झारखंड की सियासी जमीन ब्यूरोक्रेट्स के लिए काफी उपजाऊ रही है. इसी के चलते कई अफसरों ने नौकरी छोड़कर या फिर रिटायरमेंट के बाद राजनीति में किस्मत आजमाई और सफल रहे हैं. इसी ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए इस बार भी कई ब्यूरोक्रेट्स चुनाव में किस्मत आजमा रहे हैं. इसी मद्देनजर विधानसभा चुनाव से ऐन पहले कई नौकरशाहों ने बीजेपी का दामन थामा था.
झारखंड के सियासी रण में इस बार कई ब्यूरोक्रेट्स चुनावी मैदान में उतरे हैं. इसमें पूर्व एडीजी रामेश्वर उरांव कांग्रेस के टिकट पर लोहरदगा सीट से, पूर्व एडीजी रेजी डुंगडुंग झारखंड पार्टी के टिकट पर सिमडेगा से, पूर्वआईजी लक्ष्मण उरांव बीजेपी के टिकट परराजधनवार से और पूर्व आईएएस जेबी तुबिद बीजेपी के टिकट पर चाईबासा से चुनाव लड़ रहे हैं. इसके अलावा पूर्व जेएएस सुखदेव भगत बीजेपी के टिकट पर लोहरदगा और पूर्व जेएएस डॉ. लंबोदर महतो गामिया से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं.
एडीजी के पद से वीआरएस लेकर 2005 में चुनाव लड़ने वाले डा. रामेश्वर उरांव लोहरदगा से सांसद बने थे और यूपीए सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. मौजूदा समय में रामेश्वर उरांव कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हैं और लोहरदगा विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतरे हैं. इस तरह से लोहरदगा सीट पर बीजेपी से सुखदेव भगत चुनावी मैदान में उतरे हैं.
सुखदेव भगत भी ब्यूरोक्रेट्स रहे हैं. उन्होंने 2005 में बीडीओ की नौकरी छोड़कर राजनीति में कदम रखा था और कांग्रेस से विधायक चुने गए थे. इसके बाद 2009 और 2014 के चुनाव में हार गए, लेकिन इसी साल लोहरदगा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस से जीत दर्ज की थी. विधानसभा चुनाव से ऐन पहले उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया है और पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है.
पूर्व डीजीपी डीके पांडेय टिकट की उम्मीद में बीजेपी में शामिल हुए थे, लेकिन टिकट नहीं मिला है. ऐसे ही पूर्व आईपीएस अरुण उरांव बीजेपी में शामिल हुए, पर टिकट नहीं मिल सका. पिछले विधानसभा चुनाव में तत्कालीन आईजी लक्ष्मण सिंह और शीतल उरांव वीआरएस लेकर बीजेपी में शामिल हुए थे. इस तरह से लक्ष्मण सिंह को टिकट मिला था लेकिन शीतल उरांव को निराशा हाथ लगी थी. लक्ष्मण उरांव पर फिर से बीजेपी ने भरोसा जताया है.
पूर्व डीजीपी राजीव कुमार कांके सीट से कांग्रेस का टिकट पाने में सफल रहे, लेकिन बाद में पार्टी कार्यकर्ताओं के विरोध के बाद इसे वापस ले लिया गया. पूर्व आईएएस सुचिता सिन्हा भी अक्टूबर में बीजेपी में शामिल हो गईं, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिल सका है.