
बिहार की 243 विधानसभाओं में से एक फुलपरास विधानसभा सीट का क्रमांक 39 है. यह विधानसभा झंझारपुर के लोकसभा क्षेत्र और मधुबनी जिले के अंतर्गत आती है. फुलपरास में लगभग 2,81,814 वोटर हैं, जिनमें से 1,47,518 पुरुष और 1,34,290 महिला वोटर्स हैं. यह बिहार की पिछड़े इलाकों में से एक है. यहां इस बार जेडीयू ने जीत हासिल की है.
रोजगार, शिक्षा और अस्पताल अब भी इस विधानसभा में बड़ा चुनावी मुद्दा है. फुलपरास विधानसभा में दूसरे चरण के तहत वोटिंग हुई. इस चरण में 17 जिलों की 94 सीटों पर वोट डाले गए थे. इस चुनाव में कुल 55.9% वोट पड़े. इस सीट से जेडीयू की शीला कुमारी को ने जीत दर्ज की. उनको 75116 वोट हासिल हुए. वहीं कांग्रेस के कृपानाथ पाठक को 64150 वोट मिल चुके हैं.

2015 का चुनाव
2015 के चुनाव में जेडीयू की गुलजार देवी ने भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी राम सुंदर यादव को पटखनी दी थी. गुलजार देवी को जहां 64,368 मत हासिल हुए, वहीं बीजेपी के राम सुंदर यादव को 50,953 वोट मिले. इस चुनाव में कुल 13 लोग चुनावी समर में उतरे थे लेकिन 10 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी. लगभग 52.63 फीसदी लोगों ने मतदान में हिस्सा लिया था. दोनों प्रत्याशियों में जीत का अंतर 13,415 था.
सीट का इतिहास
साल 1951 में पहली बार इस विधानसभा सीट पर चुनाव हुए. तब इस सीट से काशीनाथ मिश्रा पहले विधायक चुने गए. वे कांग्रेस पार्टी से थे. 1957 और 1962 के चुनाव में भी यह सीट कांग्रेस के हाथ में ही रही और विधायक बने रसिक लाल यादव. फिर सत्ता परिवर्तन हुआ एसएसपी के डीएल मंडल 1967 में चुने गए. 2010 और 2015 के चनाव में यह सीट जेडूयी को ही मिली.
किस-किसके के बीच है मुकाबला?
फुलपरास विधानसभा में इस बार त्रिकोणीय मुकाबला बनते नजर आ रहा है. फुलपरास की मौजूदा विधायक गुलजार देवी निर्दलीय चुनाव लड़ रही हैं, क्योंकि पार्टी ने इनका टिकट काट दिया है. इनका टिकट काटकर जेडीयू ने शीला कुमारी को टिकट दिया है, जिन्हें एनडीए का समर्थन हासिल है. वहीं दूसरी तरफ महागठबंधन की ओर से कांग्रेस पार्टी के कृपानाथ पाठक हैं. अन्य राजनीतिक दलों में प्लूरल्स पार्टी की ओर से ब्रजेश कुमार कुवंर, पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया(डेमोक्रेटिक) की ओर से रत्नेश कुमार साहू, लोक जनशक्ति पार्टी की ओर से बिनोद कुमार सिंह और जन अधिकार पार्टी(लोकतांत्रिक) से गौरी शंकर यादव चुनाव लड़ रहे हैं.