वारंगल लोकसभा सीट तेलंगाना के वारंगल जिले में है. वारंगल हैदराबाद के बाद तेलंगाना का दूसरा सबसे बड़ा शहर है. वारंगल को भारत के 11 महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहरों वाले शहरों में शुमार कर HRIDAY- हेरिटेज सिटी डेवलपमेंट एंड ऑगमेंटेशन योजना में शामिल किया गया है. इसे भारत सरकार के स्मार्ट सिटी मिशन में स्मार्ट सिटी के तौर पर भी चुना गया था. 2011 की जनगणना के मुताबिक यह भारत के सबसे तेजी से शहर बनते इलाकों में से है. यहां 19 से 28 फीसदी की तेजी से शहरीकरण हो रहा है. यहां का मुख्य व्यवसाय अब भी खेती है जो मुख्य रूप से मॉनसून और बारिश पर निर्भर है. यहां मुख्य रूप से धान, कपास, आम और गेहूं की खेती होती है. तेलंगाना की वारंगल लोकसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है. इस समय यहां से टीआरएस के दयाकर पासुनूरी सांसद हैं. वह इस सीट के प्रतिनिधि पहली बार बने हैं.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
1952 में अस्तित्व में आने के समय से यह लोकसभा सीट कांग्रेस का गढ़ रही है. यहां हुए 16 आम चुनावों में से कांग्रेस को आठ बार जीत मिली है. इनके अलावा टीआरएस और टीडीपी भी बीच-बीच में चुनाव जीतती रही हैं. टीआरएस को 2015 में हुए उपचुनावों को मिलाकर तीन बार जीत मिली है. 2015 के उपचुनावों में दयाकर पासुनूरी रिकॉर्ड मतों के अंतर से जीते थे. वारंगल लोकसभा सीट पर 2015 के लोकसभा उपचुनाव हुए थे, जिनमें टीआरएस के दयाकर पासुनूरी ने जीत का रिकॉर्ड बनाया था. उन्होंने कांग्रेस के एस. सत्यनारायण को रिकॉर्ड करीब 4.60 लाख वोटों के अंतर से मात दी थी. इस सीट पर आजतक कोई इतनी बड़ी जीत दर्ज नहीं कर सका है. उन्हें 59.50 फीसदी यानी 6,15,403 वोट मिले थे. दूसरे नंबर पर रहे कांग्रेस के एस. सत्यनारायण को 15.11 फीसदी यानी 1,56,315 वोट मिले थे. तीसरे नंबर पर भाजपा के पी. देवैया रहे थे. उन्हें 1,29,868 वोट मिले थे.
सामाजिक ताना-बाना
2011 की जनगणना के मुताबिक इस लोकसभा सीट की 60 फीसदी आबादी ग्रामीण और 40 फीसदी आबादी शहरी है. इस सीट में अनुसूचित जाति की आबादी कुल आबादी की 19.58 फीसदी है और अनुसूचित जनजाति की आबादी कुल आबादी की 7.39 फीसदी है. वारंगल में 7,71,756 पुरुष और 7,66,025 महिला यानी कुल 15,37,781 मतदाता हैं. इस लोकसभा सीट पर वोटर टर्नआउट औसतन ठीक रहता है. 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में यहां पर महिला और पुरुष दोनों मतदाताओं ने 76 फीसदी से ज्यादा संख्या में मतदान किया था. वारंगल लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में सात विधानसभा सीटें आती हैं. इनमें से पांच विधानसभा सीटें- पालाकुरथी, पारकल, वारंगल पूर्व, वारंगल पश्चिम और भुपालपल्ले अनारक्षित हैं तो दो सीटें- घानपुर (स्टेशन) और वारधन्नापेट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित हैं. 2018 में हुए चुनावों में इनमें से छह सीटों पर टीआरएस को जीत मिली थी तो एक सीट पर कांग्रेस जीती थी.
2014 का जनादेश
2014 के लोकसभा चुनावों में टीआरएस के कादियाम श्रीहरि ने कांग्रेस के आर. सिरिसिला को 3.92 लाख वोटों के अंतर से मात दी थी. कादियाम को 56.33 फीसदी यानी 6,61,639 वोट मिले थे. वहीं, कांग्रेस के सिरिसिला को 22.91 फीसदी यानी 2,69,065 वोट मिले थे. तीसरे नंबर पर भाजपा के परमेश्वर रामागाला रहे थे. उन्हें 1,87,139 वोट मिले थे. इससे पहले, 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने टीडीपी से यह सीट छीन ली थी. कांग्रेस के टिकट पर आर. सिरिसिला को 38.48 फीसदी यानी 3,96,568 वोट मिले थे. दूसरे नंबर पर टीआरएस के आर. परमेश्वर रहे थे. उन्हें 26.39 फीसदी यानी 2,71,907 वोट मिले थे. तीसरे नंबर पर टीडीपी के डी. सम्बैया रहे थे. उन्हें 1,35,697 वोट मिले थे.
सांसद का रिपोर्ट कार्ड
वारंगल लोकसभा सीट से सांसद दयाकर पासुनूरी की संसद में उपस्थिति 52 फीसदी रही है. इस मामले में राष्ट्रीय सांसदों का औसत 80 फीसदी रहा है और तेलंगाना के सांसदों का औसत 69 फीसदी रहा है. इस दौरान उन्होंने केवल 2 बहसों में हिस्सा लिया. श्रीहरि ने 5 सवाल पूछे और एक प्राइवेट मेंबर बिल भी पेश किया. दयाकर पासुनूरी ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए 12.50 करोड़ रुपये मिले थे जो ब्याज समेत 17.79 करोड़ हो गए थे. इसमें से उन्होंने 16.91 करोड़ रुपये विकास कार्यों में खर्च किए, जो मूल आवंटित फंड का 133.53 फीसदी होता है. उनके फंड में से 89 लाख रुपये बिना खर्च किए रह गए. उनसे पहले यहां से सांसद रहे श्रीहरि कादियाम को भी विकास कार्यों के लिए 5 करोड़ रुपये आवंटित हुए थे, जिसमें से वह कुछ भी खर्च नहीं कर सके थे.