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महागठबंधन में सीटों को लेकर फसा पेंच, दिल्ली की बैठक में होगा सीटों पर फैसला

जीतनराम मांझी ने स्पष्ट किया है कि अभी कोई बंटवारा तय नही हुआ हैं. उन्होंने कहा कि सीटों के तालमेल को लेकर कई राउंड की बैठक हो चुकी है. सोमवार को भी पटना में बैठक हुई, लेकिन कांग्रेस के प्रतिनिधि नहीं शामिल हुए.

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बिहार में महागठबंधन (फोटो-फाइल)
बिहार में महागठबंधन (फोटो-फाइल)

बिहार के महागठबंधन में  सीट शेयरिंग का पेंच अभी भी फंसा हुआ हैं. सारी अटकलों पर विराम लगाते हुए हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा पार्टी (हम) के अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने कहा है कि अभी तक महागठबंधन में सीटों का बंटवारा तय नही हुआ हैं. 13 और 14 मार्च को दिल्ली में होने वाली बैठक के बाद 15 मार्च को सीटों के बंटवारे का ऐलान हो जाएगा.

इस बीच  खबरें आने लगी थीं कि महाठबंधन में सीटों का बंटवारा हो गया है. इसमें कोई आरजेडी को 18 सीट पर तो कोई 20 सीटों पर चुनाव लड़वा रहा है. कांग्रेस को 10 से 12 सीटें मिलने की अटकलें लगाई जा रही हैं. वहीं उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी को 3 और हम पार्टी को 2 सीट देने की बात कही जा रही है. लेकिन जीतनराम मांझी ने स्पष्ट किया है कि अभी कोई बंटवारा नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि सीटों के तालमेल को लेकर कई राउंड की बैठक हो चुकी है. सोमवार को भी पटना में बैठक हुई, लेकिन कांग्रेस के प्रतिनिधि नहीं शामिल हुए.

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2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और आरजेडी का गठबंधन था. जिसमें कांग्रेस 12 और आरजेडी 27 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और एक सीट एनसीपी के लिए छोड़ी गई थी. आरजेडी का कहना है कि गठबंधन में कई पार्टियों के शामिल होने के कारण वो 5 से 7 सीट छोड़ने के लिए तैयार है. उसी अनुपात में कांग्रेस को भी बलिदान देना चाहिए यानी उसे भी 7 या 8 सीटें ही मिलनी चाहिए.

लेकिन कांग्रेस तो फ्रंटफुट पर खेलना चाहती है. उसका कहना है कि 2014 के मुकाबले वो अब ज्यादा मजबूत है, उस समय उसके चार विधायक थे अब विधानसभा में 27 विधायक हैं. कांग्रेस का कहना है कि हमारे पास दरभंगा से लड़ने के लिए कर्ति आजाद जैसे मजबूत उम्मीदवार हैं, कटिहार से तारिक अनवर है ऐसे में कम सीटों पर चुनाव लड़ने का सवाल नही है.

उधर जीतनराम मांझी का मुकाबला कांग्रेस से ही है. उनका कहना है कि सम्माजनक समझौता नहीं होगा तो हम चुनाव नहीं लड़ेंगे. कांग्रेस की तरफ से यह संकेत बार बार आ रहा है कि अगर सम्मानजनक सीटें नही मिली तो वो अकेले भी चुनाव मैदान में उतर सकती है. दूसरी तरफ लेफ्ट पार्टियां अलग से आंख दिखा रही हैं. उन्हें तीन सीट मिलनी चाहिए जिसमें एक कन्हैया कुमार के लिए बेगूसराय हो. हांलाकि आरजेडी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने साफ कहा कि लेफ्ट से कोई बातचीत नही हो रही है. तो अब सबकी नजर 13-14 को दिल्ली में होने वाली बैठक पर है.

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