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Delhi Elections 2020: दिल्ली में क्या हो रहा है? सुबह नारेबाजी के बाद शाम को जामिया में चलीं गोलियां

राजधानी में चुनावी माहौल के बीच हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं. पिछले कुछ दिनों में दिल्ली में तीन मामले ऐसे हुए हैं जहां पर खुलेआम फायरिंग हुई हैं जो दिल्ली पुलिस पर सवाल खड़े करती हैं.

फायरिंग की घटनाओं के बाद कानून व्यवस्था पर सवाल! (फोटो: ANI) फायरिंग की घटनाओं के बाद कानून व्यवस्था पर सवाल! (फोटो: ANI)

  • दिल्ली में नहीं थम रही गोलियों की गूंज
  • पिछले एक हफ्ते में तीन बार चली गोली
  • कानून व्यवस्था पर उठ रहे हैं सवाल

दिल्ली में जारी चुनावी दंगल के बीच कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे हैं. एक ओर चुनाव के लिए प्रचार चल रहा है तो दूसरी ओर नागरिकता संशोधन एक्ट के विरोध में शाहीन बाग में विरोध प्रदर्शन हो रहा है. इन्हीं दोनों मुद्दों के बीच कानून व्यवस्था कहीं छुप गई है और पिछले एक हफ्ते में तीन ऐसी घटनाएं सामने आई हैं जहां दिल्ली की सड़कों पर खुलेआम गोलियां चलाई गई हैं. ताजा घटना रविवार की है जहां सुबह तो प्रदर्शनकारी ‘देश के गद्दारों...’ के नारे लगाते हैं और कुछ ही घंटे बाद दो अंजान शख्स गोलियां चला भी देते हैं.

दिन में लगे देश के गद्दारों... के नारे

शाहीन बाग क्षेत्र में जारी विरोध प्रदर्शन इस वक्त सबसे बड़ा चर्चा का विषय बन चुका है. इसी विरोध प्रदर्शन के विरोध में दिल्ली में रविवार को एक और प्रदर्शन हुआ. कुछ स्थानीय लोगों, युवाओं और बस्ती के लोगों ने रविवार दोपहर को नारेबाजी की. ‘देश के गद्दारों को....’ के नारे लगाते हुए प्रदर्शनकारी शाहीन बाग में बैठे लोगों को धरना स्थल से उठाने की अपील कर रहे थे.

दिल्ली पुलिस ने कुछ नारेबाजी करने वाले लोगों को हिरासत में ले लिया है, पुलिस ने अब बयान दिया है कि जामिया के पास इस तरह के प्रदर्शन की कोई इजाजत नहीं है. केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने एक जनसभा में ऐसे नारे लगाए थे, जिसे विपक्ष ने भड़काऊ बताया था.

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शाम को चल गई जामिया में गोलियां

शाहीन बाग के विरोध में दोपहर को प्रदर्शन हुआ तो रविवार की शाम और भी दहशत भरी थी. जामिया मिलिया इस्लामिया के गेट नंबर पांच के पास देर रात को दो स्कूटी सवार लोगों ने हवाई फायरिंग की. इस फायरिंग में कोई हताहत तो नहीं हुआ लेकिन इलाके में दहशत फैलाने के लिए ये काफी थी. एक बार फिर दिल्ली की सड़कों पर हलचल मची और कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे.

देर रात को चली गोली के बाद जामिया के स्टूडेंट्स ने प्रदर्शन किया, नारेबाजी की और पुलिस स्टेशन तक प्रोटेस्ट निकाला. जब पुलिस ने उनकी शिकायत पर मामला दर्ज किया तब जाकर स्टूडेंट वापस पहुंचे. इस गोली चलाने की घटना के बाद पुलिस ने संदेश दिया है कि इस घटना को लेकर अलग-अलग बयान आ रहे हैं, जिस वाहन पर हमलावर आए उसपर भी अलग-अलग दावे हो रहे हैं.

दिल्ली में कानून व्यवस्था पर सवाल

पिछले एक हफ्ते में दिल्ली में गोली चलने की तीन घटनाएं सामने आ गई हैं. 30 जनवरी को जामिया में ही एक अज्ञात हमलावर ने दिल्ली पुलिस के सामने ही खुलेआम गोली चलाई थी, जिसमें एक छात्र घायल हो गया था. उसके बाद एक और हमलावर कपिल गुर्जर ने भी गोली चलाई थी और कहा था कि इस देश में सिर्फ हिंदुओं की चलेगी. अब ये दो घटनाएं हुई ही थीं कि अब रविवार को एक और घटना हो गई.

ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल दिल्ली की कानून व्यवस्था पर ही खड़ा हो रहा है. दिल्ली पुलिस राज्य नहीं बल्कि केंद्र सरकार के अधीन आती है, यही कारण है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी लगातार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सवाल पूछ रहे हैं कि दिल्ली में ये क्या हो रहा है.

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अरविंद केजरीवाल ने अपने एक ट्वीट में लिखा, 'अमित शाह जी, ये आपने क्या हाल बना रखा है हमारी दिल्ली का. दिनदहाड़े गोलियां चल रही हैं. कानून व्यवस्था की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है. चुनाव आते-जाते रहेंगे, राजनीति भी चलती रहेगी, लेकिन दिल्ली के लोगों की खातिर, कृपया कानून व्यवस्था ठीक करने पर ध्यान दीजिए.'

दिल्ली पुलिस के कमिश्नर अमूल्य पटनायक पर भी सवाल उठ रहे हैं क्योंकि हाल ही में उन्हें एक महीने का एक्सटेंशन मिला था, लेकिन उसके बाद से ही इस तरह की घटनाएं हो रही हैं. हालात ऐसे हो गए कि चुनाव आयोग को ही पुलिस अधिकारी पर एक्शन लेना पड़ा और दक्षिण पूर्व दिल्ली के डीसीपी चिन्मय बिस्वाल का ट्रांसफर कर दिया गया.

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