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आंध्र के इस सीट पर BJP का दबदबा, क्या 2019 में दोबारा मिलेगी जीत?

1991 से 1993 तक वो भाजपा के प्रदेश राज्य कार्यकारी कमेटी के सदस्य बने. इसके बाद पार्टी ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी और 1993 से 2003 तक आंध्र प्रदेश भाजपा के महासचिव रहे. इस बीच 1999 में उन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ा और जीते.

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हरिबाबू
हरिबाबू

भारतीय जनता पार्टी के लिए 2014 में हुए आम चुनाव में विशाखापत्तनम लोकसभा सीट बेहद अहम रही. यह पहली बार था जब बीजेपी ने इस सीट पर जीत हासिल की थी. विशाखापत्तनम सीट के लिए भाजपा ने बड़ा दांव खेला था और तात्कालीन सांसद डी पुरंदेश्वरी के बजाय अपने नेता हरिबाबू पर भरोसा जताया था. जिसके बाद पार्टी को पहली बार इस सीट पर जीत हासिल हुई.

विशाखापत्तनम लोकसभा सीट पर 2014 आम चुनाव के बाद सारे समीकरण बदल गए हैं. दरअसल, 2014 में आम चुनाव से पहले एनटीआर की बेटी डी पुरंदेश्वरी ने कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामा था, लेकिन तात्कालीन लोकसभा सांसद होने के बावजूद भाजपा नें उन्हें 2014 के चुनाव के लिए टिकट नहीं थमाया, बल्कि उनकी जगह हरिबाबू को मैदान में उतारा जिन्होंने YSR कांग्रेस उम्मीदवार वाई एस विजयम्मा को 90 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से हराया. बताया जाता है कि उन्हें तेलुगू देशम पार्टी के विरोध के कारण विशाखापत्तनम लोकसभा सीट से टिकट नहीं मिला. पुरंदेश्वरी ने 2009 आम चुनाव में प्रजा राज्यम पार्टी (PRAP) के पल्ला श्रीनिवास राव को हराया था. जिसके बाद कांग्रेस ने उन्हें केंद्र में वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री बनाया था.

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दरअसल, डी पुरंदेश्वरी और एन. चंद्रबाबू नायडू के बीच लंबे समय से राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता रही है. टीडीपी के कारण ही पुरंदेश्वरी को 2014 में बीजेपी से टिकट नहीं मिला था. हालांकि, टीडीपी के एनडीए से अलग होने के बाद पुरंदेश्वरी ने नायडू पर हमले तेज कर दिए. उन्होंने कहा कि एनटीआर ने जिस कांग्रेस के खिलाफ टीडीपी की स्थापना की थी नायडू ने उसी के साथ हाथ मिलाकर उनके विचारों की आहुति दे दी. नायडू एन.टी. रामा राव के दामाद भी हैं.

BJP का वोट प्रतिशत 3 से बढ़कर 48 पहुंचा

विशाखापत्तनम में 2014 में आम चुनावों में 48.71 फीसदी वोटों के साथ पहली बार बीजेपी का कमल खिला. यह जीत बीजेपी के लिए बहुत बड़ी जीत थी क्योंकि 2009 में बीजेपी को इस सीट पर महज 3 फीसदी वोट मिले थे जो कि 2014 में बढ़कर 48 फीसदी के पार पहुंच गया. हालांकि, वाईएसआरसीपी के लिए यह एक महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठित सीट थी क्योंकि इस सीट से जनता के बीच विजयम्मा नाम से जानी जाने वाली वाईएसआर की पत्नी और पार्टी अध्यक्ष वाई एस विजयलक्ष्मी लड़ रही थीं. टीडीपी-बीजेपी के गठबंधन के कारण उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा. मोदी लहर का नतीजा था कि इस सीट पर हुए 16 आम चुनावों में से 11 में जीत दर्ज करने वाली कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा.

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2014 में पहली बार मिली थी बीजेपी को जीत

विशाखापत्तनम लोकसभा क्षेत्र में 7 विधानसभा क्षेत्र आते हैं, लेकिन इसमें से एक भी आरक्षित सीट नहीं है. इसमें विशाखापत्तनम ईस्ट, विशाखापत्तनम वेस्ट, विशाखापत्तनम नॉर्थ, विशाखापत्तनम साउथ, भिमली, श्रंगवरपुकोटा और गजुवाका विधानसभा सीटें आती हैं.

