लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम जोर- शोर से उछाला जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से कई मामलों में राजीव गांधी का नाम लिए जाने के बाद बीजेपी और कांग्रेस में चुनावी जंग तीखी होती जा रही है. अब इस जंग में अरुण जेटली भी कूद गए हैं. उन्होंने ट्वीट कर आरोप लगाया कि कांग्रेस पिछले 24 सालों से जिस डीएमके को राजीव गांधी की हत्या के लिए जिम्मेदार मानती रही आज वही पार्टी उसकी पार्टनर है.
वित्त मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने गुरुवार को कांग्रेस पर हमला करते हुए ताबड़तोड़ 3 ट्वीट्स किए. उन्होंने अपने पहले ट्वीट में कहा कि कामदार भारतीय वायुसेना के सामानों का इस्तेमाल आतंक के खिलाफ हमला करने के लिए करते हैं तो नामदार अपने परिवार और ससुराल वालों के साथ निजी छुट्टियों के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं.
The Kaamdars use India’s Naval assets to strike at terror. The Naamdars use them for personal vacations with family and in-laws.
— Chowkidar Arun Jaitley (@arunjaitley) May 9, 2019
अरुण जेटली ने अपने दूसरे ट्वीट में कहा कि राजीव गांधी की हत्या के समय केंद्र में दिसंबर 1990 से मई 1991 के बीच कांग्रेस के समर्थन से चंद्रशेखर की सरकार थी. उन्होंने अपने तीसरे ट्वीट में कहा कि 1991 से 2004 के बीच कांग्रेस राजीव गांधी की हत्या के लिए डीएमके पर हमेशा आरोप लगाती रही है. यहां तक की इसी आधार पर कांग्रेस ने संयुक्त मोर्चा सरकार से समर्थन भी ले लिया था और आज 28 साल बाद हताश कांग्रेस ने बीजेपी की भूमिका तलाश ली है.
From December 1990 till May 1991, when Shri Rajiv Gandhi was assassinated, the Congress Party supported Chandra Shekhar government was in power.
— Chowkidar Arun Jaitley (@arunjaitley) May 9, 2019
From May 1991 till 2004, the Congress blamed its present ally the DMK for Shri Rajiv Gandhi's assassination. It even withdrew support from the United Front government on this ground. 28 years later, today a desperate Congress has discovered a BJP role.
— Chowkidar Arun Jaitley (@arunjaitley) May 9, 2019
अहमद पटेल ने की आलोचना
इससे पहले कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने गुरुवार सुबह ट्वीट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि बीजेपी के समर्थन वाली वीपी सिंह सरकार ने ही राजीव गांधी को अतिरिक्त सुरक्षा देने से इनकार कर दिया था. राजीव गांधी के खिलाफ कई इनपुट होने के बावजूद भी बीजेपी के समर्थन वाली वीपी सिंह की सरकार ने उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा नहीं दी थी. राजीव ने अपनी जिंदगी इसी नफरत के कारण गंवा दी. दुख की बात यह है कि इन बेबुनियाद आरोपों का जवाब देने के लिए आज वह हमारे बीच नहीं हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले हफ्ते राजीव गांधी को भ्रष्टाचारी नंबर 1 कहा था और उसके बाद आईएनएस विराट का निजी इस्तेमाल करने का आरोप लगाया. इसके बाद से अब लोकसभा चुनाव की जंग में राजीव गांधी अहम मुद्दा बन गए हैं.
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदुर में 21 मई, 1991 को आम चुनाव के प्रचार के दौरान एलटीटीई (लिट्टे) के आत्मघाती हमलावर ने उनकी हत्या कर दी थी. 1991 में चुनाव प्रचार के दौरान जब राजीव गांधी श्रीपेरुमबुदुर पहुंचे तो वहां पर रैली से पहले एक आत्मघाती हमले में उनकी हत्या कर दी गई. धनु नाम की महिला हमलावर ने राजीव के पैर छूने के बाद खुद को बम से उड़ा लिया था. इस हमले में राजीव गांधी के अलावा 14 और लोगों की जान चली गई थी.
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