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कांग्रेस में गांधी परिवार के लिए भी निर्णायक है आज का मतदान

कांग्रेस पार्टी के दो चेहरे, राहुल और प्रियंका गांधी इस चुनाव में खुद को दो राज्यों पर केंद्रित करके चुनाव प्रचार कर रहे थे. पार्टी में विद्रोह, बगावत के बीच आज का मतदान गांधी परिवार के भविष्य के लिए भी निर्णायक है.

गांधी परिवार के लिए अग्निपरीक्षा है मतदान (फाइल फोटो: प्रियंका, राहुल और सोनिया गांधी, PTI) गांधी परिवार के लिए अग्निपरीक्षा है मतदान (फाइल फोटो: प्रियंका, राहुल और सोनिया गांधी, PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • असम और केरल में प्रियंका और राहुल की परीक्षा
  • बगावत से जूझ रहा है कांग्रेस का गांधी परिवार
  • खराब रहा प्रदर्शन तो और बढ़ेंगी मुश्किलें

वर्ष 2019 के आम चुनाव के जनादेश के बाद से ही कांग्रेस पार्टी अपने नेतृत्व की लड़ाई लड़ती नज़र आ रही है. पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया था और तब से लेकर अभी तक पार्टी अपने पूर्णकालिक अध्यक्ष का इंतज़ार ही कर रही है.
 
लेकिन संकट केवल आम चुनाव ही नहीं था. मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार का पिछले साल पतन हो गया और वहां वापस भाजपा की सरकार बन गई. इससे पहले दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी पार्टी का प्रदर्शन शर्मनाक रहा. राजस्थान में भी सरकार के साथ संकट पैदा हो गया था लेकिन उसे बचाने का श्रेय पार्टी को नहीं, राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को जाता है.
 
2020 के आखिर में बिहार चुनाव आने तक कांग्रेस पार्टी में विद्रोह खुलकर सामने आने लगा था. लेटर बम और बयानों के बीच कांग्रेस पार्टी बिहार चुनाव लड़ रही थी. कांग्रेस के लिए यह सबसे विडंबनापूर्ण स्थिति है कि चुनाव के समय ये पार्टी स्थिर सरकार तो क्या, स्थिर पार्टी का भी संदेश लोगों को नहीं दे पा रही होती है.
 
यही धारणा फिलहाल चल रहे पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के पहले और दौरान भी बनी रही. गुलाम नबी आजाद और कपिल सिब्बल के बाद कई कद्दावर चेहरे विरोध को एक पायदान और ऊपर ले जाते हुए दिखाई दिए.
 
हालांकि इस दौरान गांधी परिवार का तीसरा चेहरा, प्रियंका गांधी, उत्तर प्रदेश में खासी मेहनत करती दिखाई दीं लेकिन उस मेहनत से संगठन और पकड़ कितनी मज़बूत हुई है, यह कह पाना अभी बहुत मुश्किल है.

गांधी परिवार की अग्निपरीक्षा 
पार्टी में उठते विद्रोह और बढ़ते असंतोष के बीच सोनिया गांधी फिलहाल औपचारिक रूप से नेतृत्व संभाले हुए हैं और उनकी दोनों संतानें, राहुल और प्रियंका, इस सब लड़ाइयों से दूर, खुद को राज्यों के विधानसभा चुनावों में केंद्रित किए हुए हैं.
 
हालांकि पांच राज्यों में से इन दोनों ने मुख्यतः खुद को दो राज्यों पर ही केंद्रित रखा है. और अब सबकी नज़र इस बात पर है कि ये दोनों इन राज्यों में हारी हुई पार्टी को कितना मजबूत बना पाते हैं और क्या जनादेश पार्टी के पक्ष में ला पाने में सफल हो पाते हैं.

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प्रियंका ने असम की ज़िम्मेदारी ली और आज वहां तीसरे और अंतिम चरण का मतदान है. चुनाव प्रचार शुरू होने से पहले माना जा रहा था कि वहां भाजपा की आसान वापसी होनी है. लेकिन जैसे-जैसे चुनाव चढ़ा, कांग्रेस अच्छा चुनाव लड़ती नज़र आ रही है. 

इस बार अहम भूमिका में नज़र आईं प्रियंका गांधी (फोटो: असम में एक रैली के दौरान प्रियंका)

 
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को असम में चुनाव प्रबंधन की ज़िम्मेदारी सौंप कर प्रियंका ने एक निर्णायक प्रयोग भी किया है और पार्टी को इसका लाभ मिलता नज़र आ रहा है. हालांकि ये लाभ जनादेश में तब्दील होगा या नहीं, ये फिलहाल नहीं कहा जा सकता है.
 
उधर राहुल की रणनीति केरल पर केंद्रित रही. केरल में भी माना जा रहा था कि वाममोर्चे के लिए चुनाव आसान है लेकिन लोगों के बीच कांग्रेस के प्रति एक सकारात्मक लहर बना पाने में राहुल कुछ हद तक सफल दिखे हैं. उन्होंने प्रचार के तरीके को बदला है और लोगों के बीच घुलकर धारणा बदलने की मेहनत की है.

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आज केरल की सभी सीटों के लिए भी मतदान हो रहा है. जनादेश के पास या स्पष्ट जनादेश तक अगर कांग्रेस पहुंचती है तो ये कांग्रेस से ज्यादा राहुल गांधी की जीत के तौर पर देखा जाएगा. राहुल केरल से ही लोकसभा सदस्य हैं.

कांग्रेस का भविष्य
इन पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस पार्टी को अपने संगठन और पार्टी नेतृत्व पर काम करना है. ऐसे में अगर प्रियंका और राहुल एक बेहतर प्रदर्शन के साथ पार्टी के सामने होंगे तो उनके लिए पार्टी में अपना वर्चस्व बनाए रख पाना आसान होगा.
 
वहीं अगर असम और केरल में पार्टी का प्रदर्शन खराब रहता है तो गांधी परिवार के करिश्मे के अंत की पटकथा पार्टी के ही विद्रोही नेता लिख देंगे और कांग्रेस में काफी तोड़फोड़ देखने को मिल सकती है.
 
इन तमाम वजहों से मंगलवार का मतदान कांग्रेस पार्टी से ज़्यादा गांधी परिवार के लिए निर्णायक है. 


 
 

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