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बिहार ओपिनियन पोलः रोजगार और विकास ही है वोटरों का सबसे बड़ा एजेंडा

लोकनीति-सीएसडीएस के ओपिनियन पोल में विकास और रोजगार ही यहां के वोटरों का सबसे बड़ा एजेंडा है. इस चुनाव में विकास (29%), रोजगार (20%), इंफ्लेशन (11%), गरीबी (6%), शिक्षा (7%), अन्य मुद्दे (25%) और तीन फीसदी लोगों ने किसी भी मुद्दे पर कोई रिस्पॉन्स नहीं दिया.

बिहार विधानसभा चुनाव-2020 (पीटीआई) बिहार विधानसभा चुनाव-2020 (पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • विकास और रोजगार ही वोटरों का बड़ा मुद्दा
  • सीएम के तौर पर नीतीश कुमार पहली पसंद
  • बिहार चुनाव के नतीजे 10 नवंबर को आएंगे

बिहार विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों द्वारा सत्ता में आने के लिए बड़े-बड़े वादे किए जा रहे हैं. आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने 10 लाख रोजगार देने का वादा किया है तो नीतीश कुमार विकास के बहार की बात कह रहे हैं. 

वहीं लोकनीति-सीएसडीएस के ओपिनियन पोल में विकास और रोजगार ही यहां के वोटरों का सबसे बड़ा एजेंडा है. इस चुनाव में विकास (29%), रोजगार (20%), महंगाई (11%), गरीबी (6%), शिक्षा (7%), अन्य मुद्दे (25%) और तीन फीसदी लोगों ने किसी भी मुद्दे पर कोई रिस्पॉन्स नहीं दिया.

2015 चुनाव की बात की जाए तो विकास (31%), रोजगार (9%), महंगाई (16%), गरीबी (6%), शिक्षा (2%), अन्य मुद्दे (25%) और 10 फीसदी लोगों ने किसी भी मुद्दे पर कोई रिस्पॉन्स नहीं दिया था.

बतौर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहली पसंद

बिहार चुनाव पर लोकनीति और सीएसडीएस के ओपिनियन पोल में 31 फीसदी लोगों ने बतौर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पसंद किया है, लेकिन इस रेस तेजस्वी बहुत पीछे नहीं हैं. उन पर 27 फीसदी लोगों ने भरोसा जताया है. उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को बतौर मुख्यमंत्री 5 फीसदी, चिराग पासवान को 4 फीसदी और लालू प्रसाद यादव पर तीन फीसदी लोगों ने सहमति जताई है.

लोकनीति-सीएसडीएस ओपिनियन पोल

लोकनीति-सीएसडीएस के ओपिनियन पोल में 37 विधानसभा सीटों के 148 बूथों को कवर किया गया जिनमें से 3731 लोगों से बात की गई. ये ओपिनियन पोल 10 से 17 अक्टूबर के बीच किया गया इनमें 60 फीसदी पुरुष और 40 फीसदी महिला मतदाताओं से बात की गई.

पृष्ठभूमि की बात करें तो 90 फीसदी सैंपल ग्रामीण इलाकों से और 10 फीसदी शहरी इलाकों के लोगों से बात की गई. इनमें हर आयुवर्ग के लोग शामिल थे. 18 से 25 साल तक के 14 फीसदी, 26 से 35 साल के 29 फीसदी, 36 से 45 साल के 15 फीसदी, 46 से 55 साल के 15 फीसदी और 56 साल के अधिक के 17 फीसदी लोग शामिल थे. इस सैंपल में 16 फीसदी सवर्ण, 51 फीसदी ओबीसी, 18 फीसदी एससी और 14 फीसदी मुस्लिम शामिल रहे.

एनडीए में भारतीय जनता पार्टी, जनता दल यूनाइटेड, एचएएम और वीआईपी शामिल हैं जबकि महागठबंधन में राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस, सीपीआईएमएल, सीपीआई, सीपीएम हैं. इसके अलावा ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेक्युलर फ्रंट (जीडीएसएफ) राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी),  बहुजन समाज पार्टी (बसपा), असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम, समाजवादी जनता दल, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, जनतांत्रिक पार्टी सोशलिस्ट का गठबंधन है.

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