आम आदमी पार्टी को इस बात का एहसास है कि उसके पास कांग्रेस या बीजेपी की तरह संसाधन नहीं हैं. लिहाजा, बड़ी-बड़ी रैलियां आयोजित करने और महंगे विज्ञापनों के बजाय 'आप' चुनाव प्रचार के लिए सत्याग्रही हथियार अपना रही है. एक तरफ बड़ी पार्टियां रैली कर लोगों से वोट की अपील कर रही हैं. दूसरी तरफ, अरविंद केजरीवाल के समर्थक शहर की खाक छान रहे हैं. कोशिश यह की जा रही है कि शहर के हर मोहल्ले में जाकर वोट की अपील की जाए.
धरना-प्रदर्शन-पदयात्रा और नुक्कड़ गतिविधियों में माहिर यह पार्टी शहर और ग्रामीण इलाकों की गलियों में चौपाल लगाकर लोगों से सीधे मुलाकात कर रही है. पार्टी का यह कैंपेन फंडा मराठाओं की छापामार शैली से काफी मेल खाती है. जिस तरह दिल्ली विधानसभा चुनावों के दौरान पार्टी ने अग्रेसिव कैंपेनिंग की जगह 'अंडर करंट' रहकर लोगों के बीच अपनी पैठ बनाई, ठीक उसी तरह वाराणसी के भी वोटरों का विश्वास हासिल करने में जुटी है 'आप'.