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जातीय समीकरण साधने में लगे हैं राज्यवर्धन सिंह, कृष्णा पूनिया के नाम पर चुप

जयपुर ग्रामीण में राजपूत बनाम जाट का मुकाबला होता देख राठौर अनुसूचित जाति, जनजाति और गुर्जरों के साथ कर रहे अलग-अलग मीटिंग. लेकिन कृष्णा पूनिया का नाम न लेकर कांग्रेस को बना रहे निशाना.

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राज्यवर्धन सिंह(फोटो-ट्विटर)
राज्यवर्धन सिंह(फोटो-ट्विटर)

जयपुर ग्रामीण संसदीय सीट पर बीजेपी के राज्यवर्धन सिंह राठौर और कांग्रेस की कृष्णा पूनिया के बीच लड़ाई रोचक हो गई है. दोनों खिलाड़ी रहे हैं और कृष्णा पूनिया राठौर पर जोरदार हमले कर रही हैं. तो राठौर भी पीछे नहीं हट रहे हैं. लेकिन वो पूनिया को नहीं कांग्रेस को निशाना बना रहे हैं. वह कांग्रेस के घोषणा पत्र को निशाना बना रहे हैं.

जयपुर ग्रामीण से बीजेपी के उम्मीदवार राज्यवर्धन सिंह राठौर ने कहा है कि कांग्रेस राज्य को कमजोर करने के लिए चुनाव मैदान में आई है. उस पार्टी को लोग वोट नहीं देंगे, जो धारा 370 को बरकरार रखने की बात करती है. कश्मीर में सेना को हटाने की बात करती है और राज्यों में जारी सेना के स्पेशल प्रोटेक्शन फोर्स एक्ट को खत्म करने की बात करती है. राठौर कहते हैं कि हम लोगों के बीच जाएंगे और बताएंगे कि कांग्रेस अगर आ गई तो किस तरह के हालात देश में पैदा होंगे.

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राठौर का आरोप है कि यहां तक उसमें यह भी कहा गया है कि मीडिया के ऊपर भी कानून बनाया जाएगा. अगर कांग्रेस सत्ता में आ जाती है तो मीडिया को ही बोलने की आजादी नहीं होगी.

राज्यवर्धन राठौर चुनाव प्रचार में लगे हुए हैं. जबकि उनके सामने कांग्रेस ने कृष्णा पूनिया को मैदान में उतारा है राठौर मोदी के नाम के भरोसे चुनाव मैदान में रहने के बजाय जातीय समीकरण भी साधने में लगे हैं. जयपुर ग्रामीण में राजपूत बनाम जाट का मुकाबला होता देख राठौर कांग्रेस के वोट बैंक अनुसूचित जाति, जनजाति और गुर्जरों को अलग से मीटिंग कर समझाने में लगे हैं कि बीजेपी उनकी असली हितैषी पार्टी है.

राज्यवर्धन सिंह राठौर ने दोनों ही जातियों के समाज के लोगों को उनके मंदिरों में बुलाकर समझाने की कोशिश की कि वे कांग्रेस के साथ ना रह कर बीजेपी का साथ दें. हालांकि कांग्रेस उम्मीदवार कृष्णा पूनिया के बारे में बार-बार पूछने पर भी राज्यवर्धन राठौर कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं होते हैं. दरअसल राठौर की रणनीति है कि वह पूरे चुनाव प्रचार में कृष्णा पूनिया का नाम नहीं लेंगे. यही कांग्रेस की ताकत भी है क्योंकि कृष्णा पूनिया एक अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी हैं, लिहाजा राठौर के मुकाबले खड़ी हो सकती हैं. राजनीति में नई हैं तो उनके ऊपर कोई आरोप भी नहीं है.

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