कांग्रेस ने बुधवार को मुकेश धनगर को उत्तर प्रदेश की मथुरा लोकसभा सीट से अपना उम्मीदवार घोषित किया जहां उनका मुकाबला मौजूदा सांसद और बीजेपी उम्मीदवार हेमा मालिनी से होगा. इस सीट से पहले कांग्रेस की तरफ से मुक्केबाज विजेंदर सिंह का नाम चल रहा था, लेकिन बुधवार को वह खुद बीजेपी में शामिल हो गए.
कांग्रेस का टिकट मिलने पर धनगर ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित तमाम पार्टी नेताओं का आभार व्यक्त किया और कहा, 'ये चुनाव प्रवासी और ब्रजवासी के बीच होगा. यहां जब भी चुनाव आते हैं तो नेता यमुना की बात करते हैं. मैं किसान मजदूर का बेटा हूं. मुझ जैसे एक किसान मजदूर परिवार में जन्मे एक छोटे से सामान्य कार्यकर्ता पर शिष्य नेतृत्व ने जो विश्वास जताया उसका मैं आजीवान आभारी रहूंगा.'
कौन हैं मुकेश धनगर
मुकेश धनगर पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई में महासचिव हैं. कांग्रेस के छात्र संगठन और युवा कांग्रेस में भी विभिन्न पदों पर रह चुके मुकेश 2003 में कांग्रेस से जुड़े. मुकेश धनगर का अपने समाज में ठीक-ठाक दबदबा है. विजेंदर सिंह से पहले भी उनका नाम मथुरा सीट के संभावित उम्मीदवारों में शामिल था, लेकिन हेमा मालिनी के सामने बाद में नामी चेहरा उतारने की रणनीति बनाई गई.
यह भी पढ़ें: 'विकसित मथुरा के लिए जो भी जरूरी है, वो सभी काम होंगे...' पर्चा दाखिल करने के बाद बोलीं हेमा मालिनी
मुथरा सीट की बात करें तो पिछली 2 चुनाव हेमा मालिनी ने बड़े अंतर से जीते थे. 2019 में उन्होंने आरएलडी के उम्मीदवार कुंवर नरेंद्र सिंह को 2,93,471 हजार वोटों से हराया. इस चुनाव में कांग्रेस के महेश पाठक को महज 28084 वोट ही मिल सके थे. वहीं 2014 के लोकसभा चुनाव में हेमा मालिनी ने आरएलडी नेता जयंत चौधरी को 3 लाख से भी ज्यादा वोटों से हराया था. बांकी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी.
कैसे हैं मथुरा सीट के जातीय समीकरण
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मथुरा लोकसभा सीट में पांच विधानसभा सीटें आती हैं जिनमें- छाता, मांट, गोवर्धन, मथुरा और बलदेव शामिल हैं. इस सीट पर जाट और मुस्लिम वोटरों का दबदबा है. 16 लाख से अधिक वोटरों वाली इस सीट में जाट और मुस्लिम वोटरों के अलावा ब्राह्मण, ठाकुर, यादव और वैश्य वोटर भी अहम भूमिका निभाते रहे हैं. चूंकि हेमा मालिनी धर्मेंद्र की पत्नी हैं, इसलिए यहां के लोग उन्हें जाट ही मानते हैं.