देश का सियासी मिजाज गर्म है. लोकसभा चुनावों में अब कुछ ही दिनों का समय बचा है तो वहीं कई राज्यों में उपचुनाव और विधानसभा चुनाव का भी पारा पाई है. चुनावों के मद्देनजर रैलियों का दौर जारी है. स्टार प्रचारक से लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं और रिश्तेदारों तक अपने-अपने उम्मीदवारों के लिए चुनाव प्रचार में जुटे हैं. हर कोई अपनी पार्टी के तमाम चुनावी वादों को लेकर लोगों की बीच जा रहे हैं. इस बार लोकसभा चुनाव से लेकर विधानसभा चुनावों तक में कई ऐसे भी उम्मीदवार हैं, जो अपनों के लिए ही चुनौती बने हुए हैं और मैदान में एक दूसरे के सामने चुनाव लड़ रहे हैं.
महाराष्ट्र से लेकर ओडिशा तक ऐसे कई उम्मीदवार हैं, जो अपनों को ही चुनावी टक्कर दे रहे हैं. हालांकि यह पहला मौका नहीं है, जब रिश्तेदार आमने-सामने हैं. इससे पहले भी कई ऐसे मौके आए हैं. 1984 में अमेठी सीट पर राजीव गांधी को उनके ही छोटे भाई की पत्नी मेनका गांधी ने चुनौती दी थी. वह निर्दलीय चुनाव लड़ने उतरी थीं और हार का सामना करना पड़ा था.
वहीं 2014 में बंगाल के रायगंज सीट से देवर भाभी आमने सामने थे. तब के चुनाव में कांग्रेस ने प्रियरंजन दासमुंशी की पत्नी दीपा दासमुंशी को टिकट दिया था तो ममता बनर्जी की टीएमसी ने प्रियरंजन दास मुंशी के भाई सत्यरंजन दासमुंशी को भाभी के खिलाफ मैदान में उतार दिया था. इसके अलावा 2019 के लोकसभा चुनाव में ऐसा ही नजारा उत्तर प्रदेश की फिरोजाबाद सीट पर देखने को मिला था. तब मुलायम सिंह यादव परिवार शिवपाल यादव के सामने उनके चचेरे भाई रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय ने चुनाव लड़ा था. इस चुनाव में अक्षय को हार का सामना करना पड़ा था. आइए जानते हैं इस बार के चुनावों में कौन-कौन हैं आमने सामने-
बंगाल में पूर्व पति-पत्नी एक दूसरे के खिलाफ मैदान में
पश्चिम बंगाल की बिष्णुपुर सीट पर रोचक मुकाबला देखने को मिल रहा है. यहां पूर्व पति-पत्नी एक दूसरे को चुनौती देने के लिए मेदान में हैं. बीजेपी ने इस लोकसभा चुनाव में बिष्णुपुर में वर्तमान सांसद सौमित्र खान को फिर से मैदान में उतारा है. वहीं उनके सामने ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने सौमित्र की पूर्व पत्नी सुजाता मंडल को टिकट दिया है. इसके साथ ही बिष्णुपुर सीट पर मुकाबले को रोचक बन गया है. पिछले लोकसभा चुनाव में सौमित्र खान ने टीएमसी के उम्मीदवार श्यामल संत्रा को हराया था.
महाराष्ट्र में ननद-भाभी और देवर-भाभी के बीच मुकाबला
महाराष्ट्र की दो सीटों पर इस बार मुकाबला देखने को मिलेगा. यहां की बारामती सीट पर ननद भाभी तो उस्मानाबाद से देवर भाभी के बीच मुकाबला है. बारामती सीट से NCP शरद पवार गुट की सुप्रिया सुले के सामने NCP अजित पवार गुट की सुनेत्रा पवार चुनाव लड़ रही हैं. सुनेत्रा रिश्ते में सुप्रिया सुले की भाभी लगती हैं और वह महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार की पत्नी हैं.
वहीं उस्मानाबाद सीट से शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट ने ओम राजे निंबालकर को टिकट देकर मैदान में उतारा है. उनके चुनौती देने के लिए अजित पवार गुट की एनसीपी ने पूर्व मंत्री डॉक्टर पदम सिंह पाटिल की बहू और BJP विधायक राणा जगजीत सिंह पाटिल की पत्नी अर्चना पाटिल को उम्मीदवार घोषित किया है. अर्चना पाटिल निंबलाकर की रिश्ते में भाभी लगती हैं.
आंध्र प्रदेश में चचेरे भाई-बहन के बीच मुकाबला
इसी तरह से आंध्र प्रदेश की एक सीट पर चचेरे भाई बहन के बीच कड़ा मुकाबला होने जा रहा है. दरअसल, प्रदेश की कडप्पा सीट से सीएम और YSR कांग्रेस प्रमुख जगन मोहन रेड्डी ने अपने चचेरे भाई वाई. एस. अविनाश रेड्डी को मैदान में उतारा है. वहीं कांग्रेस ने रेड्डी के सामने जगन मोहन की बहन वाई. एस. शर्मिला को टिकट देकर मुकाबला रोचक बना दिया है. शर्मिला फिलहाल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भी हैं. राजनीतिक विशेषज्ञ इस घरेलू सीट पर मुकाबले को पारिवारिक विरासत और वर्चस्व की लड़ाई करार दे रहे हैं. इस सीट पर फिलहाल जगन मोहन रेड्डी के करीबी माने जाने वाले अविनाश सांसद हैं.
ओडिशा में एक दूसरे को टक्कर दे रहे दो सगे भाई
ओडिशा में इस बार लोकसभा चुनाव के साथ-साथ विधानसभा चुनाव भी होने हैं. इसके मद्देनजर पार्टियां अपने-अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर चुकी हैं. राज्य की एक सीट ऐसी भी है, जहां दो सगे भाई एक दूसरे को चुनौती दे रहे हैं. दरअसल, चिकिटी विधानसभा सीट
से रवींद्रनाथ द्यान सामंत्रा कांग्रेस के टिकट पर तो उनके भाई मनोरंजन द्यान सामंत्रा बीजेपी के टिकट पर सामने-सामने हैं. चुनावी मैदान में एक-दूसरे का सामना करने वाले दोनों भाई ओडिशा के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष चिंतामणि ज्ञान सामंतराय के बेटे हैं. चिंतामणि ज्ञान सामंतराय चिकिटी से तीन बार चुने गए थे. वह दो बार निर्दलीय (1980 और 1995) और एक बार कांग्रेस के टिकट पर (1985) चुनाव जीत चुके हैं. वहीं उनके छोटे बेटे मनोरंजन दो बार 2014 में कांग्रेस और 2019 में बीजेपी टिकट पर विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं. उनके बड़े भाई रवींद्रनाथ पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं.