वोट बैंक की राजनीति के लिए राजनीतिक दल भले ही महिलाओं को आगे लाने की लाख बातें करें, लेकिन महिलाओं को मौका देने में वे खुद फिसड्डी साबित हो रहे हैं. यह हाल देश के दो प्रमुख दल बीजेपी और कांग्रेस के साथ भी है, जिन्होंने 70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा के लिए कुल 11 महिलाओं को ही चुनाव मैदान में उतारा है, जबकि आम आदमी पार्टी से महिला प्रत्याशियों की संख्या छह है.
गौरतलब है कि शीला दीक्षित के नेतृत्व में कांग्रेस बीते 15 वर्षों से दिल्ली में सत्ता संभाल रही है, लेकिन पार्टी ने 4 दिसंबर को होने जा रहे चुनाव में सिर्फ 6 महिलाओं को मैदान में उतारा है. यह संख्या पार्टी के कुल उम्मीदवारों की संख्या का 8.5 फीसदी है. वहीं, बीजेपी ने 5 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है जो कुल 66 उम्मीदवारों का 7.5 फीसदी है. बीजेपी ने 70 सीटों में से 4 सीटें अपने सहयोगी अकाली दल (बादल) के लिए छोड़ी है.
इरादतन नहीं है कम संख्या में महिला उम्मीदवार: पार्टियां
स्पष्ट है तीनों प्रमुख पार्टियों द्वारा महिला उम्मीदवारों को दिए गए टिकटों की संख्या दिल्ली की महिला आबादी से बिल्कुल सामंजस्य नहीं रखती हैं. मतदाता सूची के मुताबिक दिल्ली में 1.19 करोड़ लोग वोट डालने के लिए योग्य हैं, जिनमें से 53 लाख महिलाएं हैं. वहीं, कुल 810 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं, जिनमें सिर्फ 70 महिलाएं हैं. वर्ष 2008 के चुनाव में कुल 57 महिला उम्मीदवार चुनाव मैदान में थी. हालांकि, सभी पार्टियों का कहना है कि कम संख्या में महिला उम्मीदवारों को उतारा जाना परिस्थितिजन्य है, इरादतन नहीं.