पंजाब सरकार ने आखिरकार आईएएस अधिकारी और बठिंडा से भाजपा की उम्मीदवार परमपाल कौर सिद्धू के सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) के उनके अनुरोध को मंजूरी दे दी है. इसे सिद्धू के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है. दरअसल भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने उनपर झूठ बोलकर रिटायरमेंट लेने का आरोप लगाया था.
सूत्रों ने के मुताबिक राज्य सरकार ने इस बारे में केंद्र को पत्र लिखकर बता दिया है कि उन्हें सिद्धू का इस्तीफा स्वीकार करने पर कोई आपत्ति नहीं है. दरअसल केंद्र सरकार का कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ही एक आईएएस अधिकारी का इस्तीफा स्वीकार करता है.
राज्य सरकार ने इस्तीफे को कर दिया था अस्वीकार
परमाल सिंह सिद्धू ने 1 जून को होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए बठिंडा संसदीय क्षेत्र से अपना नामांकन पत्र दाखिल करना है. हालांकि, उन्हें वीआरएस योजना के तहत लाभ नहीं मिलेगा. इससे पहले, सिद्धू ने भारतीय प्रशासनिक सेवा से वीआरएस के लिए आवेदन किया था और डीओपीटी ने उन्हें औपचारिक रूप से कार्यमुक्त कर दिया था.हालांकि, राज्य सरकार ने कथित तौर पर "गलतफहमी" के आधार पर वीआरएस के उनके अनुरोध को अस्वीकार कर दिया था और उन्हें अपने ड्यूटी को फिर से शुरू करने के लिए कहा था.
यह आशंका जताते हुए कि नामांकन भरने के लिए सरकारी बकाया राशि के लिए अदेयता प्रमाणपत्र प्राप्त करने में उन्हें समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, सिद्धू ने 8 मई को आईएएस पद से अपना इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने कहा, 'किसी भी भ्रम से बचने के लिए, मैंने अपना इस्तीफा दे दिया है. मैंने सुना है कि इसे स्वीकार कर लिया गया है.'
बीजेपी में शामिल होने के बाद पंजाब सरकार ने लगाया अडंगा
उन्होंने आरोप लगाया, 'मुझे यह कहते हुए (सरकारी आवास का लाभ उठाने के लिए बिजली और पानी के शुल्क के लिए) अदेयता प्रमाणपत्र नहीं दिया जा रहा था कि मैं सेवानिवृत्त नहीं हुई हूं. वे खेल खेल रहे थे.' 2011 बैच की आईएएस अधिकारी, सिद्धू ने पिछले महीने अपना इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने यह भी अनुरोध किया था कि तीन महीने की नोटिस अवधि की शर्त को माफ कर दिया जाए. बाद में वह दिल्ली में बीजेपी में शामिल हो गईं.
सिद्धू अकाली दल नेता सिकंदर सिंह मलूका की बहू हैं. 11 अप्रैल को उनके भाजपा में शामिल होने के बाद, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि राज्य सरकार ने आईएएस अधिकारी के रूप में उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है. वह उस समय पंजाब राज्य औद्योगिक विकास निगम के प्रबंध निदेशक के रूप में तैनात थीं.
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पंजाब सरकार ने लिखा था पत्र
पंजाब सरकार की ओर से परमपाल कौर को एक चिट्ठी भेजी गई है. इसमें लिखा है, 'आपने कहा था कि आपकी मां 81 साल की हैं और उनका स्वास्थ्य अच्छा नहीं रहता. पिता और आपके छोटे भाई का कई साल पहले निधन हो चुका है और मां का ख्याल रखने के लिए भारत में कोई नहीं है. इसलिए मां का ख्याल रखने के लिए बठिंडा में अपने घर पर रहने की जरूरत है.'
इस पत्र में लिखा गया है, 'लेकिन बीते कई दिनों से आप राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय हैं, जो VRS लेने के लिए बताए गए कारणों को झूठा साबित करता है.'इसमें आगे कहा गया है, 'राज्य सरकार ने अभी भी तीन महीने के नोटिस पीरियड को माफ नहीं किया है, जो नियम 16(2) के तहत जरूरी है. VRS के लिए भी अभी तक कोई आदेश जारी नहीं किया गया है.'