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अंबुमणि रामदास: काम ने दिलाई पहचान, विवाद भी साथ-साथ

अंबुमणि रामदास की पार्टी (पीएमके) विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है और इनकी पार्टी की एक खास वर्ग पर पकड़ है.

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रामदास को यूपीए-1 में अहम जिम्मेदारी मिली थी
रामदास को यूपीए-1 में अहम जिम्मेदारी मिली थी

यूपीए-1 में मई 2004 से अप्रैल 2009 तक केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री रहे अंबुमणि रामदास ने कई ऐसे कदम उठाए जिसका परिणाम अब मिल रहा है. हालांकि उनके कई फैसलों ने विवाद को भी जन्म दिया. उनपर मंत्री रहते हुए पद का दुरुपयोग का भी आरोप लगा. जो मामला अभी भी तक अदालत में है. मामले की जांच सीबीआई कर रही है. रामदास पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर इंदौर के एक कॉलेज को बिना पर्याप्त संकाय सदस्यों और चिकित्सीय सामग्री के नामांकन की इजाजत दी.

प्रतिभा के धनी हैं रामदास
विवादों को एक ओर कर दें तो रामदास का अब तक करियर बेहतरीन रहा है. रामदास का जन्म 9 अक्टूबर 1968 को तमिलनाडु में हुआ है. इनके पिता का नाम एस रामदास और माता का नाम आर सरस्वती है. इन्होंने सोमिया रामदास को 1991 में धर्मपत्नी के रूप में अपनाया. इनके तीन बच्चे हैं. माता-पिता की मानें तो अंबुमणि बचपन से ही प्रतिभा के धनी हैं. स्कूली शिक्षा के बाद रामदास ने मद्रास मेडिकल कॉलेज से MBBS की पढ़ाई पूरी की. फिलहाल ये तमिलनाडु के धर्मापुरी से लोकसभा सांसद हैं. अंबुमणि रामदास की पार्टी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है और इनकी पार्टी की एक खास वर्ग पर पकड़ है. वहीं बीजेपी की इनकी पार्टी पर नजर है और चुनाव के बाद अगर समीकरण बने तो दोनों पार्टियों के साथ आ सकती हैं. रामदास पार्टी के सबसे बड़े चेहरे हैं और विपक्ष की भी इनपर नजर है. 

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यूपीए-1 में मिली अहम जिम्मेदारी
रामदास के पिता एस रामदास ने 1989 में पट्टाली मक्कल कच्ची (PMK) पार्टी की स्थापना की. पार्टी को मजबूत करने के लिए एस रामदास गांव-गांव में घुमकर लोगों को अपनी पार्टी की नीतियों के बारे में लोगों को बताया. पिता की नींव रखी पार्टी को आज अंबुमणि रामदास आगे बढ़ा रहे हैं. 2004 में जब अंबुमणि लोकसभा चुनाव जीतकर कर आए थे तो इन्हें मनमोहन सरकार में स्वास्थ्य मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली. मंत्रालय में युवा जोश के साथ इन्होंने अपने आइडियाज को लागू किया. ग्रामीण इलाकों से स्वास्थ्य सेवा को बेहतर बनाने के लिए कदम उठाए. जिसकी सराहना देश के साथ-साथ विदेशों में हुई. यूनाइटेड नेशन के प्रमुख बान की मून ने रामदास को 'पब्लिक हेल्थ चैंपियन' बताया.

धूम्रपान के खिलाफ चलाया अभियान
धूम्रपान को रोकने के लिए अंबुमणि रामदास ने कई सख्त कदम उठाए थे. उस वक्त उनकी आलोचना भी हुई लेकिन उन्होंने झुकने के बजाय और सख्त तेवर अपना लिए. सभी सिगरेट कंपनियों के लिए डिब्बों पर लोगों को जागरुक करने के लिए खतरे के निशान वाली मानव खोपड़ी का चित्र छापना जरूरी कर दिया. अंबुमणि ने अमेरिका के तर्ज पर भारत के 20 राज्यों में एंबुलेंस सेवा 108 की शुरुआत की. और धीरे-धीरे इसे पूरे देश में लागू किया. साथ ही एम्स में बड़े बदलाव का श्रेय भी रामदास को जाता है. एम्स में बदलाव को लेकर विवाद भी खूब हुआ था. विपक्ष के निशाने पर अंबुमणि रामदास आ गए थे और काम करने की शैली पर सवाल उठने लगे थे. साथ ही रामदास केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण के अहम पैरवीकार थे.

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कई सम्मान से नवाजे गए अंबुमणि
भारत में अंबुमणि रामदास ने तंबाकू विरोधी अभियान को जोर-शोर चलाया था. अभियान को घर-घर तक पहुंचाया और लोगों ने भी इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. बकायदा इसके लिए मंत्री रहते हुए रामदास ने तंबाकू की बिक्री पर लगाम लगाने के लिए नया कानून बना डाला. रिहाइशी इलाकों, शिक्षण संस्थानों और धर्म स्थलों से 100 मीटर की दूरी तक किसी भी तरह के मादक पदार्थों की बिक्री पर बैन लगा दिया. रामदास ने ही देश के सभी अस्पतालों में डिस्पोजिबल सिरींज के इस्तेमाल को जरूरी किया था. अमेरिकन कैंसर सोसाइटी की ओर से हेल्थ सेक्टर में बेहतरीन काम को लेकर इन्हें 2006 में सम्मान से नवाजा गया. 2007 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इनके काम को सराहा.

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