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पूर्णिया लोकसभा सीट पर 16 उम्मीदवार मैदान में, क्या है सियासी गणित?

बिहार की पूर्णिया लोकसभा सीट पर कांग्रेस पार्टी से उदय सिंह, जनता दल युनाइटेड से संतोष कुमार, बहुजन समाज पार्टी से जितेंद्र उरब, झारखंड मुक्ति मोर्चा से मंजू मुरमू और बिहार लोक निर्माण दल से सनोज कुमार चौहान समेत कुल 16 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं. यहां पर दूसरे चरण में 18 अप्रैल को वोटिंग होगी और 23 मई को मतगणना होगी और चुनाव के नतीजे घोषित किए जाएंगे.

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पूर्णिया रेलवे स्टेशन
पूर्णिया रेलवे स्टेशन

बिहार की पूर्णिया लोकसभा सीट से इस बार 16 उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे हुए हैं. इस सीट पर कुल 26 नामांकन दाखिल किए गए थे. इस सीट पर दूसरे चरण में 18 अप्रैल को मतदान होने हैं. इस चरण में 12 राज्यों की कुल 95 लोकसभा सीटों पर वोट डाले जाएंगे. इसके बाद 23 मई को मतगणना होगी और चुनाव नतीजे घोषित किए जाएंगे.

पूर्णिया लोकसभा सीट पर कांग्रेस पार्टी से उदय सिंह, जनता दल युनाइटेड से संतोष कुमार, बहुजन समाज पार्टी से जितेंद्र उरब, झारखंड मुक्ति मोर्चा से मंजू मुरमू और बिहार लोक निर्माण दल से सनोज कुमार चौहान चुनाव मैदान में हैं.

इसके अलावा बतौर निर्दलीय एमडी अख्तर अली, अनिरुद्ध मेहता, अर्जुन सिंह, अशोक कुमार सिंह, डॉ मृत्युंजय कुमार झा, राजीव कुमार सिंह, राजेश कुमार, सुभाष कुमार ठाकुर, शोभा सोरेन, सगीर अहमद और अशोक कुमार शाह चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं.

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साल 2014 के लोकसभा चुनाव में पूर्णिया सीट से जेडीयू के संतोश कुमार कुशवाहा ने बीजेपी के उदय सिंह को शिकस्त दी थी. संतोष कुमार को 4लाख 18 हजार 826 वोट मिले थे, जबकि बीजेपी उम्मीदवार उदय सिंह के खाते में 3 लाख 2 हजार 157 वोट आए थे. इसके अलावा कांग्रेस के उम्मीदवार अमरनाथ तिवारी को एक लाख 24 हजार 344 वोट मिले थे और वो तीसरे नंबर पर रहे थे.

अगर पूर्णिया लोकसभा सीट के चुनावी इतिहास पर नजर दौड़ाएं, तो साफ होता कि यहां के वोटर समय समय पर अपना प्रतिनिधि बदलते रहे हैं. साल 1957 में इस सीट से कांग्रेस के टिकट पर फनी गोपाल सेन गुप्ता ने जीत दर्ज की थी. इसके बाद 1962 और 1967 के चुनाव में भी उन्हीं को ही जीत मिली.

इसके बाद 1971 में कांग्रेस के टिकट पर मोहम्मद ताहिर और 1977 में बीएलडी के लखनलाल कपूर ने जीत हासिल की, जबकि 1980 और 1984 के चुनाव में लगातार दो बार कांग्रेस के टिकट पर माधुरी सिंह ने चुनाव जीता. साल 1989 के चुनाव में जनता दल के टिकट पर यहां से तस्लीमुद्दीन ने बाजी मारी थी. इसके बाद बाहुबली पप्पू यादव ने इस सीट को अपना सियासी गढ़ बना लिया.

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साल 1996 के लोकसभा चुनाव में इस सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने चुनाव जीता था. हालांकि 1998 के चुनाव में बीजेपी के जयकृष्ण मंडल ने बाजी मार ली थी. साल 1999 में पप्पू यादव ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में फिर एक बार चुनावी मैदान में उतरे और जीत दर्ज की थी. इसक बाद 2004 और 2009 के चुनाव में बीजेपी के उदय सिंह को जीत मिली थी. साल 2014 के चुनाव में इस सीट से जेडीयू के संतोष कुमार कुशवाहा ने जीत हासिल की थी.

आपको बता दें कि पूर्णिया पूर्वोत्तर बिहार का सबसे बड़ा शहर है, जहां से नेपाल और पूर्वोत्तर भारत की ओर जाने का रास्ता गुजरता है. वर्तमान में पूर्णिया प्रमंडलीय मुख्यालय है, जिसके अंतर्गत अररिया, पूर्णिया, कटिहार और किशनगंज जिले आते हैं. पूर्णिया सौरा नदी के पूर्वी किनारे पर बसा है.

पूर्णिया लोकसभा संसदीय क्षेत्र के दायरे में 6 विधानसभा सीटें आती हैं, जिनमें कस्बा, बनमखनी, रुपौली, धमदाहा, पूर्णिया और कोरहा विधानसभा सीटें शामिल हैं. साल 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में इन 6 विधानसभा सीटों में से 2 सीटें बीजेपी, 2 सीटें जेडीयू और 2 सीटें कांग्रेस के खाते में गई थीं. पूर्णिया लोकसभा क्षेत्र में वोटरों कुल वोटरों की संख्या 13 लाख 5 हजार 396 है, जिनमें से 6 लाख 88 हजार 182 पुरुष वोटर हैं, जबकि 6 लाख 17 हजार 214 महिला मतदाता हैं.

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