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Supaul: चुनाव का वो दौर, जब नेता नहीं होते थे एक दूसरे के दुश्मन, प्रचार भी करते थे साथ- साथ

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इन दोनों सेनानियों के बीच महिषी विधानसभा में दशकों तक कांटे का मुकाबला रहा. राजनीति के दंगल में दोनों एक दूसरे के प्रतिद्धंदी थे, लेकिन दोनों के बीच के आपसी प्रेम में कभी कड़वाहट देखने को नहीं मिली. आजादी के बाद लहटन चौधरी सुपौल से 1952 में विधायक चुने गए.

लहटन चौधरी और परमेश्वर कुंवर की कहानी लहटन चौधरी और परमेश्वर कुंवर की कहानी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • एक दूसरे की मदद करने में भी पीछे नहीं हटते थे राजनेता
  • स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. लहटन चौधरी और परमेश्वर कुंवर की कहानी
  • चुनावी रैली में जाने के लिए कुंवर जी ने लहटन चौधरी को दे दी थी अपनी गाड़ी

भारतीय राजनीति और राजनेता समय के साथ कितने बदले हैं, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है. हम आपको बताते हैं, चुनाव के उस दौर के बारे में जब एक दूसरे ​के प्रतिद्वंदी चुनाव प्रचार साथ करते देखे जाते थे. इतना ही नहीं एक दूसरे की मदद करने में भी पीछे नहीं हटते थे. हम ऐसे ही नेताओं के बारे में आपको बताने जा रहे हैं, जिनका नाम है स्व. लहटन चौधरी और परमेश्वर कुंवर.

दशकों तक रहे एक दूसरे के प्रतिद्वंदी

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इन दोनों सेनानियों के बीच महिषी विधानसभा में दशकों तक कांटे का मुकाबला रहा. राजनीति के दंगल में दोनों एक दूसरे के प्रतिद्धंदी थे, लेकिन दोनों के बीच के आपसी प्रेम में कभी कड़वाहट देखने को नहीं मिली. आजादी के बाद लहटन चौधरी सुपौल से 1952 में विधायक चुने गए. 1957 व 1962 के आम चुनाव में धरहरा सुपौल से परमेश्वर कुंवर ने जीत हासिल की.

महिषी विधानसभा के गठन के बाद 1967 में कुंवर को जीत का सेहरा मिला. 1969 में लहटन चौधरी ने अपने विरासत को लौटाया व 1972, 1980 व 1985 में अपने बलबूते कांग्रेस का लगातार परचम लहराया. पार्टी के निर्देश पर लहटन चौधरी तत्कालीन विरोधी राजनीति के कद्दावर नेता भूपेन्द्र नारायण मंडल को हराकर चुने गए. 

1990 में लहटन चौधरी ने अपने शिष्य आनंद मोहन को अपनी विरासत सौंप राजनीति से सन्यास ले लिया. स्व. लहटन चौधरी और परमेश्वर कुंवर के बारे में लोग बताते हैं कि 1962 के चुनाव परिणाम के बाद लहटन चौधरी व परमेश्वर कुंवर के बीच इलेक्शन सूट का मुकदमा चला. दरभंगा में कोर्ट की कार्रवाई के बाद दोनों नेता एक दूसरे के साथ चाय नाश्ता और हंसी ठहाके करते हुए देखे जाते थे.

ये है रोचक किस्सा

बताया जाता है कि एक बार चुनाव में लहटन चौधरी की गाड़ी खराब हो गई. उसी दिन चंद्रायन में लहटन के समर्थन में नारायण मिश्र की सभा थी. इस सभा में उनका पहुंचना बेहद जरूरी था. इस बीच कुंवर अपने समर्थकों के बीच वहां से गुजर रहे थे. चौधरी ने कुंवर से अपनी गाड़ी देने के लिए कहा, तो कुंवर ने कार से अपना झंडा उतारकर गाड़ी लहटन को दे दी. यह देख जब कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया, तो कुंवर ने कार्यकर्ताओं को जमकर डांट पिलाई. 

कई बार ऐसा भी हुआ कि कुंवर पैदल चुनाव प्रचार में थे और लहटन चौधरी से मुलाकात हुई, तो वे उनकी गाड़ी में सवार होकर चुनाव प्रचार के लिए निकल लेते थे. चौधरी के पूछने पर कि लोग हम दोनों को एक साथ देखेंगे तो क्या सोचेंगे, कुंवर ने कहा कि आप अपने लिए वोट मांगेगे और हम अपने लिए.

(इनपुट-राम चंद्र)

 

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