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नालंदा: नीतीश के इस सुरक्षित दुर्ग में किसी और पार्टी की सेंधमारी मुश्किल

नालंदा संसदीय क्षेत्र में सात विधानसभा क्षेत्र आते हैं. ऐसा नए परिसीमन के बाद किया गया. सात विधानसभा क्षेत्रों में अस्थावां, बिहारशरीफ, राजगीर,  इस्लामपुर, हिलसा, नालंदा और हरनौत के नाम शामिल हैं.

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खाकी बंडी में कौशलेंद्र कुमार (फेसबुक फोटो)
खाकी बंडी में कौशलेंद्र कुमार (फेसबुक फोटो)

बिहार का यह संसदीय क्षेत्र काफी प्रभावशाली माना जाता है. बिहार के मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसी क्षेत्र से आते हैं. जनरल सीट नालंदा से 2014 में जेडीयू प्रत्याशी कौशलेंद्र कुमार ने चुनाव जीता था. उन्होंने लोजपा उम्मीदवार सत्य नंद शर्मा को हराया था. दोनों के बीच काफी कांटे की टक्कर रही और शर्मा काफी कम वोटों से हारे. चुनाव आयोग के 2009 के आंकड़े के मुताबिक, नालंदा संसदीय क्षेत्र में कुल वोटरों की संख्या 1,719,503 है जिनमें 803,727 महिला और 915,776 पुरुष मतदाता हैं. इस सीट पर कांग्रेस के दबदबे के अलावा सीपीआई और जनता पार्टी की भी अच्छी पैठ रही है.

2014 और 2009 का चुनावी विश्लेषण

2014 में इस सीट पर जेडीयू के कौशलेंद्र कुमार जीते थे. उन्होंने एलजेपी प्रत्याशी सत्य नंद शर्मा को हराया था. कौशलेंद्र कुमार को 3,21,982 (34.93 प्रतिशत) वोट मिले जबकि सत्य नंद शर्मा को 3,12,355 वोट. शर्मा को कुल वोटों का 33.88 प्रतिशत हिस्सा प्राप्त हुआ. हार का अंतर देखें तो यह 10 हजार से भी कम था और 1 प्रतिशत से भी कम वोट शेयर पर जीत-हार का फैसला हुआ. 2014 के चुनाव में इस सीट पर तीसरे नंबर पर कांग्रेस रही जिसके प्रत्याशी आशीष रंजन सिन्हा को 1,27,270 (13.81 प्रतिशत) वोट मिले. चौथे और पांचवें स्थान पर क्रमशः बीएसपी और सीपीआई (एमएल) रहे. छठे स्थान पर नोटा रहा जिसके तहत 5,452 (0.59 प्रतिशत) वोट दर्ज हुए. इस चुनाव में जेडीयू के लिए अच्छी बात यह रही कि उसने पिछले चुनाव में जीत का अपना सिलसिला बरकरार रखा.

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2009 के चुनाव में भी जेडीयू और एलजेपी के बीच टक्कर रही. जेडीयू प्रत्याशी कौशलेंद्र कुमार ने एलजेपी के सतीश कुमार को हराया. उस साल कौशलेंद्र कुमार को 2,99,155 वोट मिले जबकि सतीश कुमार को 1,46,478 वोट. दोनों नेताओं के बीच वोट की संख्या और वोट प्रतिशत का बड़ा अंतर देखा गया. कौशलेंद्र कुमार को 52.65 प्रतिशत वोट मिले थे जबकि सतीश कुमार को जेडीयू से ठीक आधे 25.78 प्रतिशत वोट हासिल हुए. इस चुनाव में तीसरे स्थान पर लोकतांत्रिक समता दल के प्रत्याशी अनिल सिंह रहे जिन्हें मात्र 20,335 (3.58 प्रतिशत) वोट मिले. चौथे और पांचवें स्थान पर क्रमशः बीएसपी और कांग्रेस रहे. 2009 के चुनाव में भी जेडीयू ने अपना कब्जा बरकार रखा.

1999 से लेकर 2014 तक के लोकसभा चुनाव में जेडीयू जीत हासिल करती रही है. इस बीच 2006 में मध्यावधि चुनाव भी हुए जिसमें जेडीयू ने ही अपना परचम लहराया. इसका कारण यह है कि इस क्षेत्र को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सुरक्षित दुर्ग माना जाता है.

नालंदा के विधानसभा क्षेत्र

नालंदा संसदीय क्षेत्र में सात विधानसभा क्षेत्र आते हैं. ऐसा नए परिसीमन के बाद किया गया. सात विधानसभा क्षेत्रों में अस्थावां, बिहारशरीफ, राजगीर,  इस्लामपुर, हिलसा, नालंदा और हरनौत के नाम शामिल हैं. इनमें राजगीर एससी रिजर्व सीट है. बाढ़ संसदीय क्षेत्र में पहले चंडी और हरनौत विधानसभा आते थे लेकिन परिसीमन के बाद चंडी विधानसभा समाप्त कर दिया गया और उसका हिस्सा हरनौत में शामिल हो गया. हरनौत को बाढ़ से हटाकर नालंदा में शामिल कर लिया गया. हरनौत ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का विधानसभा क्षेत्र है.

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सांसद कौशलेंद्र कुमार का विवरण

जेडीयू सांसद कौशलेंद्र कुमार 15वीं और 16वीं लोकसभा के सदस्य हैं. इनका जन्म नालंदा जिले के इस्लामपुर थाने में हैदरचाक गांव में 13 जनवरी 1959 को हुआ. इनकी उच्चतम योग्यता बीए है. बिहारशरीफ के एसपीएम कॉलेज से उन्होंने इंटरमीडिएट किया. किसान कॉलेज सोहसराय (नालंदा यूनिवर्सिटी) से बीए ऑनर्स की डिग्री ली. कौशलेंद्र कुमार सांसद होने के साथ खेतीहर भी हैं.

कौशलेंद्र कुमार की संसदीय गतिविधि

जेडीयू सांसद कौशलेंद्र कुमार ने संसद की 174 बहसों में हिस्सा लिया है. अपने लगभग 5 साल के कार्यकाल में उन्होंने महज 2 प्राइवेट मेंबर बिल पास कराए हैं. 174 बहसों में उन्होंने 334 सवाल पूछे हैं. संसद में उनकी हाजिरी 96 प्रतिशत तक रही है. बीते साल के शीत और मॉनसून सत्र में उनकी शत-प्रतिशत हाजिरी दर्ज हुई. 2017 के सत्रों में भी उनकी हाजिरी 100 प्रतिशत दर्ज की गई. कौशलेंद्र कुमार ने जो सवाल पूछे उनमें सेंट्रल यूनिवर्सिटी, एनसीएलटी के तहत दर्ज मामले, कर्जमाफी, राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान और डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के प्रश्न अहम हैं.

कौशलेंद्र कुमार के कार्य

कौशलेंद्र कुमार को भारत सरकार की ओर से 19.50 करोड़ रुपए जारी किए गए. हालांकि कुमार ने जारी धन से भी ज्यादा 22.09 करोड़ रुपए अपने संसदीय क्षेत्र में खर्च किए. सरकार से मिले फंड की उपयोगिता का प्रतिशत देखें तो इसका आंकड़ा 113.45 करोड़ बैठता है. इस लिहाज से कौशलेंद्र कुमार का कामकाज संतोषजनक माना जा सकता है.

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