐसे भी कई दल हैं जिनका एक भी सांसद संसद में नहीं आया होगा. मैं उनसे कहना चाहता हूं कि हमारे लिए आपका भी उतना ही महत्व है. क्योंकि हम जानते हैं कि आप सार्वजनिक जीवन में देश की भलाई करने की इच्छा रखते हैं. आपकी अच्छाईयां भी हम जोड़ना चाहते हैं. तोड़ने की राजनीति का युग समाप्त हो चुका है. आज से जोड़ने की राजनीति शुरू हो गई है.

मैं एक दिव्य भारत का युगारंभ देख रहा हूं. सामाजिक ताने बाने से भयहीन तिरंगा बनेगा. आपातकाल के बाद एक चुनाव आया था जिसमें उत्तरी भारत में सामाजिक परिवेश से ऊपर उठ कर भारतीय लोकतंत्र के लिए वोट किया गया था. आपातकाल के बाद मैं पहला चुनाव देख रहा हूं जिसमें लोगों ने जातिवाद से ऊपर उठकर वोट किया है. जातिवाद की तीव्रता, जातिवादी मानसिकता को छोड़कर हिंदुस्तान में एक नया आयाम खड़ा हुआ है जो आने वाले दिनों में भारत के लिए एक शुभ संकेत है.

हमारे देश में माना जाता था कि चुनाव जीतने के लिए वोट बैंक की राजनीति करनी पड़ती है. जिनकी वो आदत थी वो उन साधनों को लेकर खेलते रहे. हमने तय किया था कि हम गुड गवर्नेंस को लेकर चलेंगे. हिंदुस्तान का एक बहुत बड़ा तबका खड़ा हुआ है जो जानता है कि हमारे आगे बढ़ने का सबसे बड़ा कारण विकास ही होगा.

मैं कहता हूं जो लोग मोदी की आलोचना करते थे उनकी भी मजबूरी थी वो? मोदी जो गुजरात मॉडल की बात करता है वो गुब्बारा है. उनको पसंद आए या ना आए लेकिन मजबूरन बोलना पड़ता था. जो लोग मेरी आलोचना करते थे उन्हें नहीं पता था कि मोदी ऐसा जादूगर है. चर्चा विकास की हुई. विकास कार्यों की जीत हुई. उनको भी जाने अनजाने में गुजरात की निगेटिव बातें बतानी थी लेकिन जाने अनजाने उन्होंने भी विकास की ही बातें की.

गुजरात में चार बार सरकार बनाने के बाद मुझे विश्वास है कि सब दुखों की एक ही दवा है. विकास. विकास के बिना मेरा देश टिक नहीं पायेगा.

1857 से हम देखें तो देश का एक कोना भी नहीं होगा जहां आजादी के लिए लोग शहीद न हुए होंगे. देश के लिए मर मिटने वालों की कहीं कमी नहीं थी. लेकिन तब जन भावनाएं आंदोलन का स्वरूप नहीं लेती थीं.

लोगों में यह भावना कि जो मैं कर रहा हूं वो आजादी के लिए कर रहा हूं ये महात्मा गांधी ने जगाया. गांधी जी का सबसे बड़ा योगदान था कि उन्होंने आजादी को जनांदोलन का स्वरूप दिया. ठीक उसी तरह हमें विकास को भी जनांदोलन का स्वरूप देना है.

आपको कभी फील हुआ कि देश में सरकार है? आपको फील होता है न कि गुजरात में सरकार है?

एक वातावरण होता है एंटी स्टैब्लिस्मेंट का दूसरा होता है को-स्टैब्लिस्मेंट का लेकिन यहां तो वैक्यूम था. अब वक्त है नए तरीके से सोचने का. पॉलिटिकल पंडित इस पर चर्चा करेंगे. ये भारत के लोकतंत्र की विशेषता है वरना मेरे जैसा व्यक्ति जो एक सामान्य परिवार से है उसे देश के लोगों ने कंधे पर उठा लिया.

हमारी लोकतंत्र की जड़ें और मजबूत होनी चाहिए. ये चुनाव भारत के लोकतंत्र को और मजबूत बनाएगा.

गुजरात ही है जिसने मुझे बड़ा बनाया, उंगली पकड़कर चलना सिखाया. आपने मुझे जहां भेजा वहां जो भी अच्छा होगा उसका यश आपको जाता है. और अगर कमी रह गई तो मेरी जिम्मेवारी होगी. इस विश्वास के साथ जा रहा हूं. मैं कहीं पर हूं. किसी भी रूप में क्यों न रहूं. करोड़ों गुजरातियों का मुझपर उसी तरह हक बनता है. आपकी पीड़ा मुझे यूं ही पता चल जाएगी कि मेरे परिवार का कोई बीमार है, मेरे घर में कोई आफत है. और इसलिए मैं गुजरात में कभी कोई कमी महसूस नहीं होने दूंगा क्योंकि आपने मुझे बनाया है. मां बाप बेटे को बड़ा करते हैं फौज में भेज देते हैं लेकिन वो ये समझते हैं कि बेटा जब तक जीवित है उनकी चिंता करेगा. उसी तरह आप ही मेरे मां-बाप हैं.

अब 6 करोड़ से सवा सौ करोड़ की सेवा करने के लिए ताकत दें. आप ही मेरी सेवा हैं, ताकत हैं और पुरुषार्थ हैं. आपने मेरा स्वागत किया सम्मान किया आपका बहुत बहुत आभारी हूं.

भारत माता की जय. वंदे मातरम.

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