2014 के आम चुनावों में इस सीट पर कुल 26 लोगों ने उम्मीदवारी जताई थी. जिसमें से 22 लोगों ने चुनाव लड़ा. विशाखापत्तनम लोकसभा में कुल 1,723,011 मतदाता हैं, जिसमें 8.7 लाख पुरुष और 8.4 लाख महिला मतदाता हैं. इस सीट पर सबसे ज्यादा 11 बार कांग्रेस का कब्जा रहा. टीडीपी के गठन के समय तक यह सीट कांग्रेस के कब्जे में रही. उसके बाद हुए 9 आम चुनावों में 4 बार (11वीं, 12वीं, 14वीं और 15वीं लोकसभा में) कांग्रेस ने सीट पर कब्जा किया. जबकि, तीन बार टीडीपी और 2014 में पहली बार बीजेपी ने जीत हासिल की.

राजनीतिक सफर

प्रेफेसर से नेता बने हरिबाबू का लंबा राजनीतिक सफर रहा है. इनकी शुरुआत जनता पार्टी से हुई. 1977 में आंध्र प्रदेश के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में ये जनता पार्टी से जुड़े. पार्टी ने 1978 में इन्हें आंध्र प्रदेश जनता युवा मोर्चा का उपाध्यक्ष बनाया. 1988 में उन्हें आंध्र प्रदेश यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन का जनरल सेक्रेटरी बनाया गया. इस दौरान उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में खूब काम किए.

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1991 से 1993 तक वो भाजपा के प्रदेश राज्य कार्यकारी कमेटी के सदस्य बने. इसके बाद पार्टी ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी और 1993 से 2003 तक आंध्र प्रदेश भाजपा के महासचिव रहे. इस बीच 1999 में उन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ा और जीते. 2005 में उन्हें भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया. इसके बाद 2014 में उन्हें लोकसभा चुनाव से पहले आंध्र प्रदेश भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया.

जेपी आंदोलन में गए जेल

1972 में आंध्र प्रदेश राज्य के निर्माण के लिए हुए 'जय आंध्र' आंदोलन में उन्होंने हिस्सा लिया. छात्र जीवन से ही उनके अंदर नेतृत्व की झलक दिखने लगी थी. 1972-73 में वो आंध्र यूनिवर्सिटी के इंजीनियरिंग कॉलेज में सचिव बने. इसके बाद 1974-1975 में उन्होंने जेपी आंदोलन में बढ़-चढकर हिस्सा लिया.  यही वो समय था जब MISA एक्ट के तहत उनकी गिरफ्तारी हुई और उन्हें जेल जाना पड़ा. 6 महीने वो विशाखापत्तनम के मुर्शिदाबाद जेल में बंद रहे. हरिबाबू आंध्र विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग कॉलेज में 24 सालों तक प्रोफेसर के तौर पर कार्यरत रहे.

10 सेशन में 100 फीसदी हाजिरी

हरिबाबू लोकसभा में काफी सक्रिय रहे हैं. इनकी सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 10 सेशन में उनकी उपस्थिति 100 फीसदी रही. उन्होंने 18 बहसों में हिस्सा लेते हुए 319 सवाल पूछे. इस दौरान उन्होंने जीएसटी, हेल्थ इंस्योरेंस, ट्राइबल्स अफेयर, वाटर रिसोर्स, पर्यटन और रेलवे से संबंधित बहसों में हिस्सा लिया.

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सांसद निधि का खर्च

केंद्र सरकार की तरफ से विशाखापत्तनम लोकसभा सीट के लिए सांसद निधि के तहत 25 करोड़ की राशि मिलने का प्रावधान है. हालांकि, इस क्षेत्र के लिए केंद्र ने 22.50 करोड़ की राशि जारी की. जिसके बाद सांसद हरिबाबू ने अपने लोकसभा क्षेत्र में विकास के कार्यों के लिए 29.00 करोड़ रुपये की राशि का सुझाव केंद्र को दिया, इसमें से उन्हें 24.46 करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी मिल गई. हरिबाबू ने 22.13 करोड़ रुपये की राशि को विकास कार्यों पर खर्च किया.

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