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रामा सिंह: कत्ल से लेकर अपहरण तक के लगे आरोप, अब RJD में एंट्री पर सस्पेंस

रामा सिंह कई मामलों में दोषी पाए जा चुके हैं, जिसमें किडनैपिंग और कत्ल जैसे संगीन अपराध भी शामिल हैं. लेकिन अपराध की लंबी हिस्ट्री होने के बावजूद उन्हें राजपूत जाति का काफी समर्थन हासिल है.

बिहार के बाहुबली नेता रामा सिंह बिहार के बाहुबली नेता रामा सिंह
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अपने समय के नामी बाहुबली अशोक सम्राट से थी दोस्ती
  • राजपूत जाति का काफी समर्थन हासिल है रामा सिंह को

बिहार में चुनावों की तारीखों का ऐलान हो गया है. मतदान तीन चरणों में होंगे. पहले चरण का मतदान 28 अक्टूबर, दूसरे चरण का 3 नवंबर और तीसरे चरण का मतदान 7 नवंबर को होगा. चुनाव के नतीजों का ऐलान 10 नवंबर को होगा. भारत के पूर्वी भाग में बसे बिहार में राजनीति और दबंगई साथ-साथ चलती है. ना राजनीति दबंगई के बिना मुमकिन है और ना ही दबंगई राजनीति के बिना. दोनों के एक दूसरे के पूरक भी कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी.

बिहार की मिट्टी से महान हस्तियों के साथ-साथ ऐसे दबंग और बाहुबली नेता भी निकले हैं, जिन्होंने सूबे की राजनीति में खलबली मचा दी. कई बाहुबली सियासत का दामन थामकर सफेदपोश हो गए. शहाबुद्दीन, ललन सिंह, संजय सिंह, सूरजभान सिंह और अनंत सिंह जैसे कई बाहुबली नेता हैं, जिनका नाम सुनते ही आज भी लोगों में सिरहन पैदा हो जाती है. इनके बीच एक बाहुबली नेता ऐसा भी है, जो पांच बार विधायक और एक बार सांसद रहा. उसके राष्ट्रीय जनता दल में शामिल होने की खबरों से ही पार्टी में दो फाड़ हो गई.

बात हो रही है रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी से सांसद रहे रामा किशोर सिंह उर्फ रामा सिंह की. रामा सिंह कई मामलों में दोषी पाए जा चुके हैं, जिसमें किडनैपिंग और कत्ल जैसे संगीन अपराध भी शामिल हैं. लेकिन अपराध की लंबी हिस्ट्री होने के बावजूद उन्हें राजपूत जाति का काफी समर्थन हासिल है.

बाहुबली से विधायक और सांसद तक का सफर

90 के दशक में रामा किशोर सिंह का नाम तेजी से उभरा था. उनकी दोस्ती अपने समय के नामी बाहुबली अशोक सम्राट से थी. वो सिर्फ वैशाली ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर बिहार में धाक जमाने का सपना देख रहे थे. लेकिन तभी हाजीपुर में पुलिस के साथ एनकाउंटर में अशोक सम्राट मारा गया. कहा तो ये भी जाता है कि उसे मरवाने के लिए जाल रामा सिंह ने बिछवाया था. 

कैसा रहा करियर

रामा सिंह ने कई बार महनार विधानसभा सीट से जीत हासिल की. इस इलाके में उनकी तूती बोलती थी. यह सीट हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र के तहत आती है. हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र लोक जनशक्ति पार्टी और रामविलास पासवान का गढ़ माना जाता है. 2014 की मोदी लहर में वह एलजेपी के टिकट पर वैशाली से सांसद रह चुके हैं. रामा सिंह ने आरजेडी के दिवंगत कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह को हराया था. इसी हार के बाद रघुवंश प्रसाद रामा सिंह का नाम तक नहीं सुनना चाहते थे.

जुर्म की दुनिया से नाता

जयचंद अपहरण केस (2001): यूं तो रामा सिंह का नाम कई मामलों में आ चुका है. लेकिन जब वो विधायक बन गए तो उनका नाम पुलिस रिकॉर्ड में आया. केस साल 2001 का है, जब छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के कुम्हारी इलाके में 29 मार्च 2001 को पेट्रोल पंप व्यवसायी जयचंद वैद्य की किडनैपिंग हुई थी. किडनैपर्स जयचंद को उनकी कार के साथ ले गए थे.

डेढ़ महीने बाद बड़ी मुश्किल से जयचंद वैद्य की रिहाई मुमकिन हो पाई थी. पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक जयचंद की किडनैपिंग में जिस कार का इस्तेमाल किया गया था, वह कार रामा किशोर सिंह के घर से ही बरामद हुई थी. इस मामले में छत्तीसगढ़ कोर्ट में रामा सिंह को सरेंडर कर जेल भी जाना पड़ा था.

चंद्रामा सिंह मर्डर केस: अगस्त 2004 में देसरी में स्थानीय चुनावों में एक उम्मीदवार चंद्रामा सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई. उस मामले में रामा सिंह और अन्य मुख्य आरोपी थे. लेकिन कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था क्योंकि मर्डर से तीन महीने पहले वह हाजीपुर जेल में थे.

जमशेदपुर ट्रिपल मर्डर केस: स्टील सिटी कहे जाने वाला जमशेदपुर भी रामा सिंह के खौफ देख चुका है. वह ट्रिपल मर्डर केस में दोषी ठहराए जा चुके हैं. वह इस मामले में मुख्य आरोपी थे और इंक्वायरी पीरियड के दौरान वह जेल में थे. हालांकि जेल की कैद से बचने के लिए वह अस्पताल में भर्ती रहे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह अस्पताल में वीआईपी ट्रीटमेंट लेते रहे और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान वक्त-वक्त पर फोन कॉल के जरिए उनके स्वास्थ्य का हालचाल लेते रहे.

बिहार में राजनीति की शह में लंबे समय से जारी अपराध को खत्म करने के वादे के बीच रामा सिंह नीतीश कुमार सरकार के निशाने पर भी रहे. इसलिए सूरजभान सिंह, अनंत सिंह और मोहम्मद शहाबुद्दीन, रीतलाल यादव जैसे बाहुबलियों के बीच रामा सिंह पर भी सरकार द्वारा स्थापित स्पेशल कोर्ट में मुकदमा चलाया गया.

क्या आरजेडी में होगी एंट्री!

रामा सिंह ने आरजेडी में शामिल होने की तैयारी तो कई महीने पहले ही कर ली थी. उनके आरजेडी की सदस्यता लेने की 29 जून की तारीख भी तय हो गई थी, लेकिन तब पार्टी के दिवंगत वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया था. तब उनकी आरजेडी छोड़ने की भी अटकलें लग रही थीं. इसके बाद अगस्त में रघुवंश प्रसाद ने इस्तीफा दे दिया. लेकिन इसके कुछ ही दिन बाद उनका निधन हो गया.  

क्यों तेजस्वी चाहते हैं रामा सिंह की एंट्री

वैशाली जिले में रामा सिंह की गिनती बड़े नेताओं में की जाती रही है और सवर्णों के बीच उनका बड़ा वोट बैंक है. एक दौर में राजपूत समुदाय बिहार में आरजेडी का मूलवोट बैंक हुआ करता था, लेकिन अब धीरे-धीरे इस समुदाय पर बीजेपी की पकड़ मजबूत हुई है. यही वजह है कि तेजस्वी यादव ने रामा सिंह के जरिए राजपूत समीकरण को मजबूत करने के लिए दांव खेलने की रणनीति बनाई है.

 

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