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प्रीतम मुंडे: पिता की मौत के बाद रखा राजनीति में कदम, बीड सीट से रचा था इतिहास

महाराष्ट्र की बीड सीट से एक बार प्रीतम मुंडे बीजेपी के टिकट पर मैदान में हैं. प्रीतम मुंडे, गोपीनाथ मुंडे की बेटी हैं. गोपीनाथ मुंडे के निधन के बाद 2014 में प्रीतम ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की और पिता की सीट बीड से लोकसभा उपचुनाव लड़ीं.

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महाराष्ट्र की बीड सीट से एक बार प्रीतम मुंडे मैदान में हैं.
महाराष्ट्र की बीड सीट से एक बार प्रीतम मुंडे मैदान में हैं.

महाराष्ट्र की बीड सीट से एक बार प्रीतम मुंडे बीजेपी के टिकट पर मैदान में हैं. प्रीतम मुंडे, गोपीनाथ मुंडे की बेटी हैं. गोपीनाथ मुंडे के निधन के बाद 2014 में प्रीतम ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की और पिता की सीट बीड से लोकसभा उपचुनाव लड़ीं. इस चुनाव में प्रीतम ने रिकॉर्ड बनाया और करीब 7 लाख वोटों से जीतीं.

प्रीतम के राजनीतिक सफर से पहले उनके निजी जिंदगी में आइए जानते हैं. प्रीतम का जन्म 17 फरवरी 1983 को हुआ था. वह महाराष्ट्र के बड़े नेताओं में शुमार रहे गोपीनाथ मुंडे और प्रज्ञा मुंडे की छोटी बेटी हैं. उनकी बड़ी बहन पंकजा मुंडे और छोटी बहन यशशारी हैं. वह स्वर्गीय प्रमोद महाजन की भतीजी हैं और राहुल महाजन और पूनम महाजन की चचेरी बहन हैं. एनसीपी नेता धनंजय मुंडे नेता भी प्रीतम के चचेरे भाई हैं.

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मुंडे परिवार में सबसे शिक्षित प्रीतम ने नवी मुंबई के डीवाई पाटिल संस्थान से अपनी चिकित्सा शिक्षा पूरी की है. 2012 में गोपीनाथ मुंडे ने प्रीतम को सोलापुर में एक मेडिकल कॉलेज का निदेशक बना दिया था. 2009 में प्रीतम की शादी नासिक के रहने वाले गौरव खाडे से हुई है, जो कि आईटी पेशेवर हैं. प्रीतम का एक बेटा है, जिसका नाम अगस्त्य खाडे है.

अब बात करते हैं प्रीतम मुंडे के राजनीतिक सफर के बारे में. पिता गोपीनाथ मुंडे के निधन के बाद प्रीतम मुंडे उनकी सीट बीड से चुनाव मैदान में उतरी थीं. उनके खिलाफ शिवसेना और एनसीपी ने प्रत्याशी नहीं उतारा था. प्रीतम ने अपने निकटम प्रतिद्वंदी कांग्रेस के अशोक एस पाटिल को 6,96,321 वोटों से मात दिया. भारतीय चुनाव के इतिहास में यह सबसे अधिक मार्जिन से जीत थी. इससे पहले 2014 में ही वड़ोदरा सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5.7 लाख वोटों के मार्जिन से जीते थे.

इसके बाद उनकी बड़ी बहन पंकजा ने परली विधानसभा सीट से जीत हासिल की. दोनों मुंडे बहनें बहुत अलग हैं. पंकजा मुखर हैं, वहीं प्रीतम बेहद शर्मीली हैं और लाइमलाइट से दूर रहना पसंद करती हैं. इस बार फिर वह बीड से मैदान में हैं. प्रीतम के सामने उनके ही चचेरे भाई धनंजय मुंडे हैं, जो एनसीपी के प्रत्याशी हैं. अब देखना होगा कि प्रीतम क्या इस बार भी अपने पिता की सीट से जीत पाती हैं या नहीं?

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