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चुनाव से पहले पंजाब में फिर गर्माया बरगाड़ी हिंसा मामला, CBI भी नहीं पकड़ पाई गुनहगार

1 जून 2015 को पंजाब के फरीदकोट जिले में बरगाड़ी ‌के बुर्ज जवाहर सिंह वाला गांव के गुरुद्वारा साहिब से किसी ने गुरुग्रंथ साहिब के पवित्र स्वरूप की चोरी कर ली. लगभग 3 महीने बाद यानी 25 सितंबर 2015 को उसी गुरुद्वारों के पास दो पंप्लेट बरामद हुए जो हाथों से लिखे गए थे जिसमें गुरुमुखी भाषा में अपशब्द लिखे गए थे.

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स्टोरी हाइलाइट्स
  • गुरुग्रंथ साहिब के पवित्र स्वरूप की हुई थी चोरी
  • 6 साल बाद भी आरोपियों को नहीं पकड़ पाई CBI

पंजाब धार्मिक तौर पर बेहद संवेदनशील राज्य माना जाता है. यही वजह है कि पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर बरगाड़ी हिंसा मामला गर्मा गया है.

पंजाब की सियासत धर्म से अछूती नहीं है. बीते दशकों में पंजाब ने बड़े पैमाने पर हिंसा भी देखी है. कट्टरपंथी संगठन भी पंजाब के लिए बड़ी चुनौती रहे लेकिन अब पंजाब बदल चुका है. लोग अमन और सद्भाव के साथ रहते हैं लेकिन असामाजिक तत्वों को अक्सर पंजाब का यह सुकून चुभता है. यही वजह है कि असामाजिक तत्व पंजाब में कहीं न कहीं कुछ ऐसी घटनाओं को हवा देने की कोशिश करते हैं ताकि यह बड़ा मुद्दा बन जाए.

6 साल पहले पंजाब में कुछ ऐसा ही हुआ था. 1 जून 2015 को पंजाब के फरीदकोट जिले में बरगाड़ी ‌के बुर्ज जवाहर सिंह वाला गांव के गुरुद्वारा साहिब से किसी ने गुरुग्रंथ साहिब के पवित्र स्वरूप की चोरी कर ली. लगभग 3 महीने बाद यानी 25 सितंबर 2015 को उसी गुरुद्वारों के पास दो पंप्लेट बरामद हुए जो हाथों से लिखे गए थे जिसमें गुरुमुखी भाषा में अपशब्द लिखे हुए थे.

उस समय यह आरोप डेरा पर लगाया गया कि स्वरूप की चोरी से लेकर अपशब्दों के इस्तेमाल में डेरा का हाथ है और वह सिख संगठनों को चुनौती दे रहा है. मामला शांत होने ही वाला था कि 12 अक्टूबर 2015 को गुरुद्वारा साहिब के पास सड़क किनारे पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप के पन्ने बरामद हुए. सिर्फ सड़कों पर ही नहीं बल्कि नालियों में भी पवित्र धर्म ग्रंथ के पन्ने पाए गए थे. 

इस घटना से सिख समाज इतना नाराज हुआ कि बड़े पैमाने पर सड़कों पर प्रदर्शन शुरू हो गए. तत्कालीन अकाली दल सरकार से सिख संगठनों ने इस मामले में आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की. 

इससे पहले की पुलिस कोई कार्रवाई करती प्रदर्शन और उग्र होने लगे. 14 अक्टूबर, 2015 को कोटकपुरा चौक और बठिंडा रोड पर बहबल कलां इलाके में सिख संगठन सड़कों पर प्रदर्शन करने उतरे जिस पर पंजाब पुलिस की ओर से फायरिंग की गई. इस पुलिसिया फायरिंग में दो लोगों की मौत हो गई. 

सीबीआई भी नहीं पकड़ पाई गुनहगार

जब एसआईटी आरोपियों तक नहीं पहुंच पाई तब पंजाब सरकार ने नवंबर 2015 में मामले की जांच के लिए सीबीआई को मामला सौंप दिया. सीबीआई ने भी काफी माथापच्ची की लेकिन उसे भी इस मामले के सुराग नहीं मिले. जस्टिस जोरा सिंह आयोग ने भी अपनी जांच के बाद 30 जून 2016 को अपनी रिपोर्ट पंजाब सरकार को सौंप दी थी लेकिन सरकार ने उसे सार्वजनिक ही नहीं किया. 

गुरुद्वारे की सेवादार और इस मामले में गवाह स्वर्ण जीत कौर कहती हैं कि बादल सरकार ने जोरा सिंह कमीशन की रिपोर्ट बनाई जिसने मामले की ढंग से सुनवाई तक नहीं की और बार-बार उन्हें मोहाली बुलाते रहे लेकिन कभी ठीक से बयान दर्ज नहीं किया. 

सरकार ने कुछ नहीं किया: स्वर्ण जीत कौर 

स्वर्ण जीत की नाराजगी सीबीआई से भी है और कहती हैं कि उन्होंने भी कई दिनों और हफ्तों तक बार-बार बुलाया, पूछताछ करते रहे लेकिन उन्होंने भी इस मामले में कुछ नहीं किया.

स्वर्णजीत कहती हैं कि नवजोत सिंह सिद्धू भी हाल में यहां पर आए थे और खुद मुख्यमंत्री चन्नी ने हरमंदर साहब जाकर यह कहा है कि वह इस मामले में इंसाफ दिलाएंगे इसलिए हमें यकीन है की इंसाफ तो मिलेगा लेकिन नेताओं की बात पर भरोसा नहीं होता. उन्होंने कहा, आज भी यह बरगाड़ी के लिए सबसे बड़ा मुद्दा है और चुनाव में भी यही मुद्दा बनेगा. 

नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब कांग्रेस की कमान सौंपी गई तो उन्होंने सीधे-सीधे तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पर बरगाड़ी कांड की जांच में ढिलाई बरतने का आरोप लगाया था. 

बरगाड़ी मामला पंजाब के लिए कितना पेचीदा है इसे इस बात से समझ सकते हैं  कि अब तक इस मामले की जांच के लिए तीन न्यायिक जांच आयोगों का गठन हो चुका है, राज्य की पुलिस इस मामले में जांच कर चुकी है और सीबीआई भी इस मामले में माथापच्ची कर चुकी है बावजूद इसके असमंजस की स्थिति बनी हुई है और घटना के गुनहगार पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं. 

पंजाब में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं इसलिए बरगाड़ी का मुद्दा एक बार फिर सुलगने लगा है. पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष  नवजोत सिंह सिद्धू 6 नवंबर को फरीदकोट के गांव बुर्ज जवाहर सिंह वाला स्थित गुरुद्वारा साहिब गए और वहां मत्था टेक कर इंसाफ की मांग दोहरायी.
    
29 सितंबर को पंजाब दौरे पर आए दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी बरगाड़ी मामले का मुद्दा उठाते हुए कहा कि साजिश का पता लगाकर नेताओं के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए क्योंकि इस घटना से पंजाब के लोग खफा हैं.

केजरीवाल ने कहा था कि मामले का मास्टरमाइंड कौन है यह बताने की जरूरत नहीं है. कांग्रेस सरकार पर सवाल उठाते हुए केजरीवाल ने कहा कि चन्नी साहब को कुंवर विजय प्रताप सिंह की रिपोर्ट पढ़नी चाहिए. उन्होंने कहा उनकी सरकार बनी तो वो साजिशकर्ताओं तक पहुंच जाएंगे और सभी आरोपियों की 24 घंटे में गिरफ्तारी हो जाएगी.

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