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केरल की अट्टिंगल लोकसभा सीटः वाम के गढ़ को कितना चोट पहुंचाएगा सबरीमाला मसला?

केरल की अट्टिगंल लोकसभा सीट साल 2008 में हुए परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई है. पिछले दो चुनाव से यहां माकपा का कैंडिडेट जीतता रहा है. यह सबरीमाला आंदोलन के असर वाले इलाकों में है, इसलिए बीजेपी भी यहां अपना जनाधार बढ़ाने के लिए पूरा जोर लगा रही है.

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सबरीमाला आंदोलन का अट्ट‍िंगल सीट पर भी है असर
सबरीमाला आंदोलन का अट्ट‍िंगल सीट पर भी है असर

केरल की यह संसदीय सीट साल 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई है. इसके अंतर्गत वरक्कला, अट्टिंगल, चिराइकीड़ू, नेदुमंगड, वामनपुरम, अरुविक्कारा और कटक्काड़ा विधानसभा क्षेत्र आते हैं. इसमें मावेलिक्करा और पहले के चिराइनकिल संसदीय क्षेत्र के हिस्सों को शामिल किया गया है. इन दोनों संसदीय क्षेत्र में कभी कांग्रेस तो कभी माकपा जीतती रही है और दोनों में अच्छी टक्कर रहती थी. लेकिन अट्ट‍िंगल सीट को वामपंथि‍यों का गढ़ माना जा सकता है. यह सीट सबरीमाला आंदोलन के प्रभाव वाले इलाकों में है, इसलिए यह देखना होगा कि इस आंदोलन से लेफ्ट कैंडिडेट को कोई नुकसान होता है या नहीं...

दोनों बार माकपा सांसद

नवगठित अट्टिंगल सीट की बात करें तो पिछले दो बार से यहां माकपा के ही सांसद हैं. साल 2009 में यहां माकपा के ए. सम्पत और 2014 के चुनाव में भी माकपा के ए. सम्पत विजयी हुए थे.

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साल 2014 के चुनाव में माकपा के ए. सम्पत को 3,92,478 वोट मिले थे. उन्हें करीब 45 फीसदी वोट हासिल हुए थे. कांग्रेस कैंडिडेट एडवोकेट बिंदु कृष्णा को 3,23,100 वोट, बीजेपी की एस. गिरिजाकुमारी को 90,528 वोट और नोटा को 6,924 वोट हासिल हुए थे. बहुजन समाज पार्टी के अनिल कुमार एनएस को 8,586 और शिवसेना के वी.जी. अजित को 5,511 वोट हासिल हुए.

ए. सम्पत  इसके पहले 1996 में तत्कालीन चिराइनकिल सीट से सांसद बने थे. इस इलाके से उनका जुड़ाव उनके पिता के जमाने से है. उनके पिता ए. अनिरुद्धन ने 1967 में इस इलाके से कांग्रेस के दिग्गज नेता आर. शंकर पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी.

वैसे तो अट्टिंगल में पोमुड्डी और अगस्त्यार्कूदम के पहाड़ी इलाके आते हैं, लेकिन कस्तूरीरंगन रिपोर्ट इस इलाके के लोगों की गंभीर चिंताओं का समाधान उस तरह से करने में विफल रही है, जैसा कि राज्य के अन्य पहाड़ी इलाकों इडुक्की और वायनाड में हो सका है. वेस्टर्न घाट इकोलाॅजी एक्सपर्ट पैनल के रिपोर्ट की समीक्षा के लिए कस्तूरीरंगन कमिटी बनी थी.

बीजेपी लगा रही जोर

यह संसदीय क्षेत्र सबरीमाला मंदिर आंदोलन के प्रभाव वाले इलाकों में है. राज्य बीजेपी जिन चार संसदीय क्षेत्रों पर अपना खास जोर लगा रही है, उनमें एक अट्टिंगल भी है. उसे उम्मीद है कि सबरीमाला आंदोलन और अच्छे संगठन की बदौलत इन क्षेत्रों में बेहतर नतीजे हासिल हो सकते हैं.

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प्रधानमंत्री मोदी ने 14 दिसंबर 2018 को केरल के अट्टिंगल, मावेलिक्करा, कोल्लम, पथानामथिट्टा और आलप्पुझा के भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संवाद किया था.

महिला मतदाता ज्यादा

यह संसदीय क्षेत्र तिरुअनंतपुरम जिले में आता है. साल 2011 की जनगणना के मुताबिक तिरुअनंतपुरम जिले की कुल जनसंख्या 33,01,427 है. इसमें से 15,81,678 पुरुष और 17,19,749 महिलाएं हैं. यानी इस जिले में महिलाओं की संख्या ज्यादा है. यहां प्रति हजार पुरुषों के मुकाबले 1087 महिलाएं हैं. इनमें से 66.46 फीसदी हिंदू और 19.10 फीसदी क्रिश्चियन हैं. अनुसूचित जाति के लोगों की संख्या 3,72,977 और अनुसूचित जनजाति के लोगों की संख्या 26,759 थी.

जिले की साक्षरता दर करीब 93 फीसदी है. जिले के लोगों की आमदनी का मुख्य स्रोत खेती ही है. अट्टिंगल लोकसभा सीट में 2014 में कुल 12,51,398 मतदाता थे, जिनमें से पुरुष मतदाता 5,75,780 और महिला मतदाता 6,75,618 थे.

ट्रेड यूनियन आंदोलन से जुड़े सांसद

56 वर्षीय ए. संपत तीसरी बार सांसद बने हैं. वह एक एडवोकेट, ट्रेड यूनियन आंदोलनकारी और लेखक हैं. वह विवाहित हैं और उनकी दो संतान, एक बेटा और एक बेटी हैं. उन्होंने एमए, एलएलएम और पीएचडी किया है. उनके संसदीय प्रदर्शन की बात करें तो संसद में उनकी उपस्थिति करीब 75 फीसदी रही है. उन्होंने 366 सवाल पूछे हैं और 214 बार बहस आदि में हिस्सा लिया है. उन्होंने पांच बार प्राइवेट मेंबर बिल भी पेश किए हैं. उन्हें सांसद विकास निधि के तहत पिछले पांच साल में ब्याज सहित 26.92 करोड़ रुपये मिले और वे इसमें से 22.78 करोड़ रुपए खर्च कर पाए यानी करीब 89 फीसदी.

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