झारखंड के राज्यपाल सईद सिब्ते रजी़ इन दिनों चुनाव आयोग की निगाहों में हैं. कारण, आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद महत्वपूर्ण फैसले लेना. पर वे उस समय बचाव की मुद्रा में आ गए जब चुनाव आयोग ने कहा कि राज्यपाल की कार्यकारी भूमिका आदर्श आचार संहिता के दायरे में आती है.
बात इस तरह है, 23 मार्च को राज्यपाल सलाहकार समिति ने राज्य सरकार के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 6 फीसदी वृद्धि की घोषणा की थी. इस मसले को भाजपा चुनाव आयोग के समक्ष ले गई. चुनाव आयुक्त एस.वाइ. कुरैशी जब पिछले सप्ताह रांची आए तो उन्होंने कहा कि राज्यपाल की कार्यकारी भूमिका आदर्श आचार संहिता के अंतर्गत आती है. राज्य सरकार के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में वृद्धि करने से पहले अनुमति ली जानी चाहिए थी.
झारखंड के मुख्य चुनाव आयुक्त देबाशीष गुप्ता ने कहा, ''राज्यपाल की सलाहकार समिति ने महंगाई भत्ते में वृद्धि से पहले किसी प्रकार की कोई इजाजत नहीं ली थी.'' चुनाव आयोग ने जब इस मुद्दे पर नाराजगी जताई तो वित्त विभाग ने महंगाई भत्ते में वृद्धि पर 29 मार्च को रोक लगा दी.
अभी महंगाई भत्ते का मामला शांत होने ही वाला था कि राज्यपाल की भूमिका एक बार भी चुनाव आयोग के रडार में आ गई. 30 मार्च को राज्यपाल की सलाहकार समिति ने बैठक की. इस बैठक में हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (एचईसी) में जान फूंकने के लिए 91 करोड़ रु. का चेक जारी करने का फैसला लिया गया. एचईसी प्रबंधन को यह चेक मंगलवार को सौंपा गया. ये 91 करोड़ रु. राज्य सरकार के एचईसी के लिए मंजूर 250 करोड़ रु. के पुनरुद्धार पैकेज के तहत जारी किए गए.
भाजपा ने एक बार फिर राज्यपाल की सलाहकार समिति के फैसले पर आपत्ति जताई और राज्यपाल के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है. इसमें मजेदार बात यह रही कि इस बार भी सलाहकार समिति ने चुनाव आयोग की अनुमति लेना मुनासिब नहीं समझा. इस बारे में जब देबाशीष गुप्ता से पूछा गया तो उन्होंने कहा, ''एचईसी के पुनरुद्धार पैकेज के लिए चेक जारी करने को लेकर किसी ने कोई अनुमति नहीं ली. एचईसी ने इस बात की अनुमति मांगी थी कि क्या वह राज्य सरकार से पैकेज के तहत मिली राशि को सेवानिवृत्त कर्मचारियों में वितरित कर सकती है.''
{mospagebreak}इस मुद्दे पर राज्य भवन के एक अधिकारी ने कहा, ''राज्यपाल की सलाहकार समिति ने एचईसी के पुनरुद्धार के लिए 13 फरवरी को 250 करोड़ रु. के पैकेज की घोषणा की थी. यानी यह घोषणा चुनावों की तारीख से पखवाड़ा भर पहले ही कर दी गई थी. सलाहकार समिति ने उसी पैकेज का एक हिस्सा भर जारी किया है.''
हालांकि भाजपा इस मसले पर कोई भी तर्क सुनने को तैयार नहीं है. उसकी राज्य इकाई के अध्यक्ष रघुबर दास कहते हैं, ''हमने राज्यपाल के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए चुनाव आयोग को लिखा है. यह दूसरा मौका है जब सलाहकार समिति ने आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया है. यह पैकेज रांची से कांग्रेस उम्मीदवार सुबोध कांत सहाय को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से है.'' उन्होंने कहा कि राज्य में निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए राज्यपाल को जल्द से जल्द हटा देना चाहिए.
सहाय केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हैं. वे अपनी रैलियों में दावा कर रहे हैं कि उन्होंने एचईसी के लोगों के लिए पुनरुद्धार पैकेज सुनिश्चित कराया है और वे बीमार कंपनी में जान फूंकने में लगे हैं. एचईसी घाटे की कंपनी थी लेकिन पिछले तीन साल से ये लगातार फायदे में जा रही है. कांग्रेस के नेता दावा कर रहे हैं कि यह केंद्र में उनकी सरकार है जिसने यह पुनरुद्धार किया है. एचईसी में लगभग 6,000 कर्मचारी हैं जोकि चुनाव में किसी भी उम्मीदवार की संभावनाओं में काफी बड़ा बदलाव ला सकते हैं.