बिहार के पूर्णिया सीट से कांग्रेस नेता पप्पू यादव चुनाव लड़ने की जिद्द पर अड़े हुए हैं. यही वजह है कि गुरुवार को उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर अपना पर्चा भी दाखिल कर दिया है. पूर्णिया सीट आरजेडी के कोटे में जाने के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश सिंह उनसे अपना नाम वापस लेने को कह रहे हैं. पप्पू यादव ने चुनाव मैदान छोड़ने से इनकार कर दिया है. इस बीच पप्पू यादव का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वो लोगों के सामने भाषण देते हुए रोने लगते हैं.
मंच पर ही रोने लगे पप्पू यादव
नामांकन के बाद कार्यकर्ताओं और आम लोगों को संबोधित करते हुए पप्पू यादव ने इस दौरान लालू परिवार पर भी जमकर हमला बोला. पप्पू यादव ने कहा, पिछले 14 दिन से मुझे अपमानित किया जा रहा है, मेरी पार्टी खत्म की गई, इतनी नफरत क्यों है मुझसे, कौन सी दुश्मनी थी मुझसे ? क्या किया था मैंने ? मैंने कहा था लालू को हम आपके बेटे को सीएम बनाएंगे, साथ में लड़ेंगे.' ये कहते हुए पप्पू यादव भावुक हो गए और उनके आंखों से आंसू बहने लगे.
इतना ही नहीं पप्पू यादव ने इसके बाद खुद को संभालते हुए कहा, ये आपका बेटा आपका नाम रोशन करेगा, इस क्षेत्र ने बहुत सारे नेता बनाए, इस क्षेत्र ने अब तक नेता पैदा किया था लेकिन पहली बार मेरे रूप में बेटा पैदा किया है, लोगों को संबोधित करते हुए पप्पू यादव ने कहा, इस बेटे को गले लगा लीजिए, मुझे पैसा नहीं चाहिए, मुझे सिर्फ सेवा करनी है, आपका पूर्णिया पप्पू को अपना खून समझता है, हमको लोगों का तिरस्कार किया जाता है, अपमानित करते हैं, मुझे ये गंदी राजनीति नहीं करनी है.
पप्पू यादव ने नॉमिनेशन वापस लेने से किया इनकार
वहीं आज तक से बात करते हुए जब उनसे पूछा गया कि वो कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के अल्टीमेटम पर क्या अपना नामांकन वापस लेंगे, पप्पू यादव ने इस पर सीधे कुछ भी कहते हुए घुमा फिराकर नॉमिनेशन वापस लेने से इनकार कर दिया.
पप्पू यादव ने कहा, 'अखिलेश प्रताप सिंह से हमारे व्यक्तिगत अच्छे संबंध हैं. मैं कांग्रेसी सिपाही हूं. हर वर्कर कांग्रेसी है, मैं उनके दिल में हूं. मैं कांग्रेस को बिहार में मजबूत करना चाहता हूं. मेरे नेताओं के लिए देश पहले है. मैं कांग्रेस के समर्थन से यहां उतरा हूं. मैं एक साल से यहां प्रणाम पूर्णिया सलाम पूर्णिया कर रहा हूं. सबको पता है कि यहां मैंने लोगों के बीच क्या किया है. मैं जिस लायक हूं, उस लायक मुझको रखा जाए. मुझे जनता का आशीर्वाद मिल रहा हूं. हम पूर्णिया से कहीं नहीं जाएंगे. यहां के लोगों की ही सेवा करेंगे.'