scorecardresearch
 

नगीना लोकसभा सीट: मुस्लिम बहुल क्षेत्र में क्या जीत दोहरा पाएगी BJP?

Nagina Loksabha constituency 2019 का लोकसभा चुनाव अपने आप में ऐतिहासिक होने जा रहा है. लोकसभा सीटों के लिहाज से सबसे बड़ा प्रदेश उत्तर प्रदेश की नगीना लोकसभा सीट क्यों है खास, इस लेख में पढ़ें...

Advertisement
X
BJP
BJP

उत्तर प्रदेश की नई लोकसभा सीटों में से एक नगीना आरक्षित सीट है. यह सीट 2009 लोकसभा चुनाव से पहले ही अस्तित्व में आई थी. 2009 में ये सीट समाजवादी पार्टी के खाते में गई तो 2014 में इस सीट पर भी मोदी लहर का असर दिखा और भारतीय जनता पार्टी के खाते में गई. मुस्लिम बहुल होने के बावजूद भी ये सीट बीजेपी के पास गई, अब इस चुनाव में एक बार फिर बीजेपी की नजर यहां से जीत हासिल करने पर है.

नगीना लोकसभा सीट का इतिहास

नगीना लोकसभा सीट का इतिहास इतना पुराना नहीं है, पहले ये हिस्सा बिजनौर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत ही आता था. लेकिन 2008 में हुए परिसीमन के दौरान इसे अलग क्षेत्र बनाने की मांग शुरू हुई और 2009 के लोकसभा चुनाव में इसे अलग कर दिया गया. 2009 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के यशवीर सिंह ने यहां पर जीत दर्ज की. लेकिन अगले ही चुनाव में उन्हें मुंह की खानी पड़ी. 2014 में चली बीजेपी की आंधी में यहां पर भी पार्टी को फायदा मिला और यशवंत सिंह ने बड़े अंतर से सीट दर्ज की.

Advertisement

नगीना लोकसभा सीट का समीकरण

नगीना लोकसभा सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट है, यहां करीब 21 फीसदी एससी वोटर हैं. हालांकि, यहां मुस्लिम वोटर भी कम नहीं हैं अगर यहां आने वाली सभी विधानसभा सीटों का हिसाब लगाएं तो करीब 50 फीसदी से अधिक मुस्लिम वोटर यहां पर हैं. यही कारण है कि राजनीतिक लिहाज से ये सीट काफी अहम है.

इस सीट पर कुल 14,93,411 मतदाता हैं. इनमें 7,95,554 पुरुष और 6,97,857 महिला वोटर हैं. 2014 में इस सीट पर 63.1 फीसदी वोट डाले गए थे, इनमें से 6,470 वोट NOTA को पड़े थे.

नगीना लोकसभा क्षेत्र में कुल 5 विधानसभा सीटें आती हैं. इनमें नजीबाबाद, नगीना, धामपुर, नहटौर और नूरपुर की सीट शामिल है. 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में तीन सीटें भारतीय जनता पार्टी और दो सीटें समाजवादी पार्टी के पास गई थीं. हालांकि, इनमें से 2018 में नूरपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ, जिसमें समाजवादी पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी को हराकर जीत दर्ज की थी. नूरपुर का उपचुनाव कैराना के उपचुनाव के साथ ही हुआ था.

करीब 1 लाख वोट से जीते थे यशवंत

2014 में भारतीय जनता पार्टी ने यहां से यशवंत सिंह को मैदान में उतारा और उन्होंने पूर्व सांसद यशवीर सिंह को मात दे दी. यशवीर सिंह समाजवादी पार्टी की ओर से मैदान में थे. बीजेपी के यशवंत सिंह को कुल 39 फीसदी वोट मिले थे.

Advertisement

2014 लोकसभा चुनाव के नतीजे

यशवंत सिंह, भारतीय जनता पार्टी, कुल वोट मिले 367,825, 39 फीसदी

यशवीर सिंह, समाजवादी पार्टी, कुल वोट मिले 275,435, 29.2 फीसदी

गिरीश चंद्रा, बहुजन समाज पार्टी, कुल वोट मिले 245,685, 26.1 फीसदी

सांसद यशवंत सिंह का प्रोफाइल

नगीना से दलित सांसद यशवंत सिंह ने हाल ही में सुर्खियां बटोरी थीं जब उन्होंने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. दरअसल, यशवंत सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिख कहा था कि केंद्र सरकार ने अपने कार्यकाल में दलितों के लिए कुछ भी नहीं किया है और जल्द से जल्द दलितों के लिए आरक्षण बिल पास करने की मांग की थी.

यशवंत सिंह सांसद चुने जाने से पहले दो बार विधायक भी रह चुके हैं. 2007 में उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार में वह राज्य सरकार में मंत्री भी बने थे. यशवंत सिंह के पास 3 करोड़ रुपये से भी अधिक की संपत्ति है, इनमें 2.39 करोड़ अचल और 1 करोड़ की चल संपत्ति शामिल है.

16वीं लोकसभा में यशवंत सिंह ने कुल 34 बहस में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने एक भी सवाल नहीं पूछा हालांकि सरकार की ओर से तीन बिल जरूर पेश किए. 2014 में उन्हें ग्रामीण विकास से जुड़ी संसद की स्टैंडिंग कमेटी का हिस्सा बनाया गया. इसके अलावा वह रेल मंत्रालय की कमेटी का भी हिस्सा हैं.

Advertisement

Advertisement
Advertisement