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अखिलेश यादव को इस्तीफा देना चाहिए?

नरेंद्र मोदी की सुनामी ने कई दलों को ऐसी हार का स्वाद चखाया कि इस्तीफे देने का दौर शुरू हो गया है. पहले असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगई, फिर अपने बेटे की हार पर महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे और अब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार. सभी सामने आए, जनादेश स्वीकार किया और हार की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे का ऐलान कर दिया.

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यूपी के सीएम अखिलेश यादव
यूपी के सीएम अखिलेश यादव

नरेंद्र मोदी की सुनामी ने कई दलों को ऐसी हार का स्वाद चखाया कि इस्तीफे देने का दौर शुरू हो गया है. पहले असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगई, फिर अपने बेटे की हार पर महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे और अब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार. सभी सामने आए, जनादेश स्वीकार किया और हार की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे का ऐलान कर दिया.

राजनीतिक इतिहास को देखें तो बहुत दिनों के बाद ऐसा हुआ है जब चुनाव नतीजे मनमुताबिक नहीं होने के कारण नैतिकता के आधार पर इतने लोगों ने एक बार में इस्तीफे दिए या फिर देने की पेशकश की.

अब सवाल यह उठता है कि ऐसा यूपी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री क्यों नहीं कर रहे? यूपी में सत्ता में होने के बावजूद मुलायम की पार्टी का प्रदर्शन बेहद ही खराब रहा. परिवार छोड़ के और कोई भी समाजवादी लोकसभा में नहीं बैठेगा. यानी मुलायम सिंह यादव अब सिर्फ अपनों के सहारे हैं. समर्थक ये सवाल उठा सकते हैं कि यह चुनाव विधानसभा का तो था नहीं तो बहुमत वाली सरकार के मुखिया के तौर पर अखिलेश क्यों इस्तीफा दें? जवाब यह है कि मुलायम का सपना तोड़ने की जिम्मेदारी कौन उठाएगा? आखिर मुलायम लंबे अरसे से पीएम बनने का ख्वाब देख रहे थे. पूरी साधना से थर्ड फ्रंट के नाम पर यूपी के वोटरों को साधने में लगे थे. हर रैली और जनसभा में अपने बेटे की सरकार की उपलब्धियां गिना रहे थे, लेकिन यूपी की जनता इसे नकार कर बीजेपी पर भरोसा दिखाया. इससे तो यह साफ है कि जनता अखिलेश सरकार से खुश नहीं है. तो नैतिकता के आधार पर ही सही, किसी को हार की जिम्मेदारी तो उठानी होगी. शुरुआत घर से होनी चाहिए.

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अब महाराष्ट्र की बात करते हैं. वैसे तो यहां पर विधानसभा चुनाव 6 महीने के अंदर ही होने हैं, पर कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन को आने वाले वक्त का एक नजारा इन चुनावों में मिल गया. लोकसभा में 48 सांसद भेजने वाले इस राज्य से 42 एनडीए के होंगे. पिछले 15 साल में ऐसा बुरा हाल कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन का कभी नहीं हुआ था. इस खराब प्रदर्शन की जिम्मेदारी कौन लेगा? नारायण राणे को देखिए, बेटा नीतेश राणे चुनाव हारा तो उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफे की पेशकश कर दी. विरोधियों को भले ही यह सियासी स्टंट लगे पर नैतिकता के नाम पर वह सामने तो आए. ऐसे में सूबे के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण का कोई फर्ज नहीं बनता. अब तो पार्टी हाईकमान भी जनादेश के आगे झुकता नजर आ रहा है.

कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी पहले ही हार की जिम्मेदारी ले चुके हैं, लेकिन अब दोनों कांग्रेस कार्यसमिति से इस्तीफा दे सकते हैं.

